अधिकारी गायब, कुत्ता हाजिर! कांग्रेस ने कहा- जब साहब नहीं मिले तो शेरू ही सही…”

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शहडोल। ब्यौहारी नगर परिषद में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और जनसमस्याओं को लेकर कांग्रेस का विरोध प्रदर्शन उस समय अनोखे और चर्चा के केंद्र में आ गया, जब अपनी 13 सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपने पहुंचे कांग्रेस नेताओं को कोई जिम्मेदार अधिकारी ही नहीं मिला। काफी देर तक इंतजार, नारेबाजी और धरना-प्रदर्शन के बावजूद जब तहसीलदार सहित कोई सक्षम अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा, तो नाराज कांग्रेसियों ने प्रशासन के खिलाफ ऐसा विरोध दर्ज कराया जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में हो रही है।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ब्यौहारी द्वारा नगर परिषद क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं, विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर आमसभा एवं विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के बाद कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता अपना ज्ञापन प्रशासन को सौंपने नगर परिषद कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां उन्हें कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं मिला।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि जनता की समस्याओं को लेकर प्रशासन पूरी तरह उदासीन बना हुआ है। काफी देर तक अधिकारियों का इंतजार करने के बाद कार्यकर्ताओं ने नगर परिषद कार्यालय के सामने धरना शुरू कर दिया और जिला प्रशासन तथा पुलिस प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

धरने के दौरान कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि कोई अधिकारी ज्ञापन लेने नहीं आया तो वे किसी आवारा कुत्ते को ही ज्ञापन सौंप देंगे। जब लंबे इंतजार के बाद भी कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा, तो कांग्रेसियों ने अपनी चेतावनी को अमल में बदल दिया। कार्यकर्ताओं ने एक आवारा कुत्ते को पकड़कर उसके गले में ज्ञापन लगाया और प्रतीकात्मक रूप से उसे प्रशासन का प्रतिनिधि मानते हुए ज्ञापन सौंप दिया।

इस अनोखे विरोध प्रदर्शन को देखने बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए। देखते ही देखते यह घटनाक्रम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने इसे प्रशासनिक उदासीनता पर करारा व्यंग्य बताया तो कुछ ने इसे लोकतांत्रिक विरोध का अनोखा तरीका कहा।

ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ब्यौहारी के अध्यक्ष सत्येंद्र त्रिपाठी ने कहा कि जब जनता की समस्याएं सुनने और ज्ञापन लेने तक कोई अधिकारी तैयार नहीं है, तब कांग्रेस को मजबूर होकर यह प्रतीकात्मक विरोध करना पड़ा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समस्याओं का समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

फिलहाल ब्यौहारी में “ज्ञापन वाले कुत्ते” की चर्चा अधिकारियों से ज्यादा हो रही है और प्रशासन की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में नजर आ रही है।

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