SECL सोहागपुर में ‘कमीशनराज’: रामपुर मेगा प्रोजेक्ट बना वसूली का नया अड्डा!

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कोयले के काले खेल में सफेदपोशों की सेंधमारी: जितेंद्र पांडे और बी.के. जेना के नाम पर मची है खुली लूट

सोहागपुर/अमलई। साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड (SECL) के सोहागपुर एरिया का सबसे कमाऊ पूत कहा जाने वाला रामपुर मेगा प्रोजेक्ट अब भ्रष्टाचार की कालिख से पुत चुका है। जिस प्रोजेक्ट को इस क्षेत्र की ‘जीवनरेखा’ कहा जाता था, वह अब कुछ रसूखदार अधिकारियों और उनके गुर्गों के लिए ‘अवैध वसूली का एटीएम’ बन गया है। कोयला उत्पादन के रिकॉर्ड के पीछे कमीशनखोरी का एक ऐसा जाल बुना गया है, जिसमें ट्रांसपोर्टर और डीओ होल्डर बुरी तरह फड़फड़ा रहे हैं।

जितेंद्र पांडे का ‘प्रति टन’ आतंक!

प्रोजेक्ट में तैनात तकनीकी निरीक्षक जितेंद्र पांडे का नाम इस समय सबसे ज्यादा चर्चा में है। आरोप है कि जितेंद्र पांडे के नाम पर प्रति टन ₹35 की अवैध वसूली खुलेआम की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि यह वसूली अब किसी छिपे हुए तरीके से नहीं, बल्कि ‘सिस्टम’ का अनिवार्य हिस्सा बन चुकी है। जो पैसा नहीं देता, उसकी गाड़ियां डंप कर दी जाती हैं या लोडिंग लिस्ट में उसका नंबर सबसे पीछे धकेल दिया जाता है।

महाप्रबंधक बी.के. जेना पर भी सीधे सवाल

इस पूरे खेल की आंच अब सीधे ऊपर तक पहुंच रही है। चर्चा है कि महाप्रबंधक बी.के. जेना के नाम पर भी प्रति टन ₹8 का ‘नजराना’ वसूला जा रहा है। सवाल यह है कि क्या एक महाप्रबंधक की नाक के नीचे इतना बड़ा भ्रष्टाचार उनकी जानकारी के बिना संभव है? या फिर इस लूट में ऊपर से नीचे तक सबकी मौन सहमति है?

वसूली की चेकलिस्ट: गेट पास से कांटा घर तक ‘रेट कार्ड’

रामपुर मेगा प्रोजेक्ट में एंट्री से लेकर एग्जिट तक, हर कदम पर जेब ढीली करनी पड़ती है। एक ट्रेलर को बाहर निकालने का खर्च सुनकर आप हैरान रह जाएंगे:

खामोश क्यों है बिलासपुर मुख्यालय?

एक तरफ सरकार और कोल इंडिया पारदर्शिता की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ रामपुर मेगा प्रोजेक्ट में नकद भुगतान वाले डीओ धारकों से 60 से 70 प्रतिशत अधिक रकम वसूली जा रही है। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि वे ‘काम’ बचाने के लिए ‘दाम’ देने को मजबूर हैं। यदि इस पर जल्द लगाम नहीं कसी गई, तो यह भ्रष्टाचार SECL की साख को पूरी तरह निगल जाएगा।

बड़ा सवाल: क्या बिलासपुर मुख्यालय और विजिलेंस टीम इस संगठित उगाही पर रेड करेगी, या फिर जितेंद्र पांडे और बी.के. जेना जैसे अधिकारियों का यह ‘कमीशन साम्राज्य’ यूं ही फलता-फूलता रहेगा?

नोट: यह खबर ट्रांसपोर्टरों के बयानों और सूत्रों से मिली जानकारी पर आधारित है। विभाग का पक्ष आने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

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