स्कूली वाहनों पर पुलिस की सख्ती, 40 वाहनों की जांच,हादसे के बाद ही क्यों खुलती है जिम्मेदारों की नींद,क्या पहले से नहीं हो सकती थी निगरानी

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स्कूली वाहनों पर पुलिस की सख्ती, 40 वाहनों की जांच,हादसे के बाद ही क्यों खुलती है जिम्मेदारों की नींद,क्या पहले से नहीं हो सकती थी निगरानी
कटनी /विजयराघवगढ़।। 9 सितंबर को थाना क्षेत्र में हुए सड़क हादसे को गंभीरता से लेते हुए थाना विजयराघवगढ़ पुलिस ने 13 सितंबर को क्षेत्र में संचालित निजी एवं अर्द्धशासकीय स्कूलों के वाहनों की विशेष चेकिंग अभियान चलाया। अवकाश के दिन आयोजित इस अभियान के दौरान करीब 40 स्कूली वाहनों की जांच की जा चुकी थी और कार्रवाई का सिलसिला आगे भी जारी रहने की बात पुलिस ने कही है।


चेकिंग के दौरान स्कूली वाहनों के संपूर्ण दस्तावेजों का अवलोकन किया गया। वाहन चालकों का थाना स्तर पर आपराधिक अभिलेख भी दिखवाकर उनका सिलसिलेवार सत्यापन किया गया तथा जानकारी रजिस्टर में दर्ज की गई। इसके साथ ही वाहनों का भौतिक सत्यापन करते हुए दरवाजों की स्थिति, बच्चों के बैठने की व्यवस्था और अन्य सुरक्षा संबंधी इंतजामों की भी जांच की गई।

थाना प्रभारी अभिषेक चौबे ने बताया कि अवकाश के दिनों में विशेष अभियान चलाने का उद्देश्य यह है कि स्कूल संचालित होने के दौरान बच्चों के वाहनों को अनावश्यक रूप से नहीं रोकना पड़े और उनकी सुरक्षा जांच भी सुनिश्चित हो सके। पुलिस ने वाहन चालकों, स्कूल संस्थापकों एवं वाहन स्वामियों को शासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों और यातायात नियमों की जानकारी देते हुए वाहनों के दस्तावेज अपडेट रखने तथा बच्चों को ले जाते समय विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी। सकारात्मक पहल यह है कि पुलिस ने केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित न रहते हुए वाहनों की वास्तविक स्थिति और चालकों के सत्यापन पर भी ध्यान दिया है। यदि इस तरह की जांच नियमित रूप से होती रहे तो स्कूली बच्चों की सुरक्षा से जुड़े जोखिमों को समय रहते कम किया जा सकता है।
लेकिन सवाल यह भी हादसे के बाद ही क्यों खुलती है नींद
पुलिस की इस कार्रवाई का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन इसके साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा होता है,क्या स्कूली वाहनों की जांच हादसा होने के बाद ही जरूरी होती है।
आखिर हादसे से पहले इन वाहनों के दस्तावेज, फिटनेस, सुरक्षा व्यवस्था, चालकों का सत्यापन और यातायात नियमों का पालन क्या नियमित रूप से जांच के दायरे में नहीं होना चाहिए। यदि व्यवस्था पहले से सक्रिय रहती, तो क्या कुछ कमियां और संभावित लापरवाहियां हादसे से पहले ही सामने नहीं आ सकती थीं। हर हादसे के बाद अचानक चेकिंग, कार्रवाई और लगातार अभियान चलने लगते हैं। निश्चित रूप से कार्रवाई जरूरी है, लेकिन बच्चों की सुरक्षा ऐसी व्यवस्था की मांग करती है जिसमें हादसा होने का इंतजार न करना पड़े।
सवाल यह भी है कि क्या अब की जा रही कार्रवाई सिर्फ हादसे के बाद दिखाई देने वाली सक्रियता बनकर रह जाएगी, या फिर आगे भी इसी गंभीरता से नियमित जांच जारी रहेगी। क्योंकि कार्रवाई का असली मूल्य तभी है, जब वह हादसे के बाद की प्रतिक्रिया नहीं, बल्कि हादसे को रोकने की व्यवस्था बने। पुलिस की वर्तमान कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन अब देखना यह होगा कि यह अभियान कितने समय तक निरंतर चलता है और जांच में सामने आने वाली कमियों पर वास्तव में क्या कार्रवाई होती है।

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