मरही माता मंदिर में आस्था का ऐतिहासिक संगम, एक साथ 550 सुहागिनों ने की पूजा-अर्चना बावली टोला में सुहागलों के आयोजन में उमड़ा महिलाओं का जनसैलाब, पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता रानी के दरबार में गूंजे मंगलकामना के स्वर
मरही माता मंदिर में आस्था का ऐतिहासिक संगम, एक साथ 550 सुहागिनों ने की पूजा-अर्चना
बावली टोला में सुहागलों के आयोजन में उमड़ा महिलाओं का जनसैलाब, पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता रानी के दरबार में गूंजे मंगलकामना के स्वर
कटनी। शहर के बावली टोला स्थित प्राचीन मरही माता मंदिर में 20 अक्टूबर को आस्था, परंपरा और भक्ति का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने पूरे मंदिर परिसर को श्रद्धा के रंग में रंग दिया। सुहागलों के पारंपरिक धार्मिक आयोजन में लगभग 550 सुहागिन महिलाओं ने एक साथ पूजा-अर्चना कर सामूहिक आस्था का अद्भुत दृश्य प्रस्तुत किया। माता मरही के दरबार में बड़ी संख्या में महिलाओं की उपस्थिति और विधि-विधान से संपन्न धार्मिक अनुष्ठान ने आयोजन को विशेष बना दिया। महिलाओं ने अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन की मंगलकामना और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए माता रानी के चरणों में प्रार्थना की।
एक साथ जुटीं 550 महिलाएं, भक्ति और परंपरा का दिखा अनुपम दृश्य
मरही माता मंदिर में आयोजित सुहागलों के कार्यक्रम में महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में श्रद्धालु महिलाओं की बड़ी संख्या से विशेष चहल-पहल रही। पूजा के दौरान हर महिला के मन में अपने परिवार की खुशहाली, पति के मंगलमय जीवन और घर-परिवार में सुख-शांति की कामना थी। सामूहिक रूप से आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान ने भारतीय संस्कृति में रची-बसी पारिवारिक मंगलकामना और धार्मिक आस्था की परंपरा को जीवंत कर दिया।
करीब 550 महिलाओं का एक साथ इस आयोजन में शामिल होना अपने आप में उल्लेखनीय रहा। यह केवल पूजा-अर्चना का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि ऐसा अवसर भी बना, जहां महिलाएं अपनी पारंपरिक मान्यताओं के साथ एक-दूसरे से जुड़ीं और सामूहिक श्रद्धा का हिस्सा बनीं।
पुजारी बद्री पंडा ने बताया सुहागलों का धार्मिक महत्व
मंदिर के पुजारी बद्री पंडा ने सुहागलों की धार्मिक मान्यता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सनातन परंपरा में व्रत, पूजा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से श्रद्धालु अपने परिवार के सुख, शांति और कल्याण की कामना करते हैं। सुहागलों भी ऐसी ही पारंपरिक धार्मिक परंपरा है, जिसमें सुहागिन महिलाएं अपने पति के दीर्घायु जीवन और परिवार की समृद्धि के लिए पूजा-अर्चना करती हैं।
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में परिवार को सामाजिक जीवन की महत्वपूर्ण इकाई माना गया है। प्रेम, विश्वास, समर्पण और परस्पर सहयोग वैवाहिक जीवन के प्रमुख आधार हैं। धार्मिक परंपराएं इन भावनाओं को आस्था के साथ जोड़ती हैं और पीढ़ी-दर-पीढ़ी सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का माध्यम बनती हैं।
आस्था के साथ सामाजिक एकता का संदेश
मरही माता मंदिर में सुहागलों का यह आयोजन धार्मिक विश्वास के साथ सामाजिक जुड़ाव का भी प्रतीक बना। बड़ी संख्या में महिलाओं की सहभागिता ने यह दर्शाया कि आधुनिक समय में भी पारंपरिक धार्मिक आयोजनों के प्रति लोगों की आस्था और सांस्कृतिक जुड़ाव कायम है। ऐसे आयोजन महिलाओं को एक साझा मंच प्रदान करते हैं, जहां वे अपनी परंपराओं का निर्वहन करने के साथ सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करती हैं। बावली टोला स्थित प्राचीन मरही माता मंदिर कटनी के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। मंदिर में आयोजित होने वाले धार्मिक कार्यक्रम स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
550 महिलाओं की सहभागिता बनी आयोजन का प्रमुख आकर्षण
सुहागलों के इस आयोजन का सबसे प्रमुख पक्ष लगभग 550 सुहागिन महिलाओं की सामूहिक सहभागिता रही। माता मरही के दरबार में एक साथ पूजा-अर्चना करती महिलाओं का यह दृश्य धार्मिक आस्था, पारिवारिक मंगलकामना और सांस्कृतिक परंपरा की सशक्त अभिव्यक्ति बना। श्रद्धालुओं ने माता रानी से सभी परिवारों में सुख-शांति, स्वास्थ्य, समृद्धि और खुशहाली बनाए रखने की प्रार्थना की।
मरही माता मंदिर में संपन्न यह आयोजन कटनी की धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं में एक यादगार अवसर के रूप में सामने आया। हालांकि, इसे ऐतिहासिक रिकॉर्ड या अब तक का सबसे बड़ा आयोजन कहने के लिए पूर्व आयोजनों अथवा आधिकारिक आंकड़ों की पुष्टि आवश्यक होगी।