छोटे वाहनों पर सख्ती, सरकारी खाद लदे ओवरलोड ट्रकों पर क्यों बरती गई नरमी लमतरा क्षेत्र में 7 से 8 टन तक अतिरिक्त भार का दावा, तीन ट्रकों पर 54 हजार रुपये का स्पॉट फाइन,कार्रवाई की निष्पक्षता पर उठे सवाल
छोटे वाहनों पर सख्ती, सरकारी खाद लदे ओवरलोड ट्रकों पर क्यों बरती गई नरमी
लमतरा क्षेत्र में 7 से 8 टन तक अतिरिक्त भार का दावा, तीन ट्रकों पर 54 हजार रुपये का स्पॉट फाइन,कार्रवाई की निष्पक्षता पर उठे सवाल
कटनी।। यातायात पुलिस की कार्रवाई को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। मामला लमतरा क्षेत्र का है, जहां झुकेही रैक पॉइंट से शहडोल की ओर सरकारी खाद लेकर जा रहे तीन ट्रकों को ओवरलोडिंग के आरोप में रोका गया। आरोप है कि दस्तावेजों में दर्ज क्षमता की तुलना में इन ट्रकों में 7 से 8 टन तक अतिरिक्त माल लदा हुआ था। हालांकि, कार्रवाई के दौरान सामने आए कथित ढुलमुल रवैये ने स्थानीय स्तर पर विवाद को जन्म दे दिया है।
मामला उस समय अधिक चर्चा में आ गया, जब ट्रकों में सरकारी खाद होने को लेकर कार्रवाई में नरमी बरतने का सवाल उठा। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि कोई वाहन निर्धारित क्षमता से अधिक भार लेकर सड़क पर चल रहा है, तो उसमें सरकारी सामग्री होने के आधार पर नियमों में छूट कैसे दी जा सकती है।
बताया जा रहा है कि शुरुआती स्तर पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठने के बाद मामला तूल पकड़ गया। इसके बाद यातायात पुलिस ने तीनों ट्रकों पर क्रमशः 17 हजार, 18 हजार और 19 हजार रुपये का स्पॉट फाइन लगाया। इस प्रकार तीनों वाहनों से कुल 54 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया।
लेकिन जुर्माना लगाए जाने के बाद भी कई सवाल अब भी बने हुए हैं। यदि ट्रकों में वास्तव में निर्धारित सीमा से 7 से 8 टन अतिरिक्त भार था, तो क्या केवल स्पॉट फाइन लगाकर वाहनों को आगे जाने देना पर्याप्त कार्रवाई माना जा सकता है।
स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि यातायात पुलिस छोटे लोडिंग वाहनों के ओवरलोड पाए जाने पर तत्काल सख्त कार्रवाई करती है और कई मामलों में भारी जुर्माने एवं न्यायालयीन कार्रवाई का सामना करना पड़ता है। वहीं, भारी वाहनों में कई टन अतिरिक्त माल होने के आरोप के बावजूद कार्रवाई को लेकर अलग मापदंड अपनाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि झुकेही रैक पॉइंट और निवार क्षेत्र से सरकारी खाद एवं खाद्यान्न का परिवहन लंबे समय से निर्धारित क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों के माध्यम से किया जाता रहा है। निर्धारित क्षमता से अधिक माल लादने पर ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक लाभ हो सकता है, जबकि ओवरलोड वाहन सड़क सुरक्षा के लिए खतरा बनने के साथ-साथ सड़कों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारी वाहनों की ओवरलोडिंग को दुर्घटनाओं और सड़क क्षति के प्रमुख कारणों में भी गिना जाता है