छात्रावास की बदहाली के खिलाफ सड़कों पर उतरे छात्र, 100 किलोमीटर पैदल कलेक्टर से मिलने निकले; व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
(अनिल तिवारी | हाल-ए-हलचल डिजिटल)
शहडोल । जिले में छात्रावासों की अव्यवस्थाओं को लेकर विरोध की यह पहली घटना नहीं है। करीब तीन दिन पहले ही जयसिंहनगर की छात्राएं छात्रावास की दीवार फांदकर लगभग 40 किलोमीटर पैदल निकल पड़ी थीं। इसके पहले भी अलग-अलग क्षेत्रों से छात्रावास छोड़कर बच्चों के बाहर आने और अपनी समस्याएं उठाने के मामले सामने आ चुके हैं। पिछले दो महीनों में करीब 7 से 8 ऐसी घटनाओं का सामने आना बताता है कि अब यह समस्या किसी एक संस्थान तक सीमित नहीं रह गई है।
आखिर कब जागेगा आदिवासी विकास विभाग?
जिले में छात्रावासों का संचालन और बच्चों की सुविधाओं की निगरानी आदिवासी विकास विभाग की जिम्मेदारी है। इसके बावजूद बार-बार बच्चों को अपनी बात पहुंचाने के लिए सड़क का रास्ता चुनना पड़ रहा है। छात्रावासों में भोजन, रहने, पेयजल, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं को लेकर उठ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। विभागीय व्यवस्था में कथित भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोपों की भी गंभीरता से पड़ताल होनी चाहिए।
अब सवाल केवल इन बच्चों की शिकायतों का नहीं, बल्कि पूरे छात्रावास तंत्र में आमूलचूल बदलाव का है। कलेक्टर को स्वयं छात्रावासों का औचक निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति देखनी होगी। आखिर आदिवासी बच्चों के भविष्य के लिए बनी व्यवस्था में उन्हें अपनी फरियाद लेकर 100 किलोमीटर पैदल चलने की नौबत क्यों आ रही है?