स्वच्छ सर्वेक्षण पर मंडरा सकता है खतरा, निगम अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही से बिगड़ सकती है शहर की तस्वीर
स्वच्छ सर्वेक्षण पर मंडरा सकता है खतरा, निगम अधिकारियों-कर्मचारियों की लापरवाही से बिगड़ सकती है शहर की तस्वीर
कटनी।। नगर निगम एक ओर स्वच्छ सर्वेक्षण 2025-26 में शहर को अव्वल स्थान दिलाने के दावे कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहर की जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। नगर निगम सीमा के कई वार्डों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा चुकी है। कचरे के ढेर, जाम नालियां, बदबू और गंदगी से परेशान जनता अब निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने लगी है। शहर को स्वच्छ और सुंदर बनाने के दावे करने वाले अधिकारी और कर्मचारी खुद अपनी जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते दिखाई दे रहे हैं।
स्थिति यह है कि कई वार्डों में नियमित कचरा उठाव तक नहीं हो पा रहा। नालियों की सफाई अधूरी पड़ी है और चूहों के कारण नालियों में मिट्टी भराव की समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। लोगों द्वारा बार-बार शिकायतें किए जाने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। जनता का आरोप है कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजों में सफाई दिखाकर उच्च अधिकारियों को गुमराह कर रहे हैं, जबकि धरातल पर हालात बेहद खराब हैं।
नगर निगम द्वारा लगातार समीक्षा बैठकें आयोजित की जा रही हैं, लेकिन उनका असर शहर में कहीं दिखाई नहीं दे रहा। निगमायुक्त सुश्री तपस्या परिहार ने हाल ही में स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियों को लेकर विस्तृत समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि यदि व्यवस्था सही चल रही थी तो फिर स्वास्थ्य अधिकारी सहित कई वार्ड दरोगाओं को नोटिस जारी करने की नौबत क्यों आई। इससे साफ जाहिर होता है कि निगम के अंदर सफाई व्यवस्था को लेकर भारी लापरवाही बरती जा रही है।
बैठक के दौरान स्वास्थ्य अधिकारी संजय सोनी सहित कई वार्ड दरोगाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे और नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। यह कार्रवाई इस बात का प्रमाण है कि नगर निगम खुद अपनी व्यवस्थाओं से संतुष्ट नहीं है। बावजूद इसके अब तक जिम्मेदार कर्मचारियों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे कर्मचारियों में जवाबदेही का अभाव साफ दिखाई देता है।
शहर के कई इलाकों में गंदगी और अव्यवस्थाओं का आलम यह है कि स्वच्छ सर्वेक्षण की तैयारियां केवल दिखावे तक सीमित नजर आ रही हैं। निगम करोड़ों रुपये खर्च कर रहा है, लेकिन सफाई व्यवस्था में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा। जनता का कहना है कि अधिकारी केवल सर्वेक्षण के समय सफाई का दिखावा करते हैं, जबकि बाकी दिनों में वार्डों की हालत भगवान भरोसे छोड़ दी जाती है।
एक ओर नगर निगम आयुक्त सुश्री तपस्या परिहार और महापौर श्रीमती प्रीति संजीव सूरी नगरवासियों से स्वच्छ सर्वेक्षण में सकारात्मक फीडबैक देने और शहर को अव्वल स्थान दिलाने की अपील कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर निगम के अधिकारी और कर्मचारी अपनी लापरवाही से पूरे अभियान पर पानी फेरते नजर आ रहे हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब शहर में मूलभूत सफाई व्यवस्था ही दुरुस्त नहीं है तो आखिर जनता किस आधार पर सकारात्मक फीडबैक दे।
नगर निगम द्वारा नागरिक सहभागिता और जनजागरूकता की बातें जरूर की जा रही हैं, लेकिन जब लोगों को अपने ही मोहल्लों में गंदगी, जाम नालियां और कचरे के ढेर दिखाई दे रहे हों तो स्वच्छता अभियान पर भरोसा कमजोर पड़ना स्वाभाविक है। वार्ड स्तर पर मॉनिटरिंग के निर्देश भी केवल बैठकों और फाइलों तक सीमित दिखाई दे रहे हैं। यदि जल्द ही सफाई व्यवस्था में वास्तविक सुधार नहीं हुआ और जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की गई तो स्वच्छ सर्वेक्षण में बेहतर रैंकिंग का सपना अधूरा रह सकता है। नगर निगम की लापरवाही और जमीनी स्तर पर कमजोर कार्यप्रणाली शहर की छवि पर भारी पड़ सकती है।