राघवेंद्र पटेल हत्याकांड: न्यायालय ने दो दोषियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा

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गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही: द्वितीय अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश, पेण्ड्रारोड (जिला बिलासपुर, छ.ग.), श्रीमती ज्योति अग्रवाल की अदालत ने 22 जून 2026 को राघवेंद्र पटेल हत्याकांड (सत्र प्रकरण क्रमांक-26/2021) में अपना अंतिम निर्णय सुनाया है।

 

न्यायालय ने दो आरोपियों को हत्या, साक्ष्य छिपाने और आपराधिक षडयंत्र का दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा से दंडित किया है। वहीं, एक आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया है। इस प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से सरकारी वकील कौशल सिंह ने पैरवी की।

 

घटना का विवरण

अभियोजन के अनुसार, यह घटना 14 जून 2021 और 15 जून 2021 के मध्य थाना-मरवाही के अंतर्गत ग्राम-उजवनडांड श्रृंगारबहरा में घटित हुई थी। आरोपियों ने आपस में मिलकर राघवेंद्र पटेल की हत्या करने का आपराधिक षडयंत्र रचा था।

आरोपियों ने सामान्य आशय के तहत मृतक का गमछे से गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी थी। अपराध को छिपाने और साक्ष्य नष्ट करने के उद्देश्य से आरोपियों ने मृतक के शव पर पेट्रोल डालकर उसे जला दिया था।

 

इस प्रकरण में एक अन्य अभियुक्त काजल कुमार मन्ना भी शामिल है, जो फरार है और उसके संबंध में प्रकरण लंबित रखा गया है।

 

न्यायालय का निर्णय एवं दण्डादेश

न्यायालय ने साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर विचारण पूर्ण करते हुए निम्नलिखित निर्णय दिए हैं:

 

संतोष चौधरी: अभियुक्त संतोष चौधरी को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302, 201 सहपठित धारा 34 एवं 120बी के आरोपों से साक्ष्य के अभाव में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त (बरी) कर दिया गया है।

 

ऋषि रैदास और रविशंकर श्रीवास्तव: न्यायालय ने इन दोनों अभियुक्तों को पूर्व मित्रता के बावजूद क्षणिक लालच में की गई हत्या का दोषी माना है।

 

न्यायालय ने दोनों दोषियों को भारतीय दण्ड संहिता की धारा 302 (सहपठित धारा 34) के तहत आजीवन कारावास और 2000-2000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।

 

अर्थदंड की राशि अदा न करने पर दोनों को 3-3 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।

 

साक्ष्य विलोपित करने (धारा 201 सहपठित धारा 34) के अपराध में दोनों दोषियों को 3-3 वर्ष के कठोर कारावास और 1000-1000 रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।

 

आपराधिक षडयंत्र (धारा 120 बी) के तहत भी दोनों को आजीवन कारावास और 2000-2000 रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया है।

 

न्यायालय के आदेशानुसार, दोषियों की ये सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।

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