हर दूसरे दिन बाधा खड़ी कर रहे बिचौलिए, काम को कर रहे प्रभावित
जय अम्बे कंपनी का काम रोकने ग्रामीणों का घेराव, चार घंटे प्रभावित रही कार्यप्रक्रिया; प्रबंधन ने स्थानीय युवाओं को नियमानुसार अवसर देने की बात कही
रामपुर बटुरा। एसईसीएल के रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट में ओबी एवं अन्य कार्यों में लगी जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के कामकाज में बार-बार हस्तक्षेप और दबाव बनाए जाने का मामला सामने आया है। रविवार को एक बार फिर ग्रामीणों के नाम पर कंपनी परिसर का घेराव किए जाने से करीब चार घंटे तक कार्य प्रभावित रहा। कंपनी प्रबंधन का कहना है कि रोजगार एवं भर्ती प्रक्रिया को लेकर कुछ लोगों द्वारा लगातार दबाव बनाया जा रहा है, जबकि कंपनी अपनी निर्धारित प्रक्रिया और आवश्यकता के अनुसार ही भर्ती करती है।
रविवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं बेरोजगार युवा कंपनी परिसर पहुंचे और भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दिए जाने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कंपनी का काम करीब चार घंटे तक प्रभावित रहा। कंपनी प्रबंधन एवं एसईसीएल अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से बातचीत की और उनकी समस्याएं सुनीं।
रोजगार के नाम पर बार-बार बनाया जा रहा दबाव
कंपनी से जुड़े सूत्रों के अनुसार रामपुर बटुरा परियोजना में काम शुरू होने के बाद से रोजगार को लेकर अलग-अलग स्तर पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके नाम पर कार्यस्थल पर पहुंचकर काम रुकवाना अथवा कंपनी की कार्यप्रणाली में हस्तक्षेप करना परियोजना की कार्य गति को प्रभावित करता है।
कंपनी प्रबंधन का पक्ष है कि भर्ती किसी व्यक्ति की सिफारिश अथवा दबाव के आधार पर नहीं, बल्कि कार्य की आवश्यकता, पात्रता और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार की जाती है। कंपनी को जिन लोगों की आवश्यकता होती है, उन्हें संपर्क कर बुलाया जाता है। प्रबंधन के अनुसार पूर्व में भी कुछ अभ्यर्थियों को फोन कर मौके पर बुलाया गया था, लेकिन वे निर्धारित समय पर उपस्थित नहीं हुए।
प्रबंधन ने स्पष्ट किया—भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता
रविवार को हुई चर्चा के दौरान ग्रामीणों की ओर से स्थानीय युवाओं को रोजगार में अवसर देने की बात प्रमुखता से रखी गई। इस पर कंपनी की ओर से स्पष्ट किया गया कि पात्र स्थानीय युवाओं को नियमानुसार रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने में कंपनी को कोई आपत्ति नहीं है। हालांकि भर्ती प्रक्रिया को किसी बाहरी दबाव, सिफारिश या भीड़ के माध्यम से प्रभावित नहीं किया जा सकता।
कंपनी प्रतिनिधि रजनीश मिश्रा ने ग्रामीणों को भर्ती से संबंधित स्थिति की जानकारी दी। कंपनी की ओर से आलोक त्रिपाठी सहित अन्य प्रतिनिधि भी चर्चा में मौजूद रहे। एसईसीएल की ओर से मैनेजर अर्जुन जोड़े ने भी मौके पर उपस्थित रहकर ग्रामीणों एवं कंपनी प्रबंधन के बीच बातचीत में समन्वय किया।
चार घंटे तक काम प्रभावित, फिर शुरू हुआ संचालन
ग्रामीणों के घेराव के कारण करीब चार घंटे तक कंपनी का काम प्रभावित रहा। बातचीत के दौरान कंपनी प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि रोजगार से जुड़े विषयों पर चर्चा के लिए उचित माध्यम उपलब्ध है और किसी भी समस्या का समाधान बातचीत से किया जा सकता है। इसके बाद ग्रामीणों और प्रबंधन के बीच सहमति बनी तथा कार्य दोबारा शुरू कराया गया।
कंपनी प्रबंधन का कहना है कि रामपुर बटुरा मेगा प्रोजेक्ट एक महत्वपूर्ण परियोजना है, जिसमें निर्धारित समय-सीमा और सुरक्षा मानकों के अनुसार कार्य करना आवश्यक है। ऐसे में बार-बार होने वाले विरोध और कार्यस्थल पर हस्तक्षेप से न केवल कंपनी का काम प्रभावित होता है, बल्कि परियोजना की समग्र कार्यप्रगति पर भी असर पड़ सकता है।
बिचौलियों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
रोजगार के नाम पर लगातार दबाव बनाए जाने के बीच अब इस बात पर भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या वास्तव में सभी प्रदर्शनकारी युवाओं की अपनी रोजगार संबंधी मांग है या कुछ लोग इसके पीछे मध्यस्थ की भूमिका निभाकर कंपनी की भर्ती प्रक्रिया को अपने प्रभाव में लेने का प्रयास कर रहे हैं।
कंपनी से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि किसी स्थानीय युवा को रोजगार चाहिए तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकता है। पात्रता के आधार पर अवसर मिलना चाहिए, लेकिन किसी व्यक्ति अथवा समूह द्वारा दबाव बनाकर भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करना उचित नहीं है।
कंपनी ने कहा—स्थानीय हितों का सम्मान, लेकिन काम में बाधा स्वीकार नहीं
जय अम्बे प्राइवेट लिमिटेड प्रबंधन का कहना है कि कंपनी स्थानीय क्षेत्र के लोगों के हितों को समझती है और पात्र स्थानीय युवाओं को उनकी योग्यता एवं उपलब्ध पदों के अनुसार अवसर देने के लिए तैयार है। साथ ही कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि रोजगार के नाम पर बार-बार काम रोकना या कार्यस्थल पर दबाव बनाना स्वीकार्य नहीं हो सकता।
रविवार की घटना के बाद एक बार फिर यह स्पष्ट हुआ है कि रामपुर बटुरा परियोजना में रोजगार का मुद्दा संवेदनशील है। आवश्यकता इस बात की है कि स्थानीय युवाओं की वास्तविक समस्याओं का समाधान पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर समन्वय के माध्यम से हो, न कि बार-बार कंपनी का काम प्रभावित कराकर। इससे एक ओर स्थानीय युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे, वहीं दूसरी ओर परियोजना का काम भी निर्बाध रूप से आगे बढ़ सकेगा।