जंगल में जुए का साम्राज्य, बड़वारा थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी निभा रहा था कौन स्पेशल टीम की आधी रात की रेड , 13 गिरफ्तार, 8 फरार अब थाना प्रभारी की जवाबदेही तय करने की जरूरत
जंगल में जुए का साम्राज्य, बड़वारा थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी निभा रहा था कौन
स्पेशल टीम की आधी रात की रेड , 13 गिरफ्तार, 8 फरार अब थाना प्रभारी की जवाबदेही तय करने की जरूरत
कटनी।। जंगल के अंधेरे में एलईडी लाइट की रोशनी के बीच सजती जुए की महफिल, दूर-दूर से पहुंचते जुआरी, दांव पर लगती हजारों की नकदी और मौके पर खड़ी मोटरसाइकिलों की कतार….यह किसी फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि बड़वारा थाना क्षेत्र के ग्राम भदौरा (मझगवां क्षेत्र) के जंगल से सामने आई तस्वीर है। दीपावली के ठीक पहले पुलिस अधीक्षक की स्पेशल टीम की कार्रवाई ने न केवल जुए के इस कथित बड़े अड्डे का पर्दाफाश किया, बल्कि स्थानीय पुलिस की निगरानी और जवाबदेही को लेकर भी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 31 अक्टूबर की रात करीब 11:45 बजे हुई इस कार्रवाई में 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि 8 आरोपी फरार हो गए। पुलिस ने 80 हजार 500 रुपये नकद, आठ मोटरसाइकिल, मोबाइल फोन, ताश के पत्ते, एलईडी लाइट सहित कुल 12 लाख 85 हजार 700 रुपये की संपत्ति जब्त की। जब्त सामग्री और आरोपियों की संख्या इस बात की ओर इशारा करती है कि यह कोई सामान्य स्तर पर चल रही जुआ गतिविधि नहीं थी।
जब जंगल में सज रही थी महफिल, तब थाना कहां था
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू जुआरियों की गिरफ्तारी से आगे का है। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जंगल में यह जुए की फड़ लंबे समय से संचालित हो रही थी। यहां नियमित रूप से जुआ खेलने वालों का आना-जाना था। रात के अंधेरे में बाकायदा एलईडी लाइट की व्यवस्था की गई थी और कटनी शहर सहित आसपास के क्षेत्रों से लोग मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों से पहुंचते थे। यदि इन दावों में सच्चाई है तो सवाल स्वाभाविक है कि इतने लंबे समय तक चल रही गतिविधि स्थानीय पुलिस की नजरों से कैसे बची रही।
थाना क्षेत्र में कानून व्यवस्था बनाए रखना, अवैध गतिविधियों पर निगरानी रखना, अपराध की सूचना जुटाना और समय रहते कार्रवाई करना थाना प्रभारी की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। ऐसे में किसी बड़े अवैध अड्डे का स्पेशल टीम के हाथों पकड़ा जाना स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जरूरत जरूर पैदा करता है।
थाना प्रभारी की जिम्मेदारी केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित नहीं
किसी भी थाने की जिम्मेदारी सिर्फ अपराध होने के बाद एफआईआर दर्ज करना या आरोपियों को गिरफ्तार करना नहीं होती। थाना प्रभारी अपने क्षेत्र की कानून व्यवस्था का प्रमुख जिम्मेदार होता है। उसे अपने अधीनस्थ पुलिसकर्मियों की सक्रियता, बीट व्यवस्था, रात्रि गश्त, मुखबिर तंत्र और संदिग्ध गतिविधियों पर सतत निगरानी रखनी होती है।
यदि थाना क्षेत्र में किसी स्थान पर रोजाना जुए की महफिल सज रही हो, वहां बाहरी लोगों का जमावड़ा हो रहा हो और रात में रोशनी की व्यवस्था करके घंटों अवैध गतिविधियां संचालित हो रही हों, तो इसकी जानकारी स्थानीय पुलिस तक नहीं पहुंचना अपने आप में गंभीर प्रशासनिक प्रश्न है।
