टिकट काउंटर बना वसूली का अड्डा: बाबू निलंबित

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                  तत्काल से लेकर सामान्य टिकटो में खुलेआम वसूली अमलाई रेलवे स्टेशन का बाबू संदीप निलंबित

आशीष कचरे 9406677672
शहडोल। रेलवे स्टेशनों के आरक्षण खिडक़ी पर टिकट बाबूओं की मनमानी और रिश्वतखोरी के मामले ने शुक्रवार को
तूल पकड़ लिया, वैसे तो शहडोल सहित जिले के अन्य रेलवे स्टेशनों से लगातार आरक्षण के नाम पर दलाली के
मामले व शिकायतें सामने आती रहती है, लेकिन शुक्रवार को अवैध वसूली करने और बाद में उसे लौटाने का वीडियो
वॉयरल होते ही, रेल प्रबंधन ने त्वरित कार्यवाही की, इस पूरे मामले में जनसंपर्क अधिकारी अम्बिकेश साहू ने बताया
कि विभाग ने उनके निलंबन के आदेश जारी करते हुए बिलासपुर तलब किया गया है।
तत्काल टिकट में दलाल हावी
रेलवे आरक्षित टिकटों की कालाबाजारी रोकने के लिए नये-नये नियम-कानून बनाता है, लेकिन आरक्षण काउंटरों पर
दलालों पर पूरी तरह से अंकुश नहीं लग पा रहा है। कई बार दलालों पर कार्रवाई होने के बाद भी स्थिति जस की तस है।
जिले के स्टेशनों पर आरक्षण टिकट काउंटरों का यह हाल है कि तत्काल टिकटों के लिए दलालों के चहेते यहां आकर
डेरा जमा लेते हैं। सुबह जब तक आम लोग अपना नंबर लगाएं, तब तक दलाल टिकट लेकर चलते बनते हैं। वहीं खबर
है कि दलाल और उनके गुर्गाे की टिकट बाबुओं की इतनी अच्छी सेटिंग है कि वह किसी भी यात्री को कंफर्म टिकट
उपलब्ध करवाने का दंभ भरते हैं।

आरक्षण टिकट खिडक़ी से मनमानी
रेलवे टिकट खिडक़ी पर बाबुओं द्वारा चिल्लर के लिए यात्रियों को परेशान किया जाता है, सुबह का वक्त हो या आधी
रात हो रेलवे टिकट पर पैसे देने पर चिल्लर आने के लिए कहा जाता है, खबर है कि दलालों को उसी समय पर बगैर
चिल्लर दिये टिकट उपलब्ध कराई जाती है, बल्कि उन्हें बाकी पैसा वापस किया जाता है, मजे की बात तो यह है कि
आये दिन रेलवे स्टेशनों में लगे कैमरों में दलालों को देखा जा सकता है, साथ ही दलालों का दखल इतना है कि वह
रेलवे टिकट बाबू के केबिन तक पहुंच जाते हैं या उस कमरे के पास जाकर अपनी सेटिंग कर लेते है। अगर कैमरों की
ही जांच हो जाये तो, दलालों और बाबूओं के गठजोड़ का खुलासा हो सकता है।
रेलवे को इस तरह देते हैं धोखा
दलाल रेलवे टिकट बुकिंग के लिए सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करते हैं। इस सॉफ्टवेयर की मदद से दोनों कैप्चा भरने
की जरूरत नहीं पड़ती है। सॉफ्टवेयर इसे बायपास करा देता है। वहीं, पेमेंट के लिए भी ओटीपी की जरूरत नहीं होती
है। सीधा पेमेंट हो जाता है। इस तरह कुछ सेकेंड में दलाल कन्फर्म टिकट बुक करा लेते हैं। एक आईडी से छह यात्रियों
के टिकट बुक हो सकता है। यानी बुकिंग की कतार में वर्चुअल छह लोग लग सकते हैं। जबकि दलाल एक आईडी से
144 लोगों की टिकट बुक करा सकता है। इस वजह से आम लोगों को टिकट नहीं मिल पाता है। पहला तो कुछ सेकंडों
में टिकट बुक होता है, और दूसरा 144 लोगों का टिकट एक साथ बुक कराता है। इतना ही नहीं सॉफ्टवेयर की मदद से
144 यात्रियों की डिटेल पहले से तैयार रहती थी, जिसे निर्धारित समय होते ही एड कर दिया जाता है। इस तरह डिटेल
भरने में लगने वाला समय भी बच जाता है।
दलाल से टिकट खरीदना है अपराध
रेल यात्रा के लिए किसी दलाल से टिकट खरीदना रेलवे अधिनियम की धार 142 (2) के तहत एक दंडनीय अपराध है.
यदि कोई यात्री किसी टिकट दलाल से टिकट खरीदता है और रेलवे की जांच के दौरान इस यात्री को पकड़ा जाता है तो,
उसे तीन महीने की जेल या 500 रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है, ये दोनों सजाएं भी एक साथ दी जा सकती हैं, यदि
आप किसी व्यक्ति या टिकट दलाल को ट्रेन का टिकट बेचते हुए देखते हैं, जिसे जिसे रेलवे ने टिकट बेचने के लिए
मान्य न किया हो तो, ऐसे व्यक्ति की सूचना आपको तुरंत रेलवे को देनी चाहिए, आप आरपीएफ या ड्यूटी पर तैनात
रेलवे के किसी कर्मचारी को इसकी सूचना दे सकते हैं।
दलालों का टिकटों पर कब्जा
टिकटों की कालाबाजारी का सीधा-सीधा असर उन यात्रियों पर पड़ता है, जो ट्रेन से ही यात्रा करना पसंद करते हैं या
अपनी आर्थिक स्थिति के चलते हवाई या सडक़ मार्ग से यात्रा नहीं कर सकते। इसके अलावा वे दूसरे यात्री भी इससे
प्रभावित होते हैं, जिन्होंने अपनी यात्राएं प्लान की होती हैं और जिन्हें समय पर पहुंचने के बावजूद टिकट खिड़कियों

से इसलिए टिकट नहीं मिल पाते, क्योंकि दलाल पहले ही उनके अधिकार के टिकटों पर कब्जा कर लेते हैं। रिजर्वेशन
प्रणाली को रेलवे इस तरह से अपग्रेड करे कि दलाल इसमें सेंध न लगा सकें।

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