4 साल से फरियाद, फिर भी नहीं सुनवाई….जनसुनवाई में फूटा पीड़ित का आक्रोश, परिवार ने दी आत्महत्या की चेतावनी सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था पर उठे सवाल.. आखिर क्यों वर्षों से भटक रहा है एक परिवार

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4 साल से फरियाद, फिर भी नहीं सुनवाई….जनसुनवाई में फूटा पीड़ित का आक्रोश, परिवार ने दी आत्महत्या की चेतावनी
सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था पर उठे सवाल..
आखिर क्यों वर्षों से भटक रहा है एक परिवार
कटनी।। जनता की समस्याओं के त्वरित समाधान के उद्देश्य से शुरू की गई सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था पर मंगलवार को उस समय गंभीर सवाल खड़े हो गए, जब अपनी समस्या को लेकर वर्षों से भटक रहा एक पीड़ित परिवार कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में ही आक्रोशित हो उठा। चार साल से लगातार शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने से परेशान पीड़ित ने अधिकारियों के सामने ही हंगामा कर दिया और न्याय नहीं मिलने पर पूरे परिवार के साथ आत्महत्या करने तक की चेतावनी दे डाली।
जानकारी के अनुसार ग्राम पंचायत कछंगवा, देवरी कला पीरबाबा निवासी कमोद प्रसाद विश्वकर्मा मंगलवार को अपने परिवार के साथ कलेक्ट्रेट पहुंचे थे। उनका कहना है कि उनके क्षेत्र में लंबे समय से पानी निकासी और पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। इस समस्या को लेकर वे वर्ष 2022 से लगातार शिकायतें कर रहे हैं, लेकिन वर्ष 2026 तक भी समाधान नहीं हो पाया।
पीड़ित का आरोप है कि समर्थ पाइप कंपनी के मालिक बजाज द्वारा शासकीय नाली की जमीन पर कब्जा कर निर्माण कर लिया गया है। इसी कारण क्षेत्र की पानी निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है और आसपास के लोगों को पीने के पानी की भी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। पीड़ित का कहना है कि उन्होंने सैकड़ों बार शिकायत की, लेकिन अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई और औपचारिकता तक ही सीमित रहे।
मंगलवार को जब वह अपनी समस्या लेकर जनसुनवाई में पहुंचे तो उनका आरोप है कि अधिकारियों ने उनकी समस्या का समाधान करने के बजाय उन्हें एक टेबल से दूसरी टेबल तक भटकाया। इससे आक्रोशित होकर उन्होंने जनसुनवाई कक्ष में ही विरोध जताया और अधिकारियों पर धक्का देकर बाहर निकालने तथा प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।
इस दौरान उनके साथ मौजूद उनकी पत्नी ने भी प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही इस मामले में न्याय नहीं मिला तो वे अपने पूरे परिवार के साथ जहर का सेवन कर लेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और शासन की होगी।

घटना के बाद कलेक्ट्रेट परिसर में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए पुलिस मौके पर पहुंची और समझाइश देकर मामले को शांत कराया।
इस संबंध में नगर पुलिस अधीक्षक नेहा पच्चीसिया ने बताया कि कमोद प्रसाद विश्वकर्मा ने जनसुनवाई में शिकायत दी है कि उनके क्षेत्र में पहले शासकीय नाला था, जिस पर निर्माण कार्य कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि इस मामले की पहले भी जांच कराई गई थी, जिसमें भूमि को निजी भूमि बताया गया था। फिलहाल पटवारी सहित संबंधित पक्षों से दस्तावेज मंगाकर मामले की पुनः जांच की जा रही है और दस्तावेजों के आधार पर आगे वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

यह पूरा मामला एक बड़ा सवाल खड़ा करता है कि यदि कोई नागरिक चार वर्षों तक लगातार शिकायत करता रहे और फिर भी उसकी समस्या का समाधान न हो, तो आखिर सरकार की जनसुनवाई व्यवस्था का उद्देश्य क्या रह जाता है? जनहित और जनसरोकारों से जुड़ी समस्याओं के त्वरित समाधान का दावा करने वाली व्यवस्था अगर केवल औपचारिकता बनकर रह जाए, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहां जाए – यह सवाल अब सीधे सरकार और प्रशासन के सामने खड़ा है।

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