कागजों में हो रहा स्कूल का संचालन

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पाण्डेय शिक्षा समिति ने किया अपनों को उपकृत

8 करोड़ 30 लाख का लगाया शासन को चूना, जांच की मांग

शहडोल। आदिवासी जाति कल्याण विभाग से अनुदान प्राप्त संस्था पाण्डेय शिक्षा समिति सतना को पांचवे वेतनमान के एरियस के रूप में 8.32 करोड़ रुपए का फर्जी भुगतान का मामला प्रकाश में आया है। एरियस की मोटी राशि कर्मचारियों के खाते में न डालते हुए समिति के दो अलग-अलग खातों में 31 535 45 81 45/एसबीआईएन 0006053 (बाणसागर देवलोंद) राशि 43225819 एवं खाता क्रमांक 50301465690, इलाहाबाद 0211513 (इलाहाबाद बैंक मरजाद्पुर जिला सतना) राशि 1 2505722, 23 मार्च को जिला कोषालय से सांठ-गांठ कर अंतरित कराए गए। उक्त भुगतान में समिति से कोई इनकम टैक्स ना काटते हुए शासन को आयकर से होने वाली आय में करोड़ों रुपए की हेराफेरी की गई ।
झोलाछाप डॉक्टर को किया फर्जी भुगतान
समिति द्वारा संचालित संस्थाओं में कार्यरत नहीं होने के बाद भी समिति व्यवस्थापक के करीबी रिश्तेदार होने के नाते लाखो रुपए का फर्जी भुगतान कराया गया, इनमें से कुछ कर्मचारी विगत कई वर्षों से विदेश में निवासरत है। समिति व्यवस्थापक शिव प्रसाद पांडे सेवानिवृत्त प्राध्यापक की आरएस कालेज रीवा के सगे चचेरे भाई मनीष कुमार पांडे जो विगत 20 वर्षों से भी अधिक समय से अमरकंटक में अपना स्वयं का किलनिक संचालित कर वहीं निवासरत है, ऐसे झोलाछाप डॉक्टर को भी समिति व्यवस्थापक की कृपा से रुपए 1036557 का फर्जी भुगतान कराया गया है।
रिश्तेदारों को पहुंचाया लाभ
संस्था में 1995 से कार्यरत आदिवासी महिला शिक्षिका श्रीमती नान बाई पठारी जो वर्ष 2010 से शासनाधीन संस्था में नियुक्त की, एरियस के रूप में केवल 27,406 जबकि उसी अवधि के लिए दूसरी सामान्य महिला शिक्षिका श्रीमती भारती पांडे , जो व्यवस्थापक की सगी रिश्तेदार है, उनको 378759 का भुगतान कराया गया। व्यवस्थापक द्वारा जहां एक ओर अपने सगे रिश्तेदार व करीबियो को 05 लाख से 11 लाख तक भुगतान कराया गया है, वहीं दूसरी ओर उसी पद व अवधि में कार्यरत अन्य कर्मचारियों को केवल कुछ हजार से लेकर 01 लाख तक की ही एरियस राशि का भुगतान कराया गया है । सूत्रों की माने तो व्यवस्थापक द्वारा कर्मचारियों से उनके एरियस राशि में से भी 50 प्रतिशत राशि की मांग की गई।
बिना काम के हुआ भुगतान
समिति द्वारा जिले में संचालित किसी भी संस्था में कभी भी कार्य नहीं होने के बावजूद श्रीमती अनीता पांडे को 911501 रूपये, श्रीमती किरण सिंह बघेल को 173511, श्रीमती कल्याणी सिंह को 312172, पुरुषोत्तम पाठक को 1078311 रूपये, अशोक कुमार सोनी को 409545 रुपये का फर्जी भुगतान कराते हुए आदिवासी बच्चों की शिक्षा में लगने वाले पैसों का बंदरबांट किया गया। आदिवासी बच्चों की शिक्षा में लगने वाली शासकीय राशि के इस खेल में समिति व्यवस्थापक के साथ विगत कई वर्षों से जिला स्तर से लेकर भोपाल स्तर तक के बाबू एवं अधिकारियों की मिलीभगत से प्रति वर्ष शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया है।
शासन को लगाया अरबों का चूना
पांडेय शिक्षा समिति एवं आदिवासी सेवक संघ के कर्ताधर्ता एक ही व्यक्ति प्रोफेसर प्रसाद पांडे हैं, चर्चा है कि कथित व्यक्ति द्वारा अपना मायाजाल फैला कर विगत कई वर्षों से जिले में संचालित राज्य एवं केंद्रीय प्रवृत्ति की अलग-अलग संस्थाओं में उन्हीं कर्मचारियों कार्यरत दर्शाते हुए राज्य एवं केंद्र सरकार से पृथक-पृथक करोड़ों रुपए का अनुदान दिया जा रहा है, वह अपने सगे रिश्तेदारों के खातों में अब तक करोड़ों रुपए जमा कराते हुए शासन को अरबों रुपए का चूना लगाया जा चुका है।
कागजों में संचालित कार्यालय
समिति द्वारा जिला कार्यालय के अनुदान एवं छात्रावास शाखा के बाबुओं की मिलीभगत से ग्राम घोरसा, जयसिंहनगर में आवासीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय टिहकी परिसर में ही आदिवासी बालक छात्रावास टिहकी जो कई वर्षों तक केवल कागजों में संचालित किया जा कर शासन को करोड़ों रुपए का चूना लगाया गया है। इस मामले में कितनी सच्चाई है, यह जांच के बाद ही सामने आ सकता है।
इनका कहना है…
8 करोड़ 30 लाख का पाण्डेय शिक्षा समिति को एरियस भुगतान किया गया है, फोन पर अधिक जानकारी नहीं दी जा सकती, मिलने पर ही डिटेल देखा जा सकता है।
एम.एस. अंसारी
तात्कालीन प्रभारी सहायक आयुक्त
आदिम जाति कल्याण विभाग, शहडोल
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अभी पिछले सप्ताह ही हमें सहायक आयुक्त का प्रभार मिला है, देखकर ही कुछ बताया जा सकता है।
रंजीत सिंह धुर्वे
प्रभारी सहायक आयुक्त
आदिम जाति कल्याण विभाग, शहडोल

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