पंचायत विभाग का फरमान: अब पेशा मोबिलाइजर होंगे बाहर, हजारों युवाओं के भविष्य पर संकट

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शहडोल। पंचायत राज संचालनालय, मध्यप्रदेश द्वारा जारी एक आदेश ने शहडोल समेत प्रदेश के कई आदिवासी जिलों में कार्यरत पेशा मोबिलाइजर्स की चिंता बढ़ा दी है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आरजीएसए योजना 31 मार्च 2026 को समाप्त हो चुकी है, इसलिए ग्राम पंचायतों के माध्यम से चयनित पेशा मोबिलाइजर्स की सेवाएं अब निरंतर जारी रखना संभव नहीं है।
जारी पत्र में शहडोल, उमरिया, अनूपपुर, डिंडोरी, मंडला समेत प्रदेश के कई आदिवासी बहुल जिलों के जिला पंचायत सीईओ को निर्देशित किया गया है कि ग्राम पंचायतों को तत्काल प्रभाव से पेशा मोबिलाइजर्स को सेवामुक्त करने की सूचना दी जाए।
पत्र में यह भी उल्लेख है कि केंद्र सरकार से आगामी दिशा-निर्देश मिलने के बाद आगे की स्थिति स्पष्ट की जाएगी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब तक नया निर्णय नहीं आता, तब तक इन युवाओं का क्या होगा?
गांव-गांव में काम, लेकिन भविष्य अधर में
पेशा मोबिलाइजर्स  ग्राम सभाओं, पंचायत बैठकों, योजनाओं के प्रचार-प्रसार और ग्रामीणों को जागरूक करने का काम कर रहे थे। कई युवाओं ने इसे स्थायी रोजगार मानकर अपनी पूरी ऊर्जा इसी कार्य में लगा दी। अब अचानक सेवामुक्ति के आदेश ने उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है।
योजना खत्म हुई या जिम्मेदारी?
हालांकि विभागीय पत्र योजना समाप्त होने का हवाला देता है, लेकिन सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जिन युवाओं से  पंचायत व्यवस्था को मजबूत करने का काम लिया गया, उनके पुनर्वास या वैकल्पिक रोजगार को लेकर कोई स्पष्ट रोडमैप क्यों नहीं बनाया गया?
ग्रामीण क्षेत्रों में काम कर चुके कई मोबिलाइजर्स का कहना है कि उन्हें समय पर मानदेय तक नहीं मिला और अब बिना किसी सुरक्षा के बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है। कुछ जगहों पर यह भी चर्चा है कि पंचायतें अब अपने स्तर पर काम संभालने में कठिनाई महसूस करेंगी, क्योंकि कई योजनाओं का जमीनी समन्वय यही कर्मचारी कर रहे थे।
अब सभी की नजर केंद्र और राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी है कि क्या इन युवाओं को दोबारा मौका मिलेगा या फिर योजना समाप्त के साथ उनका भविष्य भी फाइलों में बंद हो जाएगा।

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