कार्रवाई से नाराज बदमाश खनिज कार्यालय पहुंचे, सर्वेयर को दी धमकी #video वॉयरल

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शहडोल । जिले में खनिज माफिया के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अवैध रेत परिवहन पर कार्रवाई से नाराज कुछ लोगों ने शनिवार शाम जिला खनिज कार्यालय पहुंचकर खनिज सर्वेयर को धमकाया। घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और अधिकारियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार, खनिज विभाग के सर्वेयर समय लाल गुप्ता ने बीते दिवस सिंहपुर क्षेत्र में अवैध खनिज परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की थी। इस दौरान वाहन क्रमांक एमपी 18 ZF 6617 को पकड़ा गया, जिसे राजेंद्र नामक चालक चला रहा था। बताया जा रहा है कि उक्त वाहन ऋषभ मिश्रा से जुड़ा हुआ है। वाहन में रेत भरी हुई थी, जिसका परिवहन बिना वैध अनुमति के किया जा रहा था।

सूत्रों के अनुसार, वाहन में लदी रेत छत्तीसगढ़ के मल्दा क्षेत्र से लाई जा रही थी। लंबे समय से यह आरोप सामने आते रहे हैं कि मल्दा क्षेत्र से फर्जी टीपी (ट्रांजिट पास) के माध्यम से रेत का अवैध उत्खनन और परिवहन किया जा रहा है। यही रेत जैतपुर, केशवाही, सीधी, बुढार सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंचाई जाती है और खुलेआम बेची जाती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि फर्जी टीपी के जरिए चल रहे इस खेल की जानकारी समय-समय पर प्रशासन तक पहुंचती रही है, लेकिन कार्रवाई ठंडी पड़ जाती है। आरोप यह भी हैं कि जब खनिज अधिकारियों द्वारा सख्ती दिखाई जाती है, तब विवाद शुरू हो जाता है या फिर किसी बड़े नेता का फोन आ जाता है, जिसके बाद मामला दबा दिया जाता है।

रविवार को खनिज विभाग द्वारा उक्त वाहन के जप्त होने और कार्रवाई किए जाने संबंधी प्रेस नोट भी जारी किया गया, जिसे जनसंपर्क विभाग ने प्रसारित किया। विभागीय दस्तावेजों में वाहन जप्ती की पुष्टि होने के बाद इस कार्रवाई को खनिज माफिया के खिलाफ महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा था।

इसी कार्रवाई से नाराज होकर शनिवार शाम कुछ लोग जिला खनिज कार्यालय पहुंच गए। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद खनिज सर्वेयर समय लाल गुप्ता से बहस की और कार्रवाई को गलत बताते हुए दबाव बनाने की कोशिश की। इतना ही नहीं, कार्यालय के अंदर मोबाइल से वीडियो भी बनाया गया। इस दौरान वहां मौजूद कर्मचारी खुद को असहाय महसूस करते रहे।

घटना की सूचना शहडोल कोतवाली पुलिस को दी गई, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। कुछ देर तक बहस और तनाव का माहौल बना रहा। बाद में जिला खनिज अधिकारी भी मौके पर पहुंचे।

गौरतलब है कि शहडोल जिला पहले भी खनिज माफिया की गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है। यहां अवैध खनन से जुड़े मामलों में पहले एएसआई और पटवारी की हत्या जैसी गंभीर घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद माफिया नेटवर्क पर प्रभावी अंकुश नहीं लग पाया है।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि खनिज विभाग के अधिकारी और सर्वेयर ही सरकारी कार्यालय में सुरक्षित नहीं हैं, तो अवैध उत्खनन पर कार्रवाई कैसे होगी? क्या प्रशासन माफिया पर सख्त कदम उठाएगा या फिर यह मामला भी दब जाएगा? फिलहाल पूरे जिले की नजरें पुलिस और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

 

 

 

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