सुप्रीम कोर्ट में महेंद्र गोयनका प्रकरण की सुनवाई से जस्टिस पारदीवाला अलग, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला फिर चर्चा में
सुप्रीम कोर्ट में महेंद्र गोयनका प्रकरण की सुनवाई से जस्टिस पारदीवाला अलग, करोड़ों की कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला फिर चर्चा में
कटनी।। एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे. बी. पारदीवाला ने महेंद्र गोयनका से जुड़े मामले की सुनवाई से स्वयं को अलग (Recuse) कर लिया। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पारदीवाला ने मामले पर असंतोष व्यक्त करते हुए टिप्पणी की, इस केस में कौन हैं महेंद्र गोयनका, जिसके बाद उन्होंने इस प्रकरण की सुनवाई करने से इंकार कर दिया। अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय की किसी अन्य उपयुक्त पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किए जाने की संभावना जताई जा रही है।
महेंद्र गोयनका, जो रायपुर निवासी बताए जाते हैं और पूर्व में मध्यप्रदेश के विधायक संजय पाठक के परिवार से जुड़ी कंपनियों में कार्यरत रहे हैं, इन दिनों कथित वित्तीय अनियमितताओं, जालसाजी और धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा में हैं। जानकारी के अनुसार, गोयनका यूरो प्रतीक इस्पात इंडिया प्राइवेट लिमिटेड में एक महत्वपूर्ण प्रबंधकीय पद पर कार्यरत रहे हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये के कथित वित्तीय घोटाले, कंपनी के बिके हुए माल की कथित अवैध बिक्री तथा फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से कंपनियों पर नियंत्रण स्थापित करने जैसे मामलों में उनका नाम सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, कोलकाता में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 120बी सहित अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।
इसके अतिरिक्त कटनी, मध्यप्रदेश में भी गोयनका एवं उनके सहयोगियों के विरुद्ध धारा 420, 120B, 467, 468 और 471 के तहत दो अलग-अलग आपराधिक प्रकरण दर्ज बताए जा रहे हैं। जानकारी यह भी सामने आई है कि उनके कुछ सहयोगियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं सर्वोच्च न्यायालय से निरस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद संबंधित आरोपी पिछले डेढ़ से दो वर्षों से फरार बताए जा रहे हैं और अब तक गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। मामले को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक संरक्षण के आरोप भी चर्चा में हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि महेंद्र गोयनका को कुछ प्रभावशाली राजनीतिक व्यक्तियों और अधिकारियों का समर्थन प्राप्त रहा है। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से उनकी निकटता रही है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी क्रम में कांग्रेस से जुड़े कुछ व्यक्तियों के माध्यम से जनहित याचिकाएं (PIL) दायर कराने और विभिन्न शासकीय विभागों में शिकायतें करवाकर व्यावसायिक गतिविधियों को प्रभावित करने के आरोप भी लगाए गए हैं।
सूत्रों के अनुसार, मुंबई स्थित राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (NCLT) के 9 मई 2025 के एक आदेश में महेंद्र गोयनका एवं उनकी पत्नी मीनू गोयनका से संबंधित वित्तीय गड़बड़ियों पर टिप्पणियां दर्ज होने की बात कही जा रही है। वहीं उनकी एक अन्य कंपनी निसर्ग इस्पात में भी कथित वित्तीय अनियमितताओं और धन के हेरफेर को लेकर चर्चाएं तेज हैं। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई नई पीठ के समक्ष होने की संभावना है और इस पूरे प्रकरण पर कानूनी एवं राजनीतिक हलकों की नजर बनी हुई है।