बण्डा की घटना के बाद सतर्कता जरूरी, कार्रवाई के साथ स्थायी निगरानी भी हो
बण्डा की घटना के बाद सतर्कता जरूरी, कार्रवाई के साथ स्थायी निगरानी भी हो
कटनी।। सागर जिले के बण्डा में जहरीली शराब की घटना ने एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता की निगरानी को लेकर प्रशासन कितना सजग है। ऐसी घटनाएं केवल कुछ लोगों की लापरवाही का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि वे पूरे निगरानी तंत्र की परीक्षा भी होती हैं। यही वजह है कि बण्डा की घटना के बाद कटनी जिला प्रशासन का सतर्क होना और आबकारी विभाग द्वारा जिले की शासकीय मदिरा दुकानों की सघन जांच तथा विभिन्न ब्रांडों के नमूने परीक्षण के लिए भेजना स्वागत योग्य कदम है।
कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर आबकारी अमले द्वारा पिछले दो दिनों से जिले की अलग-अलग मदिरा दुकानों का निरीक्षण कर नमूने एकत्र किए जा रहे हैं। इन नमूनों को प्रयोगशाला में गुणवत्ता परीक्षण के लिए भेजा जाना इस बात का संकेत है कि प्रशासन किसी भी आशंका को नजरअंदाज करने के मूड में नहीं है। यह जरूरी भी है, क्योंकि शराब जैसी वस्तु में गुणवत्ता से जुड़ी छोटी-सी चूक भी किसी व्यक्ति के जीवन पर भारी पड़ सकती है।
हालांकि, किसी घटना के बाद कुछ दिनों तक चलने वाली जांच से आगे बढ़कर इसे नियमित और संस्थागत निगरानी व्यवस्था का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। नमूने लिए जाएं, उनकी जांच हो और यदि कहीं गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन मिलता है तो कार्रवाई भी स्पष्ट और समयबद्ध तरीके से सामने आए। प्रशासनिक सतर्कता का असली मूल्य तभी है, जब वह लगातार बनी रहे और उसका असर जमीन पर दिखाई दे।
इस पूरे मामले का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू अवैध और मिलावटी शराब का खतरा है। शासकीय दुकानों पर गुणवत्ता की निगरानी के साथ-साथ जिले में अवैध शराब के निर्माण, परिवहन और बिक्री पर भी लगातार नजर रखना जरूरी है। यदि कहीं नकली या अवैध शराब का नेटवर्क सक्रिय है तो केवल लाइसेंसी दुकानों की जांच पर्याप्त नहीं होगी। आबकारी विभाग और पुलिस को ऐसे संभावित स्रोतों पर भी प्रभावी कार्रवाई करनी होगी। शराब की बोतलों पर अंकित क्यूआर कोड को लेकर विभाग की ओर से नागरिकों को जागरूक करना भी सकारात्मक पहल है। उपभोक्ता खरीदारी के समय क्यूआर कोड स्कैन कर मैन्युफैक्चरिंग कंपनी, बिक्री वाले जिले और निर्माण तिथि जैसी जानकारियों की पुष्टि कर सकते हैं। लेकिन यह भी ध्यान रखना होगा कि हर उपभोक्ता तकनीकी जानकारी से पूरी तरह परिचित हो, यह जरूरी नहीं है। इसलिए दुकानों पर भी ग्राहकों को आवश्यक जानकारी देने और संदिग्ध उत्पाद की बिक्री रोकने की जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। आम नागरिकों की भूमिका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है। शराब के स्वाद, गंध या रंग में असामान्य बदलाव दिखाई दे तो उसका सेवन करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में स्वयं प्रयोग करने के बजाय तत्काल संबंधित विभाग को सूचना देना ही समझदारी है। प्रशासन द्वारा शिकायत के लिए जिला आबकारी कार्यालय का दूरभाष क्रमांक 07622-231217 जारी किया गया है। ऐसे हेल्पलाइन नंबरों की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचना भी जरूरी है।
बण्डा की घटना ने खतरे की ओर ध्यान खींचा है, लेकिन कटनी को केवल प्रतिक्रिया देने वाला जिला नहीं, बल्कि रोकथाम की मिसाल बनने की जरूरत है। सघन जांच, नियमित सैंपलिंग, प्रयोगशाला रिपोर्ट की समय पर समीक्षा, अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई और उपभोक्ता जागरूकता इन सभी मोर्चों पर समान रूप से काम होना चाहिए।
प्रशासन की मौजूदा सक्रियता निश्चित रूप से भरोसा जगाती है। अब आवश्यकता इस बात की है कि यह सक्रियता किसी एक घटना की प्रतिक्रिया बनकर न रह जाए। शराब की गुणवत्ता और नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा यह अभियान लगातार चलता रहे, तभी कहा जा सकेगा कि बण्डा जैसी त्रासदी से कटनी ने केवल सबक नहीं लिया, बल्कि उससे बचाव का मजबूत तंत्र भी तैयार किया है।
कटनी।। सागर जिले के बण्डा में जहरीली शराब की घटना ने एक बार फिर यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि शराब की बिक्री और उसकी गुणवत्ता की निगरानी को लेकर प्रशासन कितना सजग है। ऐसी घटनाएं केवल कुछ लोगों की लापरवाही का परिणाम नहीं होतीं, बल्कि वे पूरे निगरानी तंत्र की परीक्षा भी होती हैं। यही वजह है कि बण्डा की घटना के बाद कटनी जिला प्रशासन का सतर्क होना और आबकारी विभाग द्वारा जिले की शासकीय मदिरा दुकानों की सघन जांच तथा विभिन्न ब्रांडों के नमूने परीक्षण के लिए भेजना स्वागत योग्य कदम है।