राजाधिराज बाबा महाकाल जी की पहली भव्य सवारी सावन महीने की पहली सवारी में राजाधिराज बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे। लाइव देखें सबसे पहले halehulchal.in पर
राजाधिराज बाबा महाकाल जी की पहली भव्य सवारी सावन महीने की पहली सवारी में राजाधिराज बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए चांदी की पालकी में सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलेंगे।
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🗓️ 3 अगस्त 2026 (सोमवार)
🕒 दोपहर 3:00 बजे
📍 उज्जैन
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श्रावण के पहले सोमवार निकलेंगी बाबा महाकाल की पहली शाही सवारी, चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले अवंतिकानाथ
उज्जैन। श्रावण मास के पहले सोमवार को धर्मनगरी उज्जैन में आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर आज अपनी पहली शाही सवारी में चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में पालकी पर विराजमान होकर नगर भ्रमण पर निकले। बाबा महाकाल की सवारी के साथ पूरी उज्जैन नगरी हर-हर महादेव के जयघोष से गूंज उठी।
ढोल-नगाड़ों, शंखनाद, झांझ-मंजीरों और भगवान महाकाल के जयकारों के बीच अवंतिकानाथ अपनी प्रजा का हाल जानने नगर भ्रमण पर निकले। श्रावण-भाद्रपद मास में निकलने वाली छह पारंपरिक सवारियों में यह इस वर्ष की पहली सवारी है। पहली सवारी 3 अगस्त को और अंतिम राजसी सवारी 7 सितंबर को निकाली जाएगी।
शाम 4 बजे मंदिर से रवाना हुई सवारी
परंपरा के अनुसार दोपहर 3:30 बजे महाकाल मंदिर के सभा मंडप में भगवान चंद्रमौलेश्वर का विशेष पूजन किया गया। इसके बाद शाम करीब 4 बजे बाबा महाकाल की सवारी मंदिर से रवाना हुई।
महाकाल मंदिर से निकलकर सवारी गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। करीब डेढ़ किलोमीटर की यात्रा के बाद रामघाट पर भगवान महाकाल का शिप्रा नदी के पवित्र जल से अभिषेक, पूजन और महाआरती की गई। इसके बाद बाबा की सवारी वापस रामघाट से रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, ढाबा रोड, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी चौराहा होते हुए पुनः महाकाल मंदिर पहुंची।
रामघाट पर जलाभिषेक, गोपाल मंदिर में हरि-हर मिलन
बाबा महाकाल की शाही सवारी में रामघाट का दृश्य विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। यहां शिप्रा के पवित्र जल से भगवान महाकाल का अभिषेक और महाआरती की गई। वहीं गोपाल मंदिर पहुंचने पर हरि-हर मिलन की दिव्य परंपरा निभाई गई। भगवान महाकाल और भगवान गोपाल के इस मिलन को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ और दुर्लभ माना जाता है। सवारी के दौरान सशस्त्र पुलिस बल की ओर से बाबा महाकाल को पारंपरिक गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया।
सवारी में दिखी धर्म और संस्कृति की झलक
महाकाल की शाही सवारी में धार्मिक आस्था के साथ मध्य प्रदेश की लोक एवं जनजातीय संस्कृति की भी झलक दिखाई दी। प्रत्येक सवारी में जनजातीय सांस्कृतिक दल अपनी प्रस्तुतियां देंगे, जबकि पांच एलईडी रथ भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बने हैं। श्रद्धालुओं को विभिन्न स्थानों पर चलित आरती के दर्शन की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। मंदिर प्रशासन के अनुसार कार्तिक मंडप की पहली तीन पंक्तियों से श्रद्धालु चलित आरती के दर्शन कर सकेंगे।
सुरक्षा और स्वास्थ्य के पुख्ता इंतजाम
बाबा महाकाल की सवारी में उमड़ने वाली भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा, यातायात, पेयजल, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं के व्यापक इंतजाम किए हैं। स्वास्थ्य सेवाओं के लिए 15 स्थानों पर मेडिकल टीमों की तैनाती की गई है। इसके साथ ही 24 घंटे एंबुलेंस सेवा उपलब्ध रहेगी। पुलिस और प्रशासन की टीमें पूरे मार्ग पर तैनात रहीं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो।
भस्म आरती में हुआ बाबा महाकाल का दिव्य शृंगार
श्रावण के पहले सोमवार की शुरुआत भी भगवान महाकाल की भस्म आरती के साथ हुई। तड़के करीब 2:30 बजे मंदिर के कपाट खोले गए, जिसके बाद पुजारियों ने भगवान महाकाल का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक किया। दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से भगवान का अभिषेक कर विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का भांग, चंदन, रुद्राक्ष, रजत आभूषणों, पुष्पमालाओं और शेषनाग के रजत मुकुट से राजाधिराज स्वरूप में भव्य शृंगार किया गया। भगवान गणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय का पूजन कर फल एवं मिष्ठान का नैवेद्य अर्पित किया गया। महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को पवित्र भस्म अर्पित की गई।
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। भस्म आरती में देशभर से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और पुण्य लाभ अर्जित किया। मंदिर परिसर में श्रद्धालु नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामनाएं कहते नजर आए। इस दौरान पूरे परिसर में लगातार “हर-हर महादेव” और “जय श्री महाकाल” के जयघोष गूंजते रहे। श्रावण के पहले सोमवार पर उज्जैन पूरी तरह शिवमय नजर आया और बाबा महाकाल की पहली शाही सवारी ने धर्म, आस्था, परंपरा और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया।
🔱 First Grand Ride of Rajadhiraj Baba Mahakal Ji 🔱
*First ride of Shravan month Rajadhiraj Baba Mahakaal sits in silver palanquin to know the condition of his people. We’ll go on a tour. *
🗓️ 3 August 2026 (Monday)
🕒 3:00pm
📍 Ujjain
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