पट्टा वाली जमीन पर निर्माण रोका, फिर घर में जाने से भी रोकने का आरोप! भाई-बहन के विवाद में FIR के बाद उठे कई गंभीर सवाल

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भारी बारिश में घर ढहा तो पड़ोसी के यहां रहने को मजबूर परिवार, तहसील के स्टे का सम्मान कर निर्माण रोका—फिर भी विवाद जारी रहने का आरोप

 

गौरेला। जिस जमीन पर परिवार के जन्म से रहने और पिता के नाम शासकीय पट्टा होने का दावा किया जा रहा है, उसी जमीन को लेकर विवाद अब FIR, तहसील के स्टे और घर में प्रवेश को लेकर कथित रोक-टोक तक पहुंच गया है। मामले में चार लोगों के खिलाफ पुलिस ने FIR दर्ज की है।

 

प्रार्थी पक्ष के अनुसार, मोहम्मद कादिर और उनकी बड़ी बहन साजदा बेगम अपने माता-पिता के साथ जन्म से ही खसरा नंबर 524/1 में लगभग 500 वर्गफुट में बने मकान में रहते आए हैं। परिवार का दावा है कि उक्त मकान की जमीन का शासकीय पट्टा तत्कालीन रमन सरकार के समय उनके पिता शेख निहाल के नाम पर जारी हुआ था। अब दोनों माता-पिता का निधन हो चुका है।

 

बारिश में ढहा घर, पड़ोसी के यहां लेनी पड़ी शरण

बीते दिनों भारी बारिश के कारण पुराना मकान ढह गया। इसके बाद मोहम्मद कादिर और साजदा बेगम पड़ोस में रहने वाले सोनू उर्फ फिरदौस आलम के घर में रहने लगे। वहीं से अपने पुराने मकान वाली जगह पर नया आशियाना बनाने का प्रयास किया जा रहा था।

 

प्रार्थी पक्ष का आरोप है कि इसी दौरान लियाकत अली तथा उनके बेटे डब्ल्यू उर्फ शमशाद अली, नुस्सी उर्फ नौशाद खान और दिल्लू उर्फ दिलशाद अली द्वारा निर्माण कार्य रोकने और उक्त जमीन पर नहीं आने के लिए दबाव बनाया जाने लगा।

 

तहसील से स्टे मिला तो प्रार्थी पक्ष ने खुद रोक दिया निर्माण

मामले में एक महत्वपूर्ण बात यह भी सामने आई है कि आरोपी पक्ष द्वारा करीब तीन दिन पहले तहसील कार्यालय में आवेदन देकर उक्त जमीन पर निर्माण कार्य रोकने के लिए स्टे/रोक आदेश प्राप्त किए जाने का दावा है।

 

प्रार्थी पक्ष का कहना है कि उन्होंने कानून और प्रशासनिक आदेश का सम्मान करते हुए निर्माण कार्य तत्काल रोक दिया। इसके बावजूद उनका आरोप है कि आरोपी पक्ष द्वारा उन्हें अपने ही पुराने घर के अंदर जाने तक से रोका गया और इसी बात को लेकर विवाद किया गया।

 

यही बिंदु अब पूरे मामले को और गंभीर बना रहा है—जब निर्माण कार्य प्रशासनिक आदेश के बाद रोक दिया गया था, तो क्या किसी पक्ष को कथित रूप से किसी व्यक्ति को उसके घर में प्रवेश करने से रोकने का अधिकार है? या फिर ऐसे विवाद का समाधान राजस्व न्यायालय और पुलिस-प्रशासन की कानूनी प्रक्रिया से होना चाहिए?

 

महिला की अस्मिता और सम्मान को लेकर भी सवाल

प्रार्थी पक्ष का कहना है कि जमीन को लेकर विवाद अपनी जगह है, लेकिन एक महिला को अपने ही पारिवारिक घर और जमीन से जुड़े मामले में कथित तौर पर अपमानित या रोकना गंभीर विषय है।

 

14 सितंबर को कथित मारपीट के बाद FIR

FIR में दर्ज शिकायत के मुताबिक 14 सितंबर 2026 को दोपहर करीब 1 बजे मोहम्मद कादिर अपनी बहन साजदा बेगम के साथ निर्माणाधीन मकान की ओर गए थे। इसी दौरान विवाद होने तथा कथित रूप से गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया गया है।

 

शिकायत में साजदा बेगम के जमीन पर गिरकर बेहोश होने तथा सिर के पीछे और दाहिने हाथ की कलाई में चोट लगने का भी उल्लेख है।

 

पुलिस ने दस्तावेज के अनुसार BNS की धारा 296, 351(3), 115(2) और 3(5) के तहत FIR दर्ज की है।

 

अब जांच में सामने आना चाहिए असली सच

इस मामले में कई सवालों के जवाब प्रशासनिक और पुलिस जांच से ही सामने आएंगे—

 

क्या जमीन का पट्टा वास्तव में शेख निहाल के नाम था?

 

तहसील से लगाया गया स्टे किस आधार पर और किन शर्तों पर जारी हुआ?

 

स्टे के बाद निर्माण रोकने के बावजूद घर में प्रवेश को लेकर विवाद क्यों हुआ?

 

जमीन पर दूसरे पक्ष का कोई वैध अधिकार या दावा है तो उसके दस्तावेज क्या हैं?

 

और यदि विवाद राजस्व न्यायालय में विचाराधीन है, तो क्या दोनों पक्ष कानून के दायरे में रहकर समाधान का रास्ता अपनाएंगे?

 

मामला अब केवल जमीन के विवाद तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि एक परिवार के आशियाने, महिला के सम्मान और कानून-व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े कर रहा है।

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