खुली खदानें बन रहीं मौत का कुंआ, मासूम की मौत ने खोली प्रशासनिक लापरवाही की पोल बिस्तरा खदान हादसे से दहला क्षेत्र, सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल
खुली खदानें बन रहीं मौत का कुंआ, मासूम की मौत ने खोली प्रशासनिक लापरवाही की पोल
बिस्तरा खदान हादसे से दहला क्षेत्र, सुरक्षा इंतजामों पर उठे गंभीर सवाल
कटनी।। ग्राम पंचायत बिस्तरा स्थित खुली खदान में एक मासूम बालक की दर्दनाक मौत ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। गहरे पानी से भरी असुरक्षित खदान में गिरने से सुजीत कोल के मासूम पुत्र की मौत हो गई। यह हादसा केवल एक परिवार का दुःख नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही और खदान सुरक्षा व्यवस्था की बड़ी विफलता बनकर सामने आया है। घटना की जानकारी मिलते ही जिला पंचायत उपाध्यक्ष अशोक विश्वकर्मा तत्काल मौके पर पहुंचे और एसडीआरएफ टीम सहित प्रशासनिक अधिकारियों से समन्वय स्थापित कर रेस्क्यू अभियान शुरू कराया। कई घंटों तक चले कठिन ऑपरेशन के बाद बालक का शव बाहर निकाला जा सका। पूरे घटनाक्रम के दौरान अशोक विश्वकर्मा लगातार घटनास्थल पर मौजूद रहे और पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाते हुए हर संभव सहायता का भरोसा दिलाया। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर जिले में मौजूद दर्जनों खुली खदानें कब तक मासूमों की जान लेती रहेंगी। क्षेत्र के ग्रामीणों का कहना है कि कई खदानें वर्षों से बिना सुरक्षा घेराबंदी, चेतावनी बोर्ड और निगरानी के खुली पड़ी हैं। बरसात के दिनों में इनमें पानी भर जाने से यह खदानें मौत के गहरे तालाब में बदल जाती हैं, जहां जरा सी चूक किसी की भी जिंदगी छीन सकती है।
घटना के बाद अशोक विश्वकर्मा ने प्रशासन से सभी खुली खदानों के चारों ओर तत्काल तार फेंसिंग, बैरिकेडिंग और चेतावनी संकेत लगाने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि समय रहते सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए तो भविष्य में और भी बड़े हादसे हो सकते हैं। उन्होंने संबंधित विभागों को क्षेत्र की सभी खुली खदानों का सर्वे कर सुरक्षा कार्य शीघ्र पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि खनन कार्य समाप्त होने के बाद खदानों को सुरक्षित बंद करने के नियमों का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा। ग्रामीणों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि जिले की सभी परित्यक्त एवं खुली खदानों की सूची सार्वजनिक कर तत्काल सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बिस्तरा की यह दर्दनाक घटना शासन और प्रशासन के लिए चेतावनी है। यदि अब भी जिम्मेदार विभाग नहीं जागे, तो आने वाले समय में ऐसी खदानें कई और परिवारों की खुशियां निगल सकती हैं।