जब हादसा हुआ तब जागा सिस्टम..न फायर एनओसी….न सुरक्षा इंतज़ाम… फिर किसके भरोसे…..खुल गया कटनी का ‘फायर सेफ्टी घोटाला 15 स्कूल-अस्पताल बच्चों और लोगों की जान से कर रहे थे खिलवाड़….निगम की कार्रवाई से मचा हड़कंप 10 लाख का जुर्माना
जब हादसा हुआ तब जागा सिस्टम..न फायर एनओसी….न सुरक्षा इंतज़ाम… फिर किसके भरोसे…..खुल गया कटनी का ‘फायर सेफ्टी घोटाला
15 स्कूल-अस्पताल बच्चों और लोगों की जान से कर रहे थे खिलवाड़….निगम की कार्रवाई से मचा हड़कंप 10 लाख का जुर्माना
29 अप्रैल को डीएवी स्कूल में लगी आग केवल एक हादसा नहीं थी, बल्कि पूरे प्रशासनिक सिस्टम के मुंह पर तमाचा थी। कंप्यूटर रूम जलकर खाक हुआ, स्कूल में अफरा-तफरी मची, बच्चे दहशत में भागे और तब जाकर प्रशासन को याद आया कि शहर के कई स्कूल और संस्थान बिना फायर सेफ्टी इंतज़ामों के खुलेआम चल रहे हैं। शहर के 14 स्कूलों और एक अस्पताल में फायर सेफ्टी एनओसी तक नहीं मिली। न फायर ऑडिट, न इमरजेंसी एग्जिट की तैयारी, न पर्याप्त अग्निशमन यंत्र और न ही किसी आपदा से निपटने का सिस्टम। हैरानी की बात यह है कि जिन भवनों में रोज हजारों बच्चे पढ़ने जाते हैं, वहां सुरक्षा के नाम पर केवल खानापूर्ति चलती रही।
कटनी।। डीएवी स्कूल में लगी आग ने केवल एक कंप्यूटर रूम नहीं जलाया, बल्कि शहर की लापरवाह सुरक्षा व्यवस्था की परतें भी खोल दीं। सवाल यह है कि अगर आग कुछ मिनट और भड़क जाती, अगर बच्चे क्लासरूम में फंस जाते, अगर दमकल देर से पहुंचती… तो क्या कटनी एक बड़े हादसे का गवाह बन चुका होता? इसी डरावने सच के बाद नगर निगम प्रशासन हरकत में आया है। शहर के 14 स्कूलों और एक अस्पताल में फायर सेफ्टी इंतज़ाम नहीं मिलने पर करीब 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है और सात दिन के भीतर फायर प्लान अप्रूवल कराने के निर्देश दिए गए हैं। चेतावनी साफ है नियम नहीं माने तो भवन बंद होंगे। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब वर्षों से ये संस्थान बिना फायर एनओसी के चल रहे थे तब जिम्मेदार विभाग क्या कर रहा था?
बच्चों की जान भगवान भरोसे?
कटनी में संचालित कई बड़े स्कूलों में न तो पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर मिले, न आपातकालीन निकासी व्यवस्था, न नियमित फायर ड्रिल और न ही सुरक्षा ऑडिट। जिन इमारतों में हर दिन हजारों बच्चे पढ़ने जाते हैं, वहां सुरक्षा इंतज़ाम कागजों में सिमटे रहे। डीएवी स्कूल की आग ने यह साबित कर दिया कि शहर का शिक्षा तंत्र पढ़ाई से ज्यादा जोखिम के बीच संचालित हो रहा है।
आज कार्रवाई हुई है, लेकिन यदि हादसा पहले हो जाता तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेता? प्रशासनिक सिस्टम पर भी उठे सवाल
नगर निगम ने जिन संस्थानों पर कार्रवाई की है, उनमें कई पुराने और बड़े स्कूल शामिल हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि आखिर बिना फायर सेफ्टी अप्रूवल के इन संस्थानों का संचालन वर्षों तक कैसे चलता रहा? क्या शिक्षा विभाग, नगर निगम और फायर विभाग के बीच समन्वय केवल कागजों तक सीमित था? यदि समय रहते निरीक्षण और सख्ती होती, तो शायद डीएवी जैसी घटना चेतावनी बनकर सामने नहीं आती।
केवल जुर्माना नहीं, अब चाहिए सुरक्षा अभियान
गणमान्य नागरिकों एवं बुद्धिजीवियों और बच्चों के अभिभावकों का कहना है कि सिर्फ जुर्माना लगाने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। जरूरत है शहर के सभी स्कूलों, अस्पतालों और कोचिंग संस्थानों का संयुक्त सुरक्षा ऑडिट,हर तीन महीने में अनिवार्य फायर ड्रिल,बच्चों और स्टाफ को आपदा प्रशिक्षण, भवन अनुमति और फायर एनओसी की सार्वजनिक मॉनिटरिंग, नियम तोड़ने वाले संस्थानों की मान्यता पर कार्रवाई
इन संस्थानों पर हुई कार्रवाई
निगम प्रशासन द्वारा जिन संस्थानों पर कार्रवाई की गई है उनमें विष्णु वेद सरस्वती स्कूल, शासकीय तिलक महाविद्यालय, किड्स केयर स्कूल, अनामिका एकेडमी, डायमंड इंग्लिश मीडियम स्कूल, शासकीय कन्या महाविद्यालय, बार्डस्ले सीनियर सेकंडरी स्कूल, लाइम सिटी इंटरनेशनल स्कूल, नालंदा पब्लिक स्कूल, लाला मथुरादास शिक्षा समिति, बारडोली महाविद्यालय, कुंदन दास हायर सेकंडरी स्कूल, कटनी डिग्री कॉलेज, सेक्रेड हार्ट स्कूल एवं बाबा माधव शाह चिकित्सालय शामिल हैं।
अभिभावकों के मन में अब एक ही सवाल है,क्या हमारे बच्चे स्कूल पढ़ने जा रहे हैं या खतरे के बीच बैठने,डीएवी की आग एक चेतावनी थी। अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो अगली खबर सिर्फ जुर्माने की नहीं, किसी बड़े हादसे की हो सकती है।