42 डिग्री की भयंकर गर्मी में बिजली विभाग का ‘तुगलकी फरमान’: मानसून मेंटेनेंस के नाम पर जनता को उबालने की तैयारी!

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(मोहम्मद शाकिब खान, मुख्य संवाददाता, गौरेला)

 

गौरेला (विशेष रिपोर्ट)।

एक तरफ आसमान से आग बरस रही है, पारा 40-42 डिग्री के पार पहुँच चुका है और लोग गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) के पेण्ड्रारोड संभाग ने आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है। विभाग ने एक ऐसा ‘तुगलकी फरमान’ जारी किया है, जिसे देखकर लोगों के पसीने छूट गए हैं।

 

चिलचिलाती धूप और लू के थपेड़ों के बीच, विभाग को अचानक ‘मानसून’ की याद आ गई है! विभाग ने “मानसून पूर्व रखरखाव” (प्री-मानसून मेंटेनेंस) के नाम पर 25 से 27 अप्रैल 2026 तक पूरे क्षेत्र में भारी-भरकम बिजली कटौती का फरमान सुना दिया है।

 

अधिकारियों की संवेदनहीनता की हद देखिए:

मेंटेनेंस के नाम पर बिजली काटने का जो समय तय किया गया है, वह सीधे तौर पर जनता के साथ क्रूरता है।

 

सबसे गर्म पहर में कटौती: कुछ फीडरों (जैसे दानीकुंडी, कोटमीकला, अमहरू) में बिजली सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक यानी पूरे 6 घंटे गोल रहेगी। यह दिन का वह समय है जब सूरज अपने चरम पर होता है और बिना पंखे-कूलर के घरों में बैठना भट्टी में सिकने जैसा है।

 

सुबह से ही उमस का टॉर्चर: वहीं बेलगहना, बिरकोना, पाली जैसे इलाकों में सुबह 7 बजे से दोपहर 1 बजे तक और अन्य कई क्षेत्रों में सुबह 8 से दोपहर 12 बजे तक बिजली बंद रखने का नोटिस चिपका दिया गया है।

 

जनता के तीखे सवाल, जिनका जवाब विभाग के पास नहीं:

क्या सर्दियों में सो रहा था विभाग? जो ‘प्री-मानसून’ मेंटेनेंस 42 डिग्री की झुलसाती गर्मी में याद आ रहा है, वह फरवरी या मार्च के सुहावने मौसम में क्यों नहीं किया गया?

 

मेंटेनेंस है या सजा? दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच जब आम आदमी और बच्चे घर में लू से बचने की कोशिश करते हैं, ठीक उसी वक्त बिजली काटना कौन सी समझदारी है? क्या अधिकारियों के वातानुकूलित (AC) कमरों में बैठकर बनाए गए इस रूटीन में रत्ती भर भी जमीनी हकीकत का भान है?

 

बुजुर्गों और बच्चों का क्या? इस भयंकर गर्मी में लगातार 4 से 6 घंटे तक बिना बिजली के मरीजों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों का जो हाल होगा, उसका जिम्मेदार कौन है?

 

प्रभावित प्रमुख इलाके:

इस तानाशाही आदेश का खामियाजा पेण्ड्रा (शहर और ग्रामीण), गौरेला, रतनपुर, कोटा, बेलगहना, मरवाही, सिवनी और कोटमीकला सहित दर्जनों गांवों और कस्बों को भुगतना पड़ेगा।

 

 

यह सूचना पत्र महज एक ‘मेंटेनेंस शेड्यूल’ नहीं, बल्कि बिजली विभाग की घोर लापरवाही, लेट-लतीफी और जनता के प्रति पूर्ण संवेदनहीनता का जीता-जागता सबूत है। अपनी सुस्ती का ठीकरा आम उपभोक्ताओं के सिर फोड़ते हुए, विभाग ने मानसून से पहले ही जनता को अपने पसीने में नहलाने का पूरा इंतजाम कर लिया है। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस तानाशाही रवैये पर कोई लगाम लगाता है, या फिर जनता यूं ही इस आग उगलती गर्मी में बेबस उबलती रहेगी।

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