निजी काम कराने के आरोपों पर नगर परिषद में हंगामा: बरगवां-अमलाई में सफाई कर्मचारी हड़ताल पर
अनूपपुर। जिले की नगर परिषद बरगवां-अमलाई में हालात तनावपूर्ण हो गए हैं। अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस द्वारा मुख्य नगरपालिका अधिकारी को ज्ञापन सौंपे जाने के बाद सफाई कर्मचारी और स्वच्छता शाखा से जुड़े कर्मचारी हड़ताल पर बैठ गए हैं।कर्मचारियों का आरोप है कि लंबे समय से उनकी समस्याओं की अनदेखी की जा रही थी, लेकिन जब हालात असहनीय हो गए तो उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा।
निजी काम कराने के गंभीर आरोप
हड़ताली कर्मचारियों ने मीडिया से बातचीत में गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि परिषद के कर्मचारियों से निजी घरेलू कार्य कराए जाते हैं। आरोप है कि घर का कचरा साफ कराने से लेकर पाली गई भैंसों की देखभाल चारा-पानी और सफाई तक का काम कर्मचारियों से कराया जाता है। कर्मचारियों का यह भी दावा है कि कपड़े धुलवाने और अन्य घरेलू कार्य भी उनसे करवाए जाते हैं। उनका कहना है कि उन्हें वेतन नगर परिषद से मिलता है, ऐसे में निजी कार्य कराना नियमों के विरुद्ध है और यह सीधे तौर पर शोषण की श्रेणी में आता है।
दो कर्मचारियों की बहाली की मांग
आवेदन में उल्लेख है कि सफाई संरक्षक प्रतीक महतो और योगेश हरिजन को 18 जनवरी से कार्य से पृथक कर दिया गया। कर्मचारी इसे अनुचित कार्रवाई बताते हुए तत्काल बहाली की मांग कर रहे हैं।
भविष्य निधि और बकाया भुगतान पर सवाल
कर्मचारियों ने वेतन से कर्मचारी भविष्य निधि की राशि कटने के बावजूद खातों में जमा न होने का आरोप लगाया है। इससे भविष्य निधि को लेकर अनियमितता की आशंका जताई जा रही है।
साथ ही लंबित एरियर का भुगतान न होने से आर्थिक परेशानी बढ़ने की बात कही गई है। कर्मचारियों का यह भी कहना है कि कार्य के दौरान आवश्यक सफाई सामग्री समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, जिससे काम प्रभावित होता है और जिम्मेदारी कर्मचारियों पर डाल दी जाती है।
अमर्यादित व्यवहार की शिकायत
स्वच्छता शाखा में अधिकारियों द्वारा अमर्यादित व्यवहार किए जाने की शिकायत भी ज्ञापन में दर्ज है। कर्मचारियों का कहना है कि पूर्व में प्रशासन को अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
सफाई व्यवस्था प्रभावित
हड़ताल के चलते परिषद क्षेत्र में साफ-सफाई व्यवस्था प्रभावित होने लगी है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आम नागरिकों को और अधिक परेशानी उठानी पड़ सकती है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। अब देखना यह है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं और कर्मचारियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है।