गांधी चौक गौरेला से दुर्लभ गंधबिलाव (एशियन पाम सिवेट) का सुरक्षित रेस्क्यू, वन विभाग ने प्राकृतिक आवास में छोड़ा
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही:
गौरेला नगर के गांधी चौक स्थित दर्शील जैन के निवास परिसर में 18 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे एक वयस्क एशियन पाम सिवेट (Asian Palm Civet) देखा गया। हिंदी में इसे गंधबिलाव और स्थानीय बोलचाल में कब्र बिज्जू के नाम से जाना जाता है। रिहायशी इलाके में इस दुर्लभ वन्यजीव के पहुंचने से कुछ समय के लिए कौतूहल की स्थिति बन गई।
तत्परता से हुआ सुरक्षित रेस्क्यू
मामले की सूचना मिलते ही स्थानीय सर्प मित्र तुषार वर्मे और बादल कुमार मौके पर पहुंचे। दोनों ने तत्परता और सावधानी बरतते हुए गंधबिलाव का सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के उपरांत इसकी जानकारी तत्काल वनमण्डलाधिकारी (DFO) गौरेला-पेंड्रा-मरवाही को दी गई।
वन विभाग के संरक्षण में जंगल में छोड़ा गया
उच्चाधिकारियों के निर्देशानुसार वन परिक्षेत्राधिकारी श्रीमती ज्योत्सना पांडेय एवं विभागीय कर्मचारियों की मौजूदगी में 19 सितंबर को सुबह लगभग 5:30 बजे इस गंधबिलाव को उसके प्राकृतिक आवास (जंगल) में स्वतंत्र विचरण हेतु सुरक्षित छोड़ दिया गया।
अनुसूची-II के तहत प्राप्त है कानूनी संरक्षण
सर्प मित्रों ने बताया कि एशियन पाम सिवेट भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची-II (Schedule II) के तहत संरक्षित श्रेणी में आता है। यह निशाचर (रात में सक्रिय रहने वाला) जीव है, जो देर रात आहार की तलाश में निकलता है। आवास विखंडन और शिकार के चलते इनकी संख्या पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, जिससे इनका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।
बढ़ रही जन-जागरूकता
राहत की बात यह है कि अब लोग वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाने या मारने के बजाय तुरंत वन विभाग और स्थानीय रेस्क्यूअर्स को सूचित कर रहे हैं। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए हर जीव का अस्तित्व उतना ही जरूरी है जितना कि मानव जीवन का। गांधी चौक में स्थानीय निवासियों की यह संवेदनशीलता और वन अमले की मुस्तैदी वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सराहनीय कदम है।