कोरजा सरपंच सोमवती कोल का ‘कोल’ अनुसूचित जनजाति प्रमाण पत्र निरस्त, उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने लिया बड़ा फैसला

0

गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही / नवा रायपुर:

छत्तीसगढ़ शासन की उच्च स्तरीय प्रमाणीकरण छानबीन समिति (आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान, नवा रायपुर) ने ग्राम पंचायत कोरजा (विकासखंड गौरेला, जिला गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही) की सरपंच श्रीमती सोमवती कोल का ‘कोल’ अनुसूचित जनजाति (ST) प्रमाण पत्र अवैध पाते हुए तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। समिति ने पाया कि वे अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित संवैधानिक लाभ प्राप्त करने की पात्रता नहीं रखती हैं। 

 

मामले की पृष्ठभूमि और जांच रिपोर्ट

शिकायत एवं जांच: जिला स्तरीय जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही द्वारा मामला उच्च स्तरीय छानबीन समिति को भेजा गया था। इसके बाद सतर्कता प्रकोष्ठ (विजिलेंस सेल) ने मामले की विस्तृत पड़ताल की। 

 

दस्तावेजों का अभाव: सतर्कता प्रकोष्ठ की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि धारक द्वारा राष्ट्रपति अधिसूचना (06 सितंबर 1950) से पूर्व का ऐसा कोई भी वैध दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो सके कि उनके पूर्वज उस समय से छत्तीसगढ़ में निवासरत थे और उनकी जाति कोल थी। प्रस्तुत किए गए कई दस्तावेज मध्य प्रदेश (अनूपपुर जिले) से संबंधित पाए गए। 

 

सुनवाई से अनुपस्थिति: समिति द्वारा सोमवती कोल को कारण बताओ नोटिस जारी करने के साथ-साथ 21 जुलाई 2026 और 07 अगस्त 2026 को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर प्रदान किया गया, परंतु वे समिति के समक्ष उपस्थित नहीं हुईं। वहीं, शिकायतकर्ता उपस्थित रहे और उन्होंने अपने साक्ष्य प्रस्तुत किए। 

 

उच्च स्तरीय समिति का फैसला

सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों एवं छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग (सामाजिक प्रास्थिति के प्रमाणीकरण का विनियमन) अधिनियम, 2013 के तहत गठित उच्च स्तरीय छानबीन समिति (अध्यक्षता: श्री सोनमणि बोरा, प्रमुख सचिव) ने एसडीएम पेंड्रारोड द्वारा 20 मई 2020 को जारी जाति प्रमाण पत्र को विधि-सम्मत न मानते हुए रद्द कर दिया है।

 

आगे की कानूनी कार्रवाई के निर्देश

समिति ने अधिनियम 2013 के नियम 23(3) एवं 24(1) के तहत नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत गौरेला तथा कलेक्टर, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही को अधिकृत एवं निर्देशित किया है। कलेक्टर को 3 माह के भीतर कार्रवाई प्रतिवेदन राज्य शासन को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

 

जाति प्रमाण पत्र निरस्त होने के बाद अब सरपंच पद पर भी कानूनी तलवार लटक गई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed