हरिहर तीर्थ को नई पहचान दे रहे संजय पाठक, रामभक्ति के प्रणेता बाबा सत्यनारायण मौर्य पहुंचे स्थल,सराहा प्रकल्प,सोच से साकार हो रहा आध्यात्मिक स्वप्न,देशभर की हस्तियों का बढ़ रहा जुड़ाव
हरिहर तीर्थ को नई पहचान दे रहे संजय पाठक, रामभक्ति के प्रणेता बाबा सत्यनारायण मौर्य पहुंचे स्थल,सराहा प्रकल्प,सोच से साकार हो रहा आध्यात्मिक स्वप्न,देशभर की हस्तियों का बढ़ रहा जुड़ाव
कटनी।। अयोध्या में भव्य श्री रामलला मंदिर निर्माण के बाद देशभर में आस्था और श्रद्धा का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। इसी क्रम में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान जन-जन में जोश भरने वाले प्रसिद्ध नारे रामलला हम आएंगे, मंदिर वहीं बनाएंगे के प्रणेता बाबा सत्यनारायण मौर्य का हरिहर तीर्थ आगमन क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बन गया।
विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक के विशेष आमंत्रण पर बाबा सत्यनारायण मौर्य हरिहर तीर्थ के निर्माणाधीन स्थल पहुंचे, जहां उन्होंने दिव्य प्रकल्प का अवलोकन किया। उनके साथ भारतीय प्रतिमा विज्ञान के प्रख्यात विशेषज्ञ एवं मूर्तिकार श्री दिनेश शर्मा भी उपस्थित रहे। दोनों ही विभूतियों का विधायक श्री पाठक ने आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें तीर्थ की परिकल्पना, निर्माण कार्यों की प्रगति एवं इसके सांस्कृतिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी।
इस अवसर पर विधायक संजय पाठक ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि हरिहर तीर्थ केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि यह भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का एक जीवंत केंद्र बनेगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की प्रेरणा से निर्मित यह तीर्थ क्षेत्र आने वाले समय में लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र बनेगा।
श्री पाठक ने आगे कहा कि इस तीर्थ के निर्माण से न केवल धार्मिक चेतना का विस्तार होगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास को भी नई दिशा मिलेगी। उन्होंने बताया कि तीर्थ से जुड़ी गतिविधियों जैसे प्रसाद, फूल, परिवहन एवं होटल उद्योग से हजारों लोगों को स्वरोजगार के अवसर प्राप्त होंगे, जिससे विजयराघवगढ़ क्षेत्र की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। बाबा सत्यनारायण मौर्य ने भी इस दिव्य प्रकल्प की सराहना करते हुए इसे राष्ट्र जागरण और सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का सशक्त माध्यम बताया। वहीं मूर्तिकार दिनेश शर्मा ने तीर्थ की कलात्मक एवं स्थापत्य दृष्टि से इसे अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए अपने सुझाव भी साझा किए। हरिहर तीर्थ में इस प्रकार का आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संगम क्षेत्र को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यहां विकसित हो रहा यह भव्य प्रकल्प आने वाले समय में श्रद्धा, कला और संस्कृति का अद्वितीय केंद्र बनकर उभरेगा।