हादसा होने के बाद मलबा हटाना प्रशासन की मजबूरी होती है, लेकिन हादसे से पहले खतरा हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी,सुरक्षा की जांच आज होगी तो जानें कल बचेंगी। दिल्ली हादसे से भी नहीं जागा कटनी प्रशासन कोचिंग-स्कूलों की सुरक्षा जांच कब होगी, हादसे के बाद या पहले,संकरी गलियों में चल रहे कोचिंग और चिल्ड्रन स्कूल, सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल हो सुरक्षा ऑडिट

0

हादसा होने के बाद मलबा हटाना प्रशासन की मजबूरी होती है, लेकिन हादसे से पहले खतरा हटाना प्रशासन की जिम्मेदारी,सुरक्षा की जांच आज होगी तो जानें कल बचेंगी।

दिल्ली हादसे से भी नहीं जागा कटनी प्रशासन कोचिंग-स्कूलों की सुरक्षा जांच कब होगी, हादसे के बाद या पहले,संकरी गलियों में चल रहे कोचिंग और चिल्ड्रन स्कूल, सुरक्षा इंतजामों पर बड़े सवाल हो सुरक्षा ऑडिट

शहर में तेजी से बढ़ते कोचिंग संस्थानों और चिल्ड्रन स्कूलों ने शिक्षा के अवसर तो बढ़ाए हैं, लेकिन इनके संचालन से जुड़ी भवन सुरक्षा और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर भी उतनी ही गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए। सवाल यह नहीं है कि कितने संस्थान चल रहे हैं। सवाल यह है कि उनमें पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन सुनिश्चित कर रहा है। कई बार छोटे भवन, किराये के मकान या रिहायशी इलाकों की इमारतें देखते ही देखते कोचिंग सेंटर या स्कूल में बदल जाती हैं। कमरे में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ जाती है, विद्युत भार बढ़ जाता है, सीढ़ियां और निकास मार्ग भीड़भाड़ वाले हो जाते हैं। यदि ऐसी जगह पर आग लग जाए या भवन का कोई हिस्सा कमजोर होकर गिर जाए तो कुछ मिनटों में स्थिति भयावह हो सकती है।

कटनी।। दिल्ली के सत्य निकेतन क्षेत्र में छात्रों के पीजी हॉस्टल की इमारत ढहने की घटना ने देशभर में छात्र आवासों और पुरानी इमारतों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में छात्रों की जान जाने की खबर ने एक बार फिर यह सोचने को मजबूर किया है कि कहीं ऐसी किसी त्रासदी का इंतजार तो नहीं किया जा रहा, जिसके बाद प्रशासन जागे। दिल्ली की घटना से कटनी को भी सबक लेने की जरूरत है। शहर में अलग-अलग इलाकों में किराये की इमारतों, मकानों और व्यावसायिक परिसरों में कोचिंग संस्थान, चिल्ड्रन स्कूल तथा अन्य शैक्षणिक गतिविधियां संचालित होने की शिकायतें और सवाल समय-समय पर सामने आते रहे हैं। इनमें से कई संस्थान ऐसे क्षेत्रों में संचालित हैं, जहां पहुंचने वाली गलियां संकरी हैं और आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड या एंबुलेंस की आवाजाही चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
संकरी गलियां और भीड़भाड़ वाले भवन बड़ी चिंता
कटनी शहर में अनेक रिहायशी क्षेत्रों में भवनों का उपयोग उनकी मूल स्वीकृत उपयोगिता से अलग गतिविधियों के लिए किया जाता है। यदि किसी आवासीय भवन में बड़ी संख्या में बच्चे या विद्यार्थी नियमित रूप से एकत्रित हो रहे हैं तो वहां फायर सेफ्टी, आपातकालीन निकास, विद्युत वायरिंग, भवन की संरचनात्मक मजबूती, पार्किंग एवं आपातकालीन वाहनों की पहुंच जैसे बिंदुओं की जांच बेहद जरूरी हो जाती है।
विशेष चिंता उन संस्थानों को लेकर है जो छोटी गलियों में स्थित किराये के कमरों अथवा बहुमंजिला भवनों में संचालित हो रहे हैं। किसी दुर्घटना, आग, शॉर्ट सर्किट, गैस रिसाव या भवन के हिस्से के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में विद्यार्थियों और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
प्रशासन को घटना का इंतजार नहीं करना चाहिए
नगर निगम और जिला प्रशासन के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुरक्षा जांच हादसे के बाद होगी या हादसे से पहले। जरूरत इस बात की है कि नगर निगम, जिला प्रशासन, फायर विभाग और संबंधित विभाग संयुक्त रूप से शहर में संचालित कोचिंग संस्थानों एवं चिल्ड्रन स्कूलों का सुरक्षा ऑडिट कराएं। खासकर ऐसे संस्थानों की जांच प्राथमिकता से हो जो रिहायशी भवनों, संकरी गलियों या पुराने निर्माण में संचालित हो रहे हैं।
जांच में यह देखा जाना चाहिए कि संबंधित भवन का नक्शा स्वीकृत है या नहीं, भवन का उपयोग नियमानुसार हो रहा है या नहीं, फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं या नहीं, आपातकालीन निकास उपलब्ध है या नहीं और भवन की संरचनात्मक स्थिति सुरक्षित है या नहीं।

