मरीजों की सेहत से खिलवाड़? चिल्हारी में नियम विरुद्ध पैथोलॉजी संचालन के आरोप, स्वास्थ्य विभाग पर उठे सवाल

(जय प्रकाश शर्मा)मानपुर। जनपद पंचायत मानपुर के ग्राम चिल्हारी में संचालित एक पैथोलॉजी लैब को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के अभाव में नियमों के विपरीत पैथोलॉजी संचालन का कार्य जारी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के मरीज आर्थिक शोषण के साथ-साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों का भी सामना कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, चिल्हारी स्थित सेवा पैथोलॉजी में खून सहित विभिन्न प्रकार की जांचें की जा रही हैं। आरोप है कि लैब का संचालन निर्धारित मानकों और नियमों के अनुरूप नहीं हो रहा है, जबकि संबंधित विभाग इस मामले में कार्रवाई करने के बजाय मौन बना हुआ है।
मरीजों पर बढ़ रहा आर्थिक बोझ
ग्रामीणों का कहना है कि कई निजी चिकित्सकों द्वारा मरीजों को आवश्यकता से अधिक पैथोलॉजी जांच कराने के लिए प्रेरित किया जाता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। आरोप है कि कुछ मामलों में ऐसी जांचें भी कराई जाती हैं जिनकी तत्काल आवश्यकता नहीं होती।
योग्यता और पंजीयन पर सवाल
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कुछ पैथोलॉजी केंद्र निर्धारित योग्यता और मान्यता प्राप्त विशेषज्ञों की निगरानी के बिना संचालित हो रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ स्थानों पर अन्य चिकित्सकों की डिग्रियों के आधार पर लैब संचालन किया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
क्या कहते हैं नियम?
स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रावधानों के अनुसार पैथोलॉजी लैब का संचालन निर्धारित मानकों एवं आवश्यक अनुमतियों के साथ किया जाना चाहिए। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट की गुणवत्ता और विश्वसनीयता सीधे मरीज के उपचार को प्रभावित करती है, इसलिए नियमों का पालन अनिवार्य है।
जिम्मेदारों की चुप्पी
ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित पैथोलॉजी केंद्रों और झोलाछाप चिकित्सा गतिविधियों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। इस संबंध में जब सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानपुर के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया तो उनका पक्ष प्राप्त नहीं हो सका।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग से चिल्हारी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सभी पैथोलॉजी लैबों की जांच कराने, वैध दस्तावेजों का सत्यापन करने तथा नियमों के उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित संचालकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।