जब जनसुनवाई में छलक पड़ा दर्द,अनाथ भाइयों की कहानी सुन भावुक हुए कलेक्टर, बढ़ाया सहारे का हाथ
शहडोल । कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई उस वक्त भावुक हो गई, जब दो अनाथ मासूम भाई अपनी जिंदगी का दर्द लेकर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह के सामने पहुंचे, माता-पिता को खो चुके इन बच्चों की बेबसी और संघर्ष की कहानी सुन वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो गईं, संवेदनशील कलेक्टर ने बच्चों की हालत देख तुरंत मदद का हाथ बढ़ाया।कलेक्टर की इस संवेदनशील पहल के बाद अब बच्चों को राशन, कपड़े, पढ़ाई और शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।जनसुनवाई में सामने आई यह तस्वीर प्रशासन के मानवीय चेहरे की मिसाल बन गई, जिसने दो मासूम भाइयों की जिंदगी में उम्मीद और सहारे की नई किरण जगा दी।
जनपद पंचायत गोहपारू के ग्राम बहेरहा से आए दो मासूम भाई सुखनंदन और देवनंदन अपनी टूटी उम्मीदों और संघर्ष भरी जिंदगी की कहानी लेकर जनसुनवाई में पहुंचे थे,
नन्हें कदमों से कलेक्ट्रेट पहुंचे दोनों बच्चों के चेहरे पर मासूमियत के साथ बेबसी साफ दिखाई दे रही थी,जब कलेक्टर डॉ. केदार सिंह ने उन्हें पास बुलाकर उनकी परेशानी पूछी, तो बच्चों की आंखें छलक पड़ीं,उन्होंने बताया कि उनके माता-पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। दोनों भाइयों की परवरिश उनकी बड़ी मां कर रही हैं, जो खुद नेत्रहीन और पैर से दिव्यांग हैं। घर की हालत ऐसी है कि कभी भरपेट भोजन मिलता है तो कभी बिना खाए ही रात गुजर जाती है। तन ढंकने के लिए कपड़े तक नहीं हैं और पढ़ाई अब सपना बन चुकी है।
मासूमों की यह मार्मिक दास्तां सुनकर कलेक्टर डॉ. केदार सिंह भी भावुक हो उठे,उन्होंने तुरंत बच्चों को नए कपड़े उपलब्ध कराए और अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिवार की खाद्यान्न पर्ची तत्काल बनाई जाए,साथ ही दोनों बच्चों की पढ़ाई, राशन और शासन की सभी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता से दिलाने के निर्देश दिए।
जनसुनवाई में सामने आई यह तस्वीर सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि संवेदनशीलता और इंसानियत की मिसाल बन गई, कलेक्टर की इस पहल ने दो अनाथ भाइयों के जीवन में उम्मीद की नई रोशनी जगा दी।