स्कूल बंद, फिर भी खुल रहे आंगनबाड़ी केंद्र—भीषण गर्मी में नौनिहालों की सेहत से खिलवाड़?”

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11 बजे छुट्टी के समय चरम पर रहती है गर्मी, जिम्मेदारी तय करने की मांग”

बिलासपुर/ बेलगहना

बेलगहना। भीषण गर्मी और लू के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए शासन-प्रशासन ने 20 मई से स्कूलों में अवकाश घोषित कर विद्यार्थियों को राहत देने का निर्णय लिया है। लेकिन इसके विपरीत आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन जारी है, जहां छोटे-छोटे नौनिहालों को भीषण गर्मी के बीच बुलाया जा रहा है और सुबह 11 बजे छुट्टी दी जा रही है—जब गर्मी अपने चरम पर होती है।

कोमल शरीर वाले इन मासूम बच्चों पर इसका क्या असर पड़ रहा होगा, इसका सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। हैरानी की बात यह है कि महिला एवं बाल विकास विभाग इस गंभीर मुद्दे को नजरअंदाज करता नजर आ रहा है। विभागीय आदेशों के पालन में आंगनबाड़ी केंद्र खुले तो हैं, लेकिन बच्चों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता दिखाई नहीं दे रही है।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल को आंगनबाड़ी केंद्र केकराडीह में बच्चों को उल्टी, दस्त और बुखार की शिकायत हुई थी, जिसे लू लगने से जोड़कर देखा गया था। इसके बावजूद विभाग द्वारा इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए जाना लापरवाही को दर्शाता है।

इस संबंध में महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी सुरेश सिंह ने बताया कि राज्य सरकार के आदेश के अनुसार ही निर्णय लिया जाता है और इस संबंध में प्रस्ताव भेजा जाएगा। ऐसे में सवाल उठता है कि जब तक प्रस्ताव पर निर्णय होगा, तब तक क्या नौनिहाल इसी तरह गर्मी में परेशान होते रहेंगे?

आंगनबाड़ी में दर्ज बच्चों के अभिभावकों ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए कलेक्टर बिलासपुर से तत्काल राहत देने की मांग की है।

 

जहां खुद सुपरवाइजर और परियोजना अधिकारियों से कार्यालय नही छूट रहा, वहां बच्चों को उस भीषड़ गर्मी में आंगनबाड़ी जाना पड़ रहा है।

 

सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप शर्मा ने छोटे बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश की मांग की है।

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