तड़के 3 बजे बाघ का हमला:महिला की मौत,परिवार के 3 लोग अस्पताल में भर्ती

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(कमलेश यादव)
उमरिया।बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के पनपथा परिक्षेत्र अंतर्गत खेरवा मोहल्ला में रविवार तड़के करीब 3 बजे बाघ के हमले से सनसनी फैल गई। बाघ आबादी क्षेत्र में घुसकर एक घर के भीतर पहुंच गया और सो रही महिला पर हमला कर उसकी जान ले ली। महिला को बचाने पहुंचे पति, पिता और ससुर भी बाघ के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत और आक्रोश का माहौल है।
मृतिका की पहचान फूल बाई पति पहलू पाल  निवासी खेरवा मोहल्ला के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक परिवार रात में घर के भीतर सो रहा था। इसी दौरान तड़के करीब 3 बजे अचानक बाघ घर में घुस आया और फूल बाई पर हमला कर दिया। महिला की चीख सुनकर पति पहलू पाल, पिता और ससुर दशई पाल उसे बचाने पहुंचे, लेकिन बाघ ने उन पर भी हमला कर दिया।
हमले में घायल तीनों लोगों को गंभीर हालत में मानपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका उपचार जारी है। घटना के बाद परिवार और मोहल्ले में अफरा-तफरी मच गई। बताया जा रहा है कि घटना के काफी देर बाद तक बाघ घर के आसपास ही मौजूद रहा, जिससे लोगों में दहशत बनी रही।
सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई। एहतियात के तौर पर इलाके में पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि भीड़ को नियंत्रित किया जा सके। वन अमला बाघ को आबादी क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश में जुटा रहा।
घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने वन विभाग के खिलाफ नाराजगी जताई। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लगातार वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ रही है, लेकिन सुरक्षा और निगरानी के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए जा रहे। सूत्रों के अनुसार हंगामे के दौरान वन परिक्षेत्राधिकारी के साथ भी धक्का-मुक्की और मारपीट की स्थिति बनी, जिसमें उनके सिर पर चोट आने की बात सामने आई है। हालांकि अधिकारियों की ओर से इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि मृतिका के पिता कुछ दिन पहले ही पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने बेटी के घर आए थे, लेकिन यह यात्रा हादसे में बदल गई। घटना के बाद पूरे खेरवा मोहल्ला में मातम पसरा हुआ है।
बांधवगढ़ क्षेत्र में लगातार बढ़ रही बाघों की गतिविधियों के बीच यह घटना कई सवाल खड़े कर रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और सुरक्षा के ठोस इंतजाम किए जाते, तो शायद यह दर्दनाक हादसा टाला जा सकता था। फिलहाल वन विभाग के सामने एक ओर बाघ को सुरक्षित रेस्क्यू करने की चुनौती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों के आक्रोश को शांत करना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गया है।

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