स्वयं-भू अध्यक्ष ने धनाड्यों के साथ मिलकर ले लिया लॉकडाउन का निर्णय
विक्रांत तिवारी
शहडोल । रविवार को जिला व्यापारी संघ के द्वारा बुधवार से लेकर रविवार तक 5 दिन के लॉकडाउन को लेकर लिये गये निर्णय में व्यापारी ही एक मत नहीं है। रविवार को जैसे ही लक्ष्मण गुप्ता के अध्यक्ष वाले गुट ने यह खबर सोशल मीडिया में वॉयरल की, उसके बाद से ही कई व्यापारियों ने इस पर विरोध जताया, सोशल मीडिया में ही कई व्यापारियों ने इसे छोटे और मझौले व्यापारियों के लिए अहितकारी बताया, शहडोल के साथ ही यह स्थिति बुढ़ार, धनपुरी व जिले के अन्य हिस्सों में भी रही। छोटे व्यापारियों का कहना था कि थोक और करोड़पति सेठों के द्वारा लिये गये इस निर्णय से उन्हें तो कोई फर्क नहीं पड़ता, इससे लॉकडाउन के बाद धीरे-धीरे पटरी पर आ रही हमारी जीवन रेखा फिर से बेपटरी हो सकती है।
ऐसे भी हो सकता है पालन
सोशल मीडिया सहित अन्य प्लेटफार्माे पर व्यापारियों ने महानगरों की तर्ज पर शहडोल में भी ऑड-ईवन का फार्मूला लागू करने की बात कही, उन्होंने कहा कि एक दिन सड़क के एक तरफ की दुकाने तो, दूसरे दिन सड़क की दूसरी ओर की दुकानें पूरे दिन और पूरे समय खोली जाये, यह फार्मूला बड़े शहरों में सफल भी हुआ है, इससे भीड़ से निजात भी मिलेगी, यही नहीं इसे चार या पांच दिन नहीं बल्कि लगातार लागू किया जा सकता है।
निकला व्यापारियों का गुस्सा
रविवार सहित सोमवार के पूरे दिन सोशल मीडिया पर छोटे और मझौले व्यापारियों ने जमकर अपना गुस्सा निकाला, उन्होंने व्यापारी संघ के अध्यक्ष लक्ष्मण गुप्ता को स्वयं-भू अध्यक्ष बताया, अजय दास गुप्ता नामक व्यापारी ने लिखा कि व्यापारी संघ छोटे दुकानदारों और फुटपाथ व्यापारियों के बारे में भी सोचे, मैं इस तरह के बंद का विरोध करता हंू, मो. शाबिर नामक व्यापारी ने लिखा कि 5 दिन के लॉकडाउन से कोरोना नहीं भाग जायेगा। फुटपाथ व्यापारियों का क्या होगा, किसी ने सोचा तक नहीं। वहीं कोयलांचल के धनपुरी क्षेत्र के व्यापारी तिलक राज सोनी ने लिखा कि 16 से 20 तक बंद नहीं होगा। होगा तो, उसका खुला बहिष्कार होगा।
यह कह रहे व्यापारी
शहर के प्रतिष्ठित व्यवसायी व जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष राकेश कटारे ने सोशल मीडिया के व्हॉटसएप प्लेटफार्म पर लिखा कि जिला व्यापारी संघ शहडोल पांच दिन के बंद पर पुनर्विचार करे, जब जनजीवन अपनी पटरी पर आ रहा है,चार माह से बंद व्यापार धीरे धीरे अपनी गति पकड़ रहा है। बेरोजगारी से तंग काम करने वाले काम पर आ रहे हैं । व्यापारियों की बिगड़ी आर्थिक स्थिति सुधार की ओर है।जिला प्रशासन, राज्य व केंद्र सरकार लाकड़ाउन को खत्म कर अनलॉक की ओर बढ़ चुकी है और सभी बंद सामाजिक गतिविधियां धीरे धीरे पुन: चालू हो रही है तब जिला व्यापारी संघ का पांच दिन का बंद का निर्णय किसी भी दृष्टि से उचित प्रतीत नहीं हो रहा है । सभी व्यापारी व।कर्मचारी आत्मनिर्भर बनने की ओर तेजी से अग्रसर हो रहे हैं और उनकी खुद की संस्था पता नहीं किसके कहने से बंद का निर्णय ले रही है । व्यापारियों को जागरूक करने और सावधानी बरतने को कहने की आवश्यकता है ना की पांच दिन का बंद करने की । स्वास्थ विभाग का कार्य व्यापारी संघ ना करे । कृपया व्यापारी संघ के पदाधिकारी बंद के अपने निर्णय पर पुनर्विचार करें ।
युवा समाजसेवी प्रकाश जायसवाल ने लिखा कि इनके 5 दिन के बंद के आह्वान में कोरोना नहीं रुकेगा इन से आग्रह है कि यह ज्यादा दरियादिली ना दिखाए हो सके तो अपने अपने प्रतिष्ठानों के सामने सुरक्षा कवच बनाएं लोगों को जागरूक करें क्योंकि करो ना तो चारदीवारी के अंदर रहने वाले लोगों को ज्यादातर हो रहा है इसलिए कोरोना के मूल कारण पर जाकर उस पर अंकुश लगाने का प्रयास करें तभी कुछ सारगर्भित परिणाम आ सकते हैं। वहीं कांग्रेस नेता व व्यापारी प्रमोद जैन ने लिखा कि शहर में कुछ स्वयंभू नेता अपने आपको व्यापारी संघ का अध्यक्ष बता कर छोटे व्यापारी फुट पाठ फेरी बाजार करने वाले जिनकी जिंदगी बड़ी मुश्किल से वापस पटरी पर आई वापस उनको मुश्किल के दौर में डाला जा रहा है जबकि कोरोनावायरस महामारी बाजार बंद करने से खत्म नहीं होगी अगर ऐसा होता तो केंद्र शासन राज्य शासन जिला प्रशासन निश्चित तौर पर लॉक डाउन की प्रक्रिया करता ! जरूरत है अब आपसी समझ सावधानी बरतने की हंसी की बात यह है की जो लोग घोषणा कर रहे हैं उस अध्यक्ष की अपनी कोई दुकान ही नहीं है शहर मैं तो वह छोटे व्यापारियों का दर्द क्या समझे प्रतिदिन सौ पचास कमा कर अपने परिवार का पेट भरने वाला मुखिया उसके पेट में लात मारी जाएगी मेरा अपना मत है ऐसे स्वयंभू नेता तथाकथित अध्यक्ष एक बार अपने निर्णय में पुनर्विचार करें और बाजार बंद के निर्णय को बदलने का कष्ट करें। वार्ड नंबर 7 के पार्षद जितेन्द्र सिंह ने लिखा कि व्यापारी संघ छोटे दुकानदारों और फुटपाथ व्यापारिओं के बारे में भी सोचे मैं इस तरह के बंद का विरोध करता हूं।