30 मिनट से बंद रेलवे फाटक, जिंदगी बनी इंतजार की मोहताज!
गोरखपुर रेलवे फाटक पर एम्बुलेंस भी फंसी, वर्षों से ओवरब्रिज/अंडरब्रिज की मांग के बावजूद समाधान नहीं — आखिर कब तक जनता की जान से खिलवाड़?
गौरेला। जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही के गौरेला क्षेत्र अंतर्गत ग्राम गोरखपुर स्थित रेलवे फाटक एक बार फिर आम लोगों के लिए परेशानी और चिंता का सबब बना हुआ है। मंगलवार को करीब 30 मिनट तक रेलवे फाटक बंद रहने के दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। इसी दौरान तस्वीरों में एक 108 एम्बुलेंस भी फाटक के आसपास खड़ी नजर आई, जो मरीज को लेने के लिए जा रही थी।
यह महज कुछ मिनटों का इंतजार नहीं, बल्कि उस व्यवस्था पर गंभीर सवाल है जिसमें एक रेलवे फाटक बंद होने से मरीज की जिंदगी, आम नागरिकों का समय और आपातकालीन सेवाएं तक प्रभावित हो सकती हैं।
एम्बुलेंस फंसे तो जिम्मेदार कौन?
रेलवे फाटक बंद होने के दौरान यदि किसी गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचाने वाली एम्बुलेंस को रास्ता नहीं मिलता है और कुछ मिनटों की देरी मरीज की जान पर भारी पड़ जाए, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी?
तस्वीरें साफ तौर पर बताती हैं कि फाटक बंद होने के दौरान आम दोपहिया वाहन, राहगीर और अन्य वाहन चालक इंतजार करने को मजबूर हैं। ऐसे में आपातकालीन वाहन के लिए वैकल्पिक सुरक्षित और त्वरित मार्ग की व्यवस्था होना बेहद जरूरी है।
वर्षों से उठ रही ओवरब्रिज-अंडरब्रिज की मांग
स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधियों द्वारा लंबे समय से इस रेलवे फाटक पर ओवरब्रिज अथवा अंडरब्रिज निर्माण की मांग उठाई जाती रही है। इसके बावजूद समस्या का स्थायी समाधान अब तक धरातल पर दिखाई नहीं देता।
हर बार फाटक बंद होता है और सड़क पर वाहनों की कतार लगती है। लोग कुछ देर इंतजार करते हैं, ट्रेन गुजरती है और फाटक खुल जाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या प्रशासन इसी तरह किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
पहले भी सामने आ चुकी हैं दर्दनाक घटनाएं
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस रेलवे फाटक और आसपास के रेल मार्ग पर पूर्व में ट्रेन की चपेट में आकर लोगों की जान जाने जैसी घटनाएं सामने आती रही हैं। वहीं लोगों का यह भी कहना है कि फाटक बंद होने के कारण आपात स्थिति में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है।
यदि किसी मरीज को अस्पताल पहुंचने में देरी होती है और उसकी स्थिति बिगड़ती है, तो यह केवल यातायात की समस्या नहीं रह जाती, बल्कि सीधे तौर पर जनजीवन और स्वास्थ्य सुरक्षा का सवाल बन जाती है।
रेल विभाग और शासन-प्रशासन से तीखे सवाल
आखिर गोरखपुर रेलवे फाटक की समस्या का स्थायी समाधान कब होगा?
क्या रेलवे विभाग ने यहां ROB/अंडरब्रिज की आवश्यकता का गंभीरता से सर्वेक्षण कराया है?
आपातकालीन स्थिति में 108 एम्बुलेंस के लिए क्या वैकल्पिक मार्ग की व्यवस्था है?
फाटक बंद होने से होने वाले जाम और मरीजों की परेशानी की जिम्मेदारी कौन लेगा?
क्या प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही कार्रवाई करेगा?
स्थानीय जनता की वर्षों पुरानी मांग पर अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
गोरखपुर रेलवे फाटक अब केवल एक फाटक नहीं, बल्कि व्यवस्था की परीक्षा बन चुका है। हर बार ट्रेन आने पर फाटक बंद होता है और सड़क पर जिंदगी थम जाती है। सवाल यह नहीं कि फाटक कितनी देर बंद रहा—सवाल यह है कि अगर उस इंतजार में किसी की जिंदगी चली गई तो उसकी भरपाई कौन करेगा?
जनता को आश्वासन नहीं, अब चाहिए स्थायी समाधान
स्थानीय लोगों की मांग है कि शासन-प्रशासन और रेल विभाग संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर ओवरब्रिज या अंडरब्रिज निर्माण की प्रक्रिया तत्काल शुरू करें, ताकि भविष्य में एम्बुलेंस, स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, मरीजों और आम नागरिकों को रेलवे फाटक के कारण जान जोखिम में डालकर इंतजार न करना पड़े।
अब वक्त आश्वासन का नहीं, कार्रवाई का है। क्योंकि रेलवे फाटक बंद होने के दौरान होने वाली देरी सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि मरीजों और आम जनता की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है