छत्तीसगढ़ के सरकारी कर्मचारियों को बड़ी राहत: अब सूचीबद्ध अस्पतालों में मिलेगा कैशलेस इलाज, शासन ने जारी किए दिशा-निर्देश

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रायपुर/गौरेला-पेंड्रा-मरवाही। छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य के शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में बड़ी राहत देते हुए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के लिए दिशा-निर्देश 2026 जारी कर दिए हैं। लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा 3 नवंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार अब पात्र सरकारी कर्मचारी और उनके आश्रित सूचीबद्ध अस्पतालों में ई-हेल्थ कार्ड के माध्यम से कैशलेस उपचार की सुविधा प्राप्त कर सकेंगे।

 

इस व्यवस्था को लागू करने का निर्णय 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित मंत्रिपरिषद की बैठक में लिया गया था। शासन का उद्देश्य चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति की लंबी और जटिल प्रक्रिया से कर्मचारियों को राहत दिलाना तथा इलाज के दौरान तत्काल आर्थिक बोझ कम करना है।

 

ई-हेल्थ कार्ड होगा अनिवार्य

 

जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार पात्र शासकीय कर्मचारियों की पहचान Employee ID के आधार पर की जाएगी, जबकि आश्रित परिवार के सदस्यों का सत्यापन आधार नंबर एवं अन्य आवश्यक दस्तावेजों के माध्यम से संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारी (DDO) द्वारा किया जाएगा। पात्रता की जांच और अनुमोदन के बाद ई-हेल्थ कार्ड जारी किया जाएगा। इस कार्ड के जारी होने के बाद ही कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ लिया जा सकेगा।

 

सूचीबद्ध अस्पतालों में नहीं करना होगा भुगतान

 

योजना के तहत पात्र हितग्राही सूचीबद्ध अस्पतालों में ई-हेल्थ कार्ड के माध्यम से कैशलेस उपचार करा सकेंगे। अस्पताल में निर्धारित पैकेज के अंतर्गत उपचार के लिए मरीज को भुगतान नहीं करना होगा। हालांकि निर्धारित CGHS पैकेज से अधिक की अतिरिक्त सुविधाएं लेने पर उसका खर्च कर्मचारी को स्वयं वहन करना पड़ेगा।

 

IPD इलाज शामिल, OPD पहले की तरह प्रतिपूर्ति के दायरे में

 

दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि इस योजना के अंतर्गत अस्पताल में भर्ती होकर कराया जाने वाला उपचार (IPD) शामिल होगा। वहीं सामान्य ओपीडी (OPD) उपचार की सुविधा पहले की तरह छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (चिकित्सा परिचर्या) नियम, 2013 के तहत चिकित्सा व्यय प्रतिपूर्ति के माध्यम से मिलती रहेगी।

 

CGHS दरों के आधार पर तय होगी उपचार सीमा

 

उपचार की अधिकतम सीमा केंद्र सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं (CGHS) द्वारा बी-1 श्रेणी के शहरों के लिए निर्धारित पैकेज अथवा वास्तविक व्यय, जो भी कम हो, उसके आधार पर तय होगी। निर्धारित सीमा से अधिक खर्च होने पर अतिरिक्त राशि कर्मचारी को स्वयं वहन करनी होगी।

 

24 घंटे शिकायत दर्ज कराने की सुविधा

 

योजना के सुचारू संचालन के लिए 24×7 टोल-फ्री कॉल सेंटर और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल स्थापित करने का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से ई-हेल्थ कार्ड, इलाज की उपलब्धता, अस्पतालों में आने वाली समस्याओं, प्री-ऑथराइजेशन और भुगतान संबंधी शिकायतों का निराकरण किया जाएगा।

 

NIC और राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के IT प्लेटफॉर्म का होगा उपयोग

 

योजना के पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (NHA) के IT प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा। इसमें लाभार्थियों के पंजीयन के लिए BIS, अस्पतालों के पंजीयन के लिए HEM 2.0 तथा उपचार की पूर्व स्वीकृति, क्लेम प्रोसेसिंग और भुगतान के लिए TMS 2.0 मॉड्यूल का इस्तेमाल किया जाएगा।

 

अलग सेल का होगा गठन

 

योजना के संचालन के लिए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को नोडल विभाग बनाया गया है। वहीं स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय के अधीन एक पृथक प्रबंधन सेल गठित किया जाएगा। चिकित्सा दावों की जांच और भुगतान प्रक्रिया के लिए थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA) की सेवाएं भी ली जा सकेंगी।

 

समयबद्ध क्रियान्वयन की कार्ययोजना अलग से जारी होगी। फिलहाल शासन ने योजना के संचालन और क्रियान्वयन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कर्मचारियों के लिए ई-हेल्थ कार्ड पंजीयन एवं अन्य प्रक्रियाओं की समय-सीमा अलग से निर्धारित की जाएगी।

 

हाल ए हलचल न्यूज | छत्तीसगढ़

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