कार्रवाई में भेदभाव नहीं, सुरक्षा सर्वोपरि
यदि जांच में नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो संबंधित संचालक को नोटिस देने से आगे बढ़कर नियमानुसार प्रभावी कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं जिन संस्थानों में आवश्यक सुरक्षा मानक पूरे पाए जाएं, उन्हें भी नियमित निरीक्षण के दायरे में रखा जाना चाहिए। यह किसी संस्था को परेशान करने का अभियान नहीं, बल्कि बच्चों और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी है।
कटनी को दिल्ली जैसी किसी घटना के बाद यह कहने की स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए कि सुरक्षा मानकों की जांच पहले क्यों नहीं की गई। प्रशासन के पास आज समय है कि वह शहर के संभावित जोखिम वाले भवनों को चिन्हित करे और आवश्यक सुधार कराए। हादसे का इंतजार करके व्यवस्था सुधारने से बेहतर है कि खतरे को पहले पहचान लिया जाए। दिल्ली में छात्र पीजी की इमारत ढहने की घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि उन सभी शहरों के लिए चेतावनी है जहां पुराने भवनों में बिना पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था के बड़ी संख्या में बच्चे और विद्यार्थी रहते या पढ़ते हैं। कटनी भी इससे अछूता नहीं है।
कटनी प्रशासन से जनता के 10 सीधे सवाल
क्या शहर में संचालित सभी कोचिंग संस्थानों की सूची प्रशासन के पास है।
क्या सभी संस्थानों के भवन उपयोग की अनुमति की जांच हुई है।
क्या पुराने भवनों की स्ट्रक्चरल सेफ्टी जांची गई है।
क्या प्रत्येक संस्थान में फायर सेफ्टी व्यवस्था मौजूद है।
क्या आपातकालीन निकास की व्यवस्था है।
क्या संकरी गलियों में संचालित संस्थानों का विशेष निरीक्षण हुआ है।
क्या किराये के मकानों में चल रहे चिल्ड्रन स्कूलों की अनुमति जांची गई है।
क्या विद्युत वायरिंग और बढ़े हुए विद्युत भार की जांच होती है।
आपात स्थिति में फायर ब्रिगेड और एंबुलेंस मौके तक पहुंच सकती है।
नियमों का उल्लंघन मिलने पर अब तक कितनी संस्थाओं पर कार्रवाई हुई। इन सवालों के जवाब केवल कागजों में नहीं, जमीन पर दिखाई देने चाहिए। नगर निगम और जिला प्रशासन को चाहिए कि वे इसे किसी एक विभाग की जिम्मेदारी मानकर न छोड़ें। संयुक्त सुरक्षा सर्वे अभियान चलाया जाए। शहर के सभी कोचिंग संस्थानों, चिल्ड्रन स्कूलों और अधिक संख्या में विद्यार्थियों को रखने वाले भवनों का भौतिक निरीक्षण हो। पुराने और संदिग्ध भवनों की संरचनात्मक जांच कराई जाए। फायर सेफ्टी, विद्युत व्यवस्था, आपातकालीन निकास और भवन उपयोग की अनुमति की जांच हो। सबसे महत्वपूर्ण बात कार्रवाई हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले होनी चाहिए। बच्चे और विद्यार्थी किसी भी शहर की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हैं। उनकी सुरक्षा के मामले में प्रशासन की एक छोटी सी लापरवाही भी बहुत बड़ी कीमत वसूल सकती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed