मां नर्मदा की पावन नगरी में स्वास्थ्य सेवा का पर्याय रहे गब्बर सिंह सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त
गिरीश राठौड़
39 वर्षों तक आदिवासी अंचल, श्रद्धालुओं और जरूरतमंदों की निस्वार्थ सेवा कर रचा मानवीय समर्पण का स्वर्णिम इतिहास
अमरकंटक/ जीवन में कुछ लोग पद से नहीं, बल्कि अपने कर्मों से पहचाने जाते हैं। वे अपनी सादगी, ईमानदारी और सेवा-भाव से ऐसी अमिट छाप छोड़ जाते हैं, जो वर्षों तक लोगों की स्मृतियों में जीवित रहती है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक के कर्मयोगी गब्बर सिंह ऐसे ही व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने लगभग 39 वर्ष 1 माह तक निरंतर जनसेवा का दीप जलाए रखा। शुक्रवार, 31 जुलाई 2026 को शासकीय सेवा से उनके सेवानिवृत्त होने के अवसर पर आयोजित विदाई समारोह केवल एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक ऐसे सेवाभावी कर्मचारी के प्रति कृतज्ञ समाज का भावपूर्ण सम्मान था, जिसने अपने जीवन का श्रेष्ठतम समय मानव सेवा को समर्पित कर दिया।
गब्बर सिंह ने 4 जून 1987 को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र अमरकंटक से अपनी सेवा यात्रा प्रारंभ की थी। उस समय स्वास्थ्य सुविधाएं सीमित थीं, संसाधन कम थे और आदिवासी अंचल तक चिकित्सा सेवाएं पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं था। लेकिन उन्होंने हर चुनौती को अपने कर्तव्य का हिस्सा माना। दिन हो या रात, बरसात हो या कड़ाके की ठंड, अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज के प्रति उनका व्यवहार समान रूप से संवेदनशील और आत्मीय रहा।
मां नर्मदा की उद्गम स्थली अमरकंटक देश-विदेश के लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। यहां आने वाले तीर्थयात्रियों, पर्यटकों और स्थानीय आदिवासी परिवारों के लिए गब्बर सिंह वर्षों तक भरोसे का नाम बने रहे। उन्होंने कभी सेवा को नौकरी नहीं माना, बल्कि मानवता का दायित्व समझकर निभाया। यही कारण है कि वे केवल विभाग के कर्मचारी नहीं, बल्कि क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की एक सशक्त पहचान बन गए।
विदाई समारोह में वातावरण उस समय भावुक हो उठा, जब सहकर्मियों ने उनके साथ बिताए वर्षों की स्मृतियां साझा कीं। डॉ. रानू प्रताप सारीवान ने कहा कि गब्बर सिंह ने अपने पूरे सेवाकाल में ईमानदारी, अनुशासन, सादगी और समर्पण की ऐसी मिसाल प्रस्तुत की है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्था की वास्तविक शक्ति उसके ऐसे कर्मठ कर्मचारी होते हैं, जो बिना किसी अपेक्षा के अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं।
सहकर्मियों ने कहा कि गब्बर सिंह ने कभी किसी मरीज को निराश नहीं लौटाया। उनका सहज व्यवहार, सहयोगी स्वभाव और सेवा के प्रति समर्पण उन्हें सभी का प्रिय बनाता था। अस्पताल परिसर में जब उन्हें पुष्पमालाएं पहनाकर, शॉल एवं स्मृति-चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया, तो कई सहकर्मियों की आंखें नम हो गईं। तालियों की गूंज के बीच उन्हें सम्मानपूर्वक विदाई दी गई और सभी ने उनके स्वस्थ, सुखी, दीर्घायु एवं मंगलमय जीवन की कामना की।
यह विदाई केवल एक कर्मचारी की सेवानिवृत्ति नहीं थी, बल्कि उस सेवा-संस्कृति को नमन था, जो बिना किसी प्रचार और अपेक्षा के वर्षों तक समाज की निस्वार्थ सेवा करती रही। गब्बर सिंह की कर्मनिष्ठा, विनम्रता और मानवीय संवेदनाएं आने वाले वर्षों तक स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।
समारोह में डॉ. रानू प्रताप सारीवान, डॉ. शशांक परस्ते, भगत सिंह, श्रीमती कृष्णा देवी परस्ते, श्रीमती अनीता सिंगराम, श्रीमती अंजलि शर्मा, श्रीमती सुष्मिता दिनकर, श्रीमती मेघा जोशी, अवधेश प्रताप सिंह, श्रीमती भारती बैगा, श्रीमती विनीता राजोरिया, श्रीमती संतोषी धुर्वे, राजकुमार अहिरवार, अमित कुमार बघेल, चेतन सिंह, महेश्वर विश्वकर्मा, दिलीप सिंह बघेल सहित स्वास्थ्य विभाग के अनेक अधिकारी-कर्मचारी तथा आशा कार्यकर्ता श्रीमती ज्योति राठौर, श्रीमती पूनम पिटानिया, श्रीमती शकुन मोगरे एवं श्रीमती शिवकुमारी पारस उपस्थित रहीं।