गोहपारू कॉलेज में ‘भर्ती से बिल तक’ घोटालों के आरोप, अभाविप ने सौंपा 14 सूत्रीय ज्ञापन

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7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन की चेतावनी; सड़क, फर्जी भर्ती, अवैध वसूली और वित्तीय अनियमितताओं पर उठाए सवाल
शहडोल। जिले के शासकीय महाविद्यालय गोहपारू में कथित अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने मोर्चा खोल दिया है। परिषद कार्यकर्ताओं और छात्र-छात्राओं ने सोमवार को प्राचार्य को 14 सूत्रीय ज्ञापन सौंपकर कॉलेज प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। विद्यार्थियों ने चेतावनी दी है कि यदि 7 दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र आंदोलन किया जाएगा।
ज्ञापन में कॉलेज तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क नहीं होने, विषयवार प्राध्यापकों की कमी, जनभागीदारी राशि के उपयोग में पारदर्शिता नहीं होने, आउटसोर्स भर्ती में गड़बड़ी, फर्जी उपस्थिति और वित्तीय अनियमितताओं जैसे कई गंभीर मुद्दे उठाए गए हैं।
भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल
विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि कॉलेज में आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती बिना विज्ञापन और बिना आवेदन प्रक्रिया के की गई। परिषद का कहना है कि जिन लोगों का चयन करना था, केवल उन्हीं के आवेदन लिए गए। इतना ही नहीं, कुछ कर्मचारियों की शैक्षणिक योग्यता और पात्रता की भी जांच नहीं की गई।
ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि भौतिक शास्त्र प्रयोगशाला तकनीशियन के पद पर ऐसे व्यक्ति की नियुक्ति कर दी गई जो संबंधित विषय से स्नातक तक नहीं है। वहीं कंप्यूटर ऑपरेटर पद पर नियुक्त कर्मचारी के पास सीपीसीटी योग्यता नहीं होने का भी दावा किया गया है। परिषद ने पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त कर दोबारा पारदर्शी भर्ती कराने की मांग की है।
विद्यार्थियों से अवैध वसूली का आरोप
परिषद ने एक आउटसोर्स कर्मचारी पर रिजल्ट सुधारने के नाम पर छात्रों से 2500 रुपए तक वसूली करने का आरोप लगाया है। ज्ञापन में मांग की गई है कि छात्रों से ली गई राशि वापस कर संबंधित कर्मचारी पर सख्त कार्रवाई की जाए।
प्रैक्टिकल नंबर और फर्जी उपस्थिति पर भी सवाल
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय को भेजे गए प्रैक्टिकल और सेशनल अंकों में बिना विषय प्राध्यापकों की अनुमति मनमाने तरीके से अंक भर दिए गए। इसे विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ बताया गया है।
इसके अलावा अतिथि विद्वानों और कर्मचारियों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर मानदेय भुगतान करने का भी आरोप लगाया गया है। परिषद ने 3 से 4 माह की दिवसवार उपस्थिति जांच कराने की मांग की है।
जेम पोर्टल खरीदी और ओडी में गड़बड़ी का आरोप
ज्ञापन में पूर्व प्राचार्य के कार्यकाल में जेम पोर्टल से हुई खरीदी पर भी सवाल उठाए गए हैं। परिषद ने आरोप लगाया कि सहायक प्राध्यापक के नाम से फर्जी शासकीय ईमेल आईडी बनाकर खरीदी की गई। डिजिटल एडवर्टाइजिंग बोर्ड की उपयोगिता और भुगतान की भी जांच की मांग की गई है।
साथ ही, कुछ प्राध्यापकों और अतिथि विद्वानों को बार-बार ऑन ड्यूटी दिए जाने को वित्तीय अनियमितता बताते हुए 2023 से 2026 तक के रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग उठाई गई।
छात्राओं की सुविधाओं का मुद्दा भी उठा
ज्ञापन में कॉलेज में छात्राओं के लिए गर्ल्स कॉमन रूम, सैनिटरी वेंडिंग मशीन और सैनिटरी डिस्ट्रॉय मशीन नहीं होने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। परिषद ने इसे छात्राओं की गरिमा और सुविधा से जुड़ा विषय बताते हुए तत्काल व्यवस्था की मांग की।
ज्ञापन सौंपने के दौरान विभाग संयोजक अखिलेश सिंह, जिला संयोजक अमन त्रिपाठी, आकाश मिश्रा, अंबुज सेन, अर्पित शर्मा, करण यादव, रिया, साधना समेत बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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