पुराने कार्यकाल के भ्रष्टाचार पर लीपापोती या विकास? अधूरी नाली खुदाई से ग्रामीण का घर संकट में, पीड़ित महिला पहुंची एसडीएम के पास
*खोंगसरा (कोटा)*
ग्राम पंचायत आमागोहन में पूर्व कार्यकाल के कथित भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की परतें एक बार फिर खुलती नजर आ रही हैं। इस बार मामला वार्ड क्रमांक 3 का है, जहां एक पीड़ित महिला ने सरपंच हेमसिंह एवं सचिव राजेश उइके के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा को लिखित शिकायत सौंपकर न्याय की मांग की है।
शिकायतकर्ता श्रीमती मुन्नी बाई सिरसों के अनुसार, उनके घर के सामने जेसीबी मशीन से नाली निर्माण के नाम पर खुदाई कर दी गई, लेकिन लगभग एक माह बीत जाने के बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं किया गया। बरसात के कारण अधूरे गड्ढे में पानी भर रहा है, जिससे पानी सीधे उनके घर और खेत की ओर जा रहा है। घर की दीवारों में दरारें आने लगी हैं और मकान गिरने का खतरा पैदा हो गया है। साथ ही छोटे बच्चों और आसपास के लोगों के लिए भी दुर्घटना की आशंका बनी हुई है।
महिला का आरोप है कि उन्होंने कई बार पंचायत से निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। उल्टा विरोध करने पर उन्हें धमकाया गया और अभद्र व्यवहार किया गया। अब मजबूर होकर उन्होंने एसडीएम कार्यालय पहुंचकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और अधूरे निर्माण को तत्काल पूरा कराने की मांग की है।
*भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद शुरू हुआ काम, फिर छोड़ दिया अधूरा*
ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत आमागोहन में पूर्व कार्यकाल के दौरान नाली और सड़क निर्माण सहित कई विकास कार्यों में लाखों रुपये के भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता सामने आई थी। इसकी शिकायत सुशासन दिवस, मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनपद पंचायत और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों से की गई थी। शिकायतों के बाद जांच भी हुई, जिसमें कई अनियमितताएं सामने आने की बात ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद कार्रवाई का दबाव बढ़ा तो आनन-फानन में वार्ड क्रमांक 3 में जेसीबी मशीन से नाली के लिए खुदाई कर दी गई, लेकिन बिना किसी तकनीकी अनुमति, उचित योजना और प्रभावित परिवार की सहमति के कार्य शुरू किया गया। इसके बाद लगभग एक महीने तक निर्माण कार्य बंद पड़ा रहा और गड्ढा उसी स्थिति में छोड़ दिया गया। अब लगातार बारिश से हालात और गंभीर हो गए हैं।
*जांच पूरी, फिर भी कार्रवाई नहीं*
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं की शिकायत सीईओ जनपद पंचायत कोटा, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कोटा तथा जिला पंचायत के अधिकारियों तक पहुंच चुकी है। जानकारी के अनुसार, अलग-अलग स्तर पर 4 से 5 जांच दल भी जांच पूरी कर चुके हैं। इसके बावजूद अब तक संबंधित सचिव के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने सुशासन दिवस से लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन तक हर उपलब्ध माध्यम का उपयोग किया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर केवल जांच होती रही। इससे ग्रामीणों में प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है।
*ग्रामीणों के सवाल??*
लगातार भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगने, कई शिकायतें दर्ज होने और जांच पूरी होने के बावजूद यदि संबंधित सचिव पर कोई कार्रवाई नहीं होती है, तो कई सवाल खड़े होते हैं। आखिर प्रशासन मौन क्यों है? क्या जांच रिपोर्टों पर अमल होगा या मामले को फिर ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा? यदि शिकायतें सही पाई गई हैं तो दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?
अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि पीड़ित परिवार को राहत दिलाने के साथ-साथ ग्राम पंचायत में हुए कथित भ्रष्टाचार और अधूरे विकास कार्यों पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कब और क्या कार्रवाई की जाती है।