नगर निगम उपयंत्री पर 4% कमीशन का आरोप, 6.65 लाख देने का दावा, अब 5.50 लाख और ब्याज की कथित मांग 21 अगस्त की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप, 1 सितंबर को दोबारा सौंपा आवेदन, शिकायत के 11 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं

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नगर निगम उपयंत्री पर 4% कमीशन का आरोप, 6.65 लाख देने का दावा, अब 5.50 लाख और ब्याज की कथित मांग
21 अगस्त की शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं होने का आरोप, 1 सितंबर को दोबारा सौंपा आवेदन, शिकायत के 11 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं


कटनी।। नगर निगम कटनी में सरकारी कार्यों के बिलों के भुगतान के एवज में कथित कमीशनखोरी के आरोपों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर निगम में ठेकेदारी का काम करने वाले एक ठेकेदार चंद्रेश शुक्ला ने उपयंत्री पवन श्रीवास्तव के खिलाफ पुलिस अधीक्षक को शिकायत देकर आरोप लगाया है कि उसके सरकारी कार्यों के बिलों के भुगतान के बदले कथित तौर पर 4 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। ठेकेदार का दावा है कि लगातार दबाव के चलते उसने लाखों रुपये दिए, लेकिन अब उससे दोबारा बड़ी रकम की मांग की जा रही है।
मामले में खास बात यह है कि शिकायतकर्ता ने 21 अगस्त 2026 को भी आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन उसके अनुसार आज तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उसने 1 सितंबर 2026 को फिर पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपकर जांच और कार्रवाई की मांग की है।
4 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक वह पिछले करीब दस वर्षों से नगर निगम एवं पीडब्ल्यूडी विभाग में ठेकेदारी का कार्य करता आ रहा है। उसका आरोप है कि वर्ष 2023-24 से किए गए उसके कई सरकारी कार्यों के बिलों के भुगतान के लिए संबंधित उपयंत्री द्वारा कथित रूप से 4 प्रतिशत कमीशन की मांग की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कमीशन नहीं देने पर बिलों के भुगतान को लेकर दबाव बनाया गया। ठेकेदार का दावा है कि इस कथित मांग का सिलसिला बाद में नियमित आर्थिक भुगतान तक पहुंच गया।
35 हजार रुपये प्रतिमाह देने का दावा
ठेकेदार ने शिकायत में दावा किया है कि अक्टूबर 2024 से अप्रैल 2026 तक उससे 35 हजार रुपये प्रतिमाह की राशि ली गई। शिकायतकर्ता के अनुसार इस अवधि में करीब 6 लाख 65 हजार रुपये की रकम दी गई। आरोप है कि बाद में इसी रकम को ब्याज बताते हुए लगभग 5.50 लाख रुपये मूलधन के रूप में मांगने का दबाव बनाया गया। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि उससे 8 से 10 प्रतिशत ब्याज की मांग की जा रही थी।
धमकी और बिल रोकने के आरोप भी
शिकायत में ठेकेदार ने आरोप लगाया है कि उसके बिलों को जानबूझकर रोका गया और भुगतान प्रक्रिया में बाधा डाली गई। इसके अलावा सार्वजनिक रूप से अपमानित करने तथा रकम नहीं देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की कथित धमकी दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि लगातार आर्थिक एवं मानसिक दबाव के कारण वह परेशान है और इसी वजह से उसने पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है।
11 दिन में कार्रवाई क्यों नहीं
इस पूरे मामले में अब सबसे बड़ा सवाल 21 अगस्त की शिकायत से 1 सितंबर तक की कार्रवाई को लेकर है। क्या पहली शिकायत पर जांच शुरू हुई, क्या संबंधित बिलों और भुगतान फाइलों को खंगाला गया,क्या कथित लेन-देन की जांच की गई, क्या शिकायतकर्ता और संबंधित अधिकारी के बयान लिए गए,अगर जांच हुई तो उसका परिणाम क्या रहा
संबंधित उपयंत्री पवन श्रीवास्तव से उनके दूरभाष क्रमांक 7000270463 पर जब इस संबंध मे बात की गई तो उनका कहना हैं की अभी इस विषय को लेकर उनके पास कोई भी जांच संबंधित कागज नही प्राप्त हुआ हैं इसलिए इस संबंध मे अभी कुछ नही कह सकूंगा। हालांकि इस विषय पर
नगर निगम प्रशासन का पक्ष नही आया हैं। यदि जांच में शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं, तो मामला केवल एक ठेकेदार और अधिकारी के बीच विवाद का नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी बिलों के भुगतान में पारदर्शिता और नगर निगम की भ्रष्टाचार-रोधी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करेगा।

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