थाना प्रभारी सुयश पांडेय का कहना है कि जंगल में जुआ फड़ संचालित होने की सूचना मिल रही थी और मुखबिरों से पुख्ता जानकारी मिलने पर दबिश दी गई। उनका यह बयान भी कई सवालों को जन्म देता है। यदि गतिविधि की जानकारी पहले से मिल रही थी तो कार्रवाई में देरी क्यों हुई और यदि पुख्ता सूचना 31 अक्टूबर की रात ही मिली, तो इससे पहले निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
एसपी की स्पेशल टीम ने दिखाई सक्रियता, अब जवाबदेही की बारी
इस कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा की स्पेशल टीम ने सूचना पर सीधे जंगल में पहुंचकर कार्रवाई की। यह कार्रवाई बताती है कि पुलिस के वरिष्ठ नेतृत्व के स्तर पर अवैध गतिविधियों के खिलाफ निगरानी और हस्तक्षेप की व्यवस्था मौजूद है। एसपी की स्पेशल टीम द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब पुलिस अधीक्षक से यह अपेक्षा स्वाभाविक है कि वे इस पूरे घटनाक्रम की विभागीय समीक्षा कराएं। यह पता लगाया जाए कि जुए की फड़ कितने समय से संचालित थी, स्थानीय पुलिस को इसकी जानकारी कब मिली, बीट पुलिस की भूमिका क्या रही और थाना स्तर पर समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
13 गिरफ्तार, 8 फरार; अब जांच के दायरे में निगरानी व्यवस्था भी आए
पुलिस कार्रवाई में अनामिक बनर्जी, प्रिंस पांडेय, अंकित बरगाही, जुनैद खान, राज निषाद, मुकेश कुमार पटेल, पुष्पराज सिंह, बसंत शर्मा, संजय बारसकर, संदीप गुप्ता, बल्ली निषाद, अजय साहू और आनंद निषाद को गिरफ्तार किया गया। वहीं साहिल दाहिया, संत कुमार भारती, सुरेन्द्र चौधरी, अमन निषाद, रामदास केवट, संजय नेपाली, अरबाज खान और सागर निषाद फरार बताए गए हैं। पुलिस ने आरोपियों के विरुद्ध धारा 112(2) बीएनएस एवं 13 जुआ एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया है। फरार आरोपियों की तलाश और पूरे नेटवर्क की जांच भी इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
सामने तीन अहम सवाल
जंगल में कथित रूप से लंबे समय से संचालित जुआ फड़ की जानकारी स्थानीय थाना पुलिस को क्यों नहीं मिली।
रात्रि गश्त, बीट पुलिस और मुखबिर तंत्र की सक्रियता की वास्तविक स्थिति क्या थी।
क्या थाना प्रभारी और संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका की विभागीय जांच कर जवाबदेही निर्धारित की जाएगी।
आखिर थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी किसकी
बड़वारा के जंगल में हुई यह कार्रवाई जुआरियों के खिलाफ पुलिस की एक महत्वपूर्ण कार्रवाई है, लेकिन इसका दूसरा पहलू भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अपराधियों पर कार्रवाई के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि जिन क्षेत्रों में अवैध गतिविधियां पनपती हैं, वहां जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही भी तय हो।
पुलिस अधीक्षक अभिनय विश्वकर्मा की स्पेशल टीम ने कार्रवाई करके अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि एसपी इस मामले को केवल जुआरियों की गिरफ्तारी तक सीमित रखते हैं या स्थानीय पुलिस की निगरानी व्यवस्था की भी गहराई से समीक्षा कराते हैं। जंगल में जुए की महफिल सजती रही और यदि स्थानीय पुलिस को भनक तक नहीं लगी, तो यह सवाल अनुत्तरित नहीं रहना चाहिए कि आखिर बड़वारा थाना क्षेत्र की जिम्मेदारी कौन निभा रहा था।