जब कलेक्टर बच्चों के बीच रुके….कुछ मिनटों की मुलाकात बन गई प्रेरणा की मिसाल,संवेदनशील पहल ने जीता दिल,शिवराज को स्कूल भेजने का दिलाया संकल्प खदान निरीक्षण से लौटते समय बच्चों के बीच रुके कलेक्टर आशीष तिवारी, पहाड़ा और एबीसीडी सुनकर बढ़ाया हौसला, नन्हे शिवराज को स्कूल भेजने के लिए परिवार को किया प्रेरित
जब कलेक्टर बच्चों के बीच रुके….कुछ मिनटों की मुलाकात बन गई प्रेरणा की मिसाल,संवेदनशील पहल ने जीता दिल,शिवराज को स्कूल भेजने का दिलाया संकल्प
खदान निरीक्षण से लौटते समय बच्चों के बीच रुके कलेक्टर आशीष तिवारी, पहाड़ा और एबीसीडी सुनकर बढ़ाया हौसला, नन्हे शिवराज को स्कूल भेजने के लिए परिवार को किया प्रेरित
कटनी।। प्रशासनिक जिम्मेदारियों की व्यस्तता के बीच जब एक कलेक्टर सड़क किनारे चलते बच्चों के बीच रुककर उनसे पढ़ाई की बातें करने लगे, तो वह पल केवल औपचारिक मुलाकात नहीं रहा, बल्कि शिक्षा, संवेदनशीलता और मानवीय सरोकार का एक प्रेरक उदाहरण बन गया।
स्लीमनाबाद क्षेत्र के ग्राम निमास स्थित मार्बल खदान का निरीक्षण कर लौट रहे कलेक्टर आशीष तिवारी की नजर छोटे कछारगांव में स्कूल से घर लौट रहे बच्चों पर पड़ी। उन्होंने अपना वाहन रुकवाया और बच्चों से आत्मीयता के साथ बातचीत शुरू की। कुछ ही क्षणों में सड़क किनारा एक छोटी-सी “पाठशाला” में बदल गया, जहां बच्चों के चेहरे पर उत्साह और सीखने की ललक साफ दिखाई दे रही थी।
कलेक्टर ने बच्चों से पढ़ाई, स्कूल और उनके सपनों के बारे में पूछा। सातवीं कक्षा की छात्रा महिमा ठाकुर ने पूरे आत्मविश्वास के साथ पहाड़े सुनाए और गणित के सवालों के सही जवाब देकर सभी को प्रभावित किया। वहीं दूसरी कक्षा के छात्र प्रिंस ठाकुर ने पूरी एबीसीडी सुनाकर कलेक्टर की सराहना हासिल की। दोनों बच्चों को कलेक्टर ने पेन और कॉपी भेंट कर उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान नन्हे शिवराज की मासूमियत ने सभी का दिल जीत लिया। जब पता चला कि उसका अभी तक स्कूल में प्रवेश नहीं हुआ है, तो कलेक्टर ने उसकी बहन को समझाते हुए शिवराज का नाम जल्द से जल्द स्कूल में दर्ज कराने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने बताया कि स्कूल में प्रवेश मिलने पर उसे निःशुल्क ड्रेस, पाठ्यपुस्तकें, मध्यान्ह भोजन और शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ मिलेगा, जो उसके भविष्य को नई दिशा देगा।
ग्रामीणों के लिए यह दृश्य केवल एक प्रशासनिक अधिकारी का दौरा नहीं, बल्कि यह संदेश था कि जब प्रशासन शिक्षा को प्राथमिकता देता है, तब बच्चों के सपनों को नई उड़ान मिलती है। सड़क किनारे कुछ मिनटों की यह मुलाकात बच्चों के मन में लंबे समय तक प्रेरणा बनकर रहेगी और शिक्षा के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगी।