भक्ति के महासागर में डूबा अमरकंटक, रिमझिम फुहारों के बीच गूंजा गुरु महिमा का अमृत संदेश
गिरीश राठौड़
भक्ति के महासागर में डूबा अमरकंटक, रिमझिम फुहारों के बीच गूंजा गुरु महिमा का अमृत संदेश
मां नर्मदा की पावन उद्गम स्थली अमरकंटक में गुरु पूर्णिमा का पर्व श्रद्धा, आस्था और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। रिमझिम वर्षा के बीच हजारों श्रद्धालु, संत-महात्मा एवं शिष्य विभिन्न आश्रमों में पहुंचकर अपने गुरुदेव के श्रीचरणों में नतमस्तक हुए। दिनभर चले गुरु पूजन, भजन-कीर्तन, सत्संग, कथा एवं विशाल भंडारों ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
अमरकंटक। भारतीय संस्कृति में गुरु को साक्षात परमात्मा का स्वरूप माना गया है। गुरु ही वह दिव्य प्रकाश हैं, जो अज्ञान रूपी अंधकार को दूर कर जीवन को सत्य, ज्ञान और आत्मबोध की दिशा प्रदान करते हैं। इसी सनातन गुरु-शिष्य परंपरा का दिव्य स्वरूप गुरु पूर्णिमा के अवसर पर पवित्र नगरी अमरकंटक में देखने को मिला, जहां श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम उमड़ पड़ा।
नगर के आश्रमों, मंदिरों एवं तपोभूमियों में प्रातःकाल से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने लगी। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद, घंटियों की मधुर ध्वनि और भजन-कीर्तन से संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो उठा। दूर-दराज़ से पहुंचे श्रद्धालुओं ने अपने गुरुदेव के श्रीचरणों में पुष्प अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया तथा धर्म, सेवा, संयम और मानव कल्याण के मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
श्री कल्याण सेवा आश्रम में परम तपस्वी वीतराग बाबा कल्याण दास जी महाराज के सान्निध्य में गुरु पूजन अत्यंत श्रद्धापूर्वक संपन्न हुआ। संतों, ब्राह्मणों, शिष्यों एवं भक्तों ने वैदिक विधि-विधान से गुरुदेव का पूजन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके पश्चात आयोजित विशाल नगर भंडारे में संत-महात्माओं, ब्राह्मणों, श्रद्धालुओं तथा कल्याणिका केंद्रीय शिक्षा निकेतन विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने प्रसाद ग्रहण किया।
शांति कुटी आश्रम में स्वामी रामभूषण दास जी के मार्गदर्शन में सप्ताहभर चली श्रीमद्भागवत कथा एवं सुंदरकांड पाठ का समापन गुरु पूर्णिमा के दिन हुआ। गुरु चरण पादुका पूजन के बाद शिष्यों ने गुरुदेव का पूजन कर आशीर्वाद लिया। नगर भंडारे में कन्याओं, संतों, ब्राह्मणों, भक्तों, जवाहर नवोदय विद्यालय, सरस्वती शिशु मंदिर के छात्र-छात्राओं तथा आचार्यगण ने श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण किया।
मार्कण्डेय आश्रम में आचार्य स्वामी श्रीरामकृष्णानंद जी महाराज, गीता स्वाध्याय मंदिर में महंत स्वामी नर्मदानंद गिरी जी महाराज, श्रीपरमहंस धारकुंडी आश्रम में स्वामी लवलीन महाराज, ज्वालेश्वर धाम, कामदगिरि आश्रम सहित अनेक आश्रमों एवं मंदिरों में गुरु पूजन, सत्संग एवं आशीर्वचन के कार्यक्रम संपन्न हुए। संतों ने अपने उद्बोधन में कहा कि गुरु केवल ज्ञान देने वाले नहीं, बल्कि जीवन को संस्कारित कर समाज और राष्ट्र निर्माण की प्रेरणा देने वाले दिव्य पुरुष होते हैं।
गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान अमरकंटक की आध्यात्मिक गरिमा अपने चरम पर दिखाई दी। मां नर्मदा के उद्गम क्षेत्र में बरसती रिमझिम फुहारें मानो श्रद्धालुओं की आस्था पर प्रकृति का आशीर्वाद बनकर बरस रही थीं। वर्षा की बूंदें भी गुरु-शिष्य के पावन मिलन में बाधा नहीं बन सकीं। दिनभर गूंजते “गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः” के मंत्र, भक्ति गीत और जयघोषों ने अमरकंटक को आध्यात्मिक चेतना से अनुप्राणित कर दिया। श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति की गौरवशाली गुरु परंपरा का यह अनुपम उत्सव उपस्थित प्रत्येक श्रद्धालु के हृदय में अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभूति छोड़ गया।