जमुई में पत्थर खनन के नाम पर बना दी खाई

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खनिज विभाग नहीं ले रहा सुध, हो रहा मुरूम का अवैध उत्खनन

(अनिल तिवारी+7000362359)
शहडोल। संभागीय मुख्यालय से सटे ग्राम जमुई हेली पैड के थोड़ा आगे बीते वर्षाे में खनिज विभाग द्वारा क्रेशर संचालन की स्वीकृत दी गई थी, जिसके लिए पत्थर खदान भी स्वीकृत की गई थी, क्रेशर संचालक द्वारा रसूख और सेटिंग के बल पर बगैर सुरक्षा मानकों के पत्थर उत्खनन तो करवा लिया गया है, लेकिन आज की स्थिति में वहां खाई बना दी गई है, पत्थर निकालने के चक्कर में क्रेशर संचालक द्वारा हैली पैड के समीप ही बड़ा गड्डा कर दिया गया है। बरसात के दिनों में पानी भर जाने पर कभी भी हादसा हो सकता है। चर्चा है कि क्रेशर संचालक द्वारा अपने लाभ के चक्कर में दूसरों की जान से खिलवाड़ करने में आमादा है।
गड़बड़ा रहा है भू-जल स्तर
जानकारों की मानें तो मप्र खनन अधिनियम में खदान संचालकों को समतल क्षेत्र में 6 मीटर और पहाड़ी क्षेत्र में 8 तक खनन करने का अधिकार है, बावजूद इसके संभागीय मुख्यालय से सटे जमुई ग्राम में पप्पू ने अत्यधिक गहराई तक खनन कर दिया हैं। सूत्रों की माने तो वर्तमान में भी इन खदानों के तल में मजदूरों के द्वारा खुराई की जा रही है, जिससे भूजल स्तर भी गड़बड़ा रहा है। चर्चा है कि पप्पू द्वारा खनिज विभाग के अधिकारियों से सांठ-गांठ कर रात में ब्लास्ंिटग कराने से भी नहीं चूक रहा है, जिससे आस-पास के क्षेत्र में जल स्तर नीचे खिसक गया है और पानी की समस्या बढऩे लगी है।
यह होता कहते हैं कायदे
शासन के नियमानुसार शासन से अनुमति लेकर अगर क्रेशर संचालक ने खनन किया है तो, उसे नियमानुसार व्यवस्थित करके देना पड़ता है, क्यों कि जमीन का क्या उपयोग करना है, यह भी प्रशासन सोचता है, जानकारों की माने तो पत्थर खदान के लिए फेंसिंग या अन्य कोई बाउंड्री का निर्माण कराना होता है, यह शासन द्वारा संबंधित व्यक्ति से करार भी होता है, ठेकेदार गलती करता है तो, संबंधित विभाग के अधिकारियों की जिम्मेदारी से है कि सुरक्षा का ध्यान दे, किसी भी होने वाली घटना के बाद जो भी जिम्मेदार होता है, उसके खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कानून की अलग-अलग धाराओं में मामले बनते हैं और जुर्माना से लेकर सजाओं के भी प्रावधान हैं।
खाई का बना दिया स्वरूप
ग्राम जमुई के करीब ही अनाधिकृत रूप से मुरूम सहित पत्थर खोदने से बनी गहरी खाईंयां जान की दुश्मन बनी हुई हैं। बारिश में इन गड्ढों में पानी भरा हुआ है और इनमें जानकारी न होने के चलते डूबने का खतरा बना रहता है। खबर है कि पप्पू नामक व्यक्ति द्वारा पूर्व में यहां क्रेशर का संचालन किया जाता रहा है, खनिज विभाग ने जुर्माना लगाकर क्रेशर तो बंद करा दिया, लेकिन कथित संचालक अब भी बगैर अनुमति मुरूम और पत्थर निकालने का कार्य बड़ी तेजी लेबर के माध्यम से करवा रहा है, लेकिन खनिज विभाग में बैठे जिम्मेदारों को इस बात का भी भय नहीं रह गया है कि पास ही सटे हेलीपेड में आये दिन किसी बड़े मंत्री सहित अधिकारियों का आना-जाना बना रहता है, अगर उन्होंने हैली पैड से आगे बढ़कर बंद क्रेशर की पड़ताल की तो, खनिज विभाग के बंद पड़े कारनामें सब के सामने आ जायेंगे।

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