ज्योति को मिलेगा इंसाफ गौरेला पुलिस ने डीडी अस्पताल के अखिलेश तिवारी और एंबुलेंस ड्राइवर पर एफआईआर दर्ज कर शुरू की गहन विवेचना
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही।
मानवता को शर्मसार करने वाले एक बेहद गंभीर मामले में पीड़ित ज्योति सोनवानी का परिवार आज न्याय के लिए दर-दर भटक रहा है। हमारे अखबार ने इस खबर को पहले भी प्रमुखता से उठाया था। डीडी (D.D.) हॉस्पिटल सेमरा और एक निजी एंबुलेंस चालक की कथित सांठगांठ, पैसों की हवस और घोर लापरवाही के कारण ज्योति और उसके नवजात शिशु की दुखद मृत्यु हो गई है।
साजिश और डराकर निजी अस्पताल लाने का आरोप
परिजनों के मुताबिक, 11 जून 2026 को ज्योति को प्रसव पीड़ा होने पर जिला अस्पताल गौरेला से बिलासपुर सिम्स (CIMS) रेफर किया गया था। सरकारी एंबुलेंस न मिलने पर वे निजी एंबुलेंस (क्रमांक CG04QX1885) से रवाना हुए। आरोप है कि एंबुलेंस स्टाफ ने रास्ते के खराब होने का डर दिखाकर और परिजनों को धमकाकर, साजिश के तहत गाड़ी को वापस मोड़ दिया और मरीज को डीडी हॉस्पिटल सेमरा ले आए।
मोटे खर्च की वसूली और अधूरे इलाज का खेल
डीडी हॉस्पिटल पहुंचते ही संचालक अखिलेश तिवारी ने मरीज की हालत नाजुक बताकर ₹2 लाख के खर्च की बात कही। डरे हुए परिजनों ने मौके पर ₹50,000 नगद जमा किए। आरोप है कि अस्पताल में कोई विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं था और अप्रशिक्षित स्टाफ द्वारा ही ऑपरेशन किया गया। स्थिति बिगड़ने पर अस्पताल प्रबंधन ने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए मरीज को फिर बिलासपुर सिम्स (CIMS) रेफर कर दिया। इस पूरी लेत-लतीफी के कारण ज्योति और उसके नवजात की जान चली गई।
बड़ी अपडेट: एफआईआर दर्ज, पुलिस की गहन विवेचना जारी
मामले की गंभीरता को देखते हुए गौरेला पुलिस ने डीडी अस्पताल के संचालक अखिलेश तिवारी और एंबुलेंस ड्राइवर के खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कर ली है। पुलिस द्वारा मामले की गहन विवेचना की जा रही है।
इनका कहना है –
हमने जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र लिखकर मेडिकल त्रुटियों की जानकारी चाही है जिससे उक्त प्रकरण में कोई कोर कसर बाकी न रहे,जांच अधिकारी अस्पताल के रिकॉर्ड और एंबुलेंस चालक के बयानों को खंगाल रहे हैं ताकि दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।
शनिप रात्रे – थाना प्रभारी गौरेला
तीखे सवाल और हमारा संकल्प
दलाली के नेटवर्क पर लगाम कब?:
क्या एंबुलेंस चालक सीधे निजी अस्पतालों के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं?
नर्सिंग होम एक्ट के तहत कार्रवाई कब?: ‘छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह तथा रोगोपचार संबंध स्थापनाये अनुज्ञापन अधिनियम, 2010′ के तहत इस अस्पताल का लाइसेंस रद्द कर संचालक को जेल कब भेजा जाएगा?
हमारी टीम पुलिस की इस गहन विवेचना की पल-पल की अपडेट पर नजर बनाए हुए है। जब तक पीड़ित परिवार को पूरा इंसाफ नहीं मिल जाता, हमारी यह जंग जारी रहेगी।
जगह नाम बदला लेकिन किरदार नहीं बदला
सूत्रों के अनुसार नगर गौरेला में सन् 2021-22 के आसपास ओमकार शोभा अस्पताल के नाम से संचालित एक अस्पताल था उस अस्पताल की देखरेख का कार्यभार यह अखिलेश तिवारी ही सम्हालता था।उस समय भी उस अस्पताल में इसी प्रकार की लूट खसोट की खबरें आम थीं, तत्कालीन समय में किसी प्रसूता महिला के इलाज में लापरवाही बरतने के कारण मृत्यु हुई थी जिस कारण से नर्सिंग होम एक्ट के तहत इस ओमकार शोभा अस्पताल की मान्यता रद्द कर दी गई थी।
वर्तमान में भी डी डी अस्पताल में तथाकथित संचालक अखिलेश तिवारी आरोपों में घिरा है वही पुराना आरोप अनाप-शनाप पैसा लेकर इलाज करना, अप्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ से इलाज करवाना और लापरवाही बरतते हुए मरीज की मृत्यु हो जाना। सूत्रों के हवाले से गौरेला पेंड्रा नगर में चर्चा यह आम है कि अखिलेश तिवारी अपने आप को रसूखदार बताते हुए आज भी दो दो मौत होने के बाद भी अस्पताल धड़ल्ले से संचालित कर रहा है, सूत्र बताते हैं कि अखिलेश तिवारी की पहुंच पकड़ बहुत ऊपर तक है जिसका फायदा वो अपने आप को बचाने में लगाएगा स्वास्थ्य विभाग को भी इसने अपने मोहपाश में बांध रखा है।जिस कारण से इसके हौसले बुलंद हैं।
अब देखना यह है कि डी डी अस्पताल पर लाइसेंस रद्द होने की कार्रवाई, अखिलेश तिवारी एवं एंबुलेंस ड्राइवर की गिरफ्तारी कब तक होगी और इन पर दंडात्मक कार्यवाही किस प्रकार होती है। हालांकि इन सभी मामलों में हाल ए हलचल समाचार न्यूज नेटवर्क अपनी पैनी नजर बनाए हुए हैं ताकि ज्योति को इंसाफ मिले और दोषियों को कड़ी सजा मिल सके।