जर्जर आंगनबाड़ी परियोजना कार्यालय हादसे को दे रहा न्योता, छत से झांक रहा सरिया

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प्लास्टर झड़ने से भवन की दीवारों और छत की हालत बदतर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा; वर्षों से शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी!

 

गौरेला। गौरेला विकासखंड के एकीकृत बाल विकास परियोजना अधिकारी कार्यालय की हालत इन दिनों बेहद जर्जर हो चुकी है। भवन की स्थिति देखकर ऐसा प्रतीत होता है मानो जिम्मेदार विभाग किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा हो। कार्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार की छत से लेकर अंदर के कमरों तक प्लास्टर पूरी तरह झड़ चुका है। कई स्थानों पर छत का कांक्रीट उखड़ने से लोहे का सरिया साफ दिखाई देने लगा है।

 

भवन के सामने बने छज्जे की हालत भी बेहद खराब है। यहां सीमेंट-कांक्रीट उखड़कर गिर रही है और सरिया बाहर निकल आया है। वहीं भवन की बाहरी दीवारों का प्लास्टर भी जगह-जगह से झड़ चुका है, जिसके कारण ईंटें दिखाई देने लगी हैं। पूरे भवन की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि यहां काम करने वाले कर्मचारियों और कार्यालय पहुंचने वाले लोगों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

कभी भी हो सकती है अप्रिय घटना

 

कार्यालय की जर्जर हालत को देखते हुए यहां किसी भी समय अप्रिय घटना होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। छत और छज्जे से लगातार कांक्रीट एवं प्लास्टर झड़ना किसी बड़े हादसे का संकेत है। ऐसे में कार्यालय में प्रतिदिन आने वाले कर्मचारियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है।

 

वर्षों से जानकारी, फिर भी मरम्मत का इंतजार

 

विभागीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार भवन की यह स्थिति लंबे समय से बनी हुई है। भवन की मरम्मत एवं निर्माण कार्य के लिए उच्च अधिकारियों को पत्राचार किए जाने के साथ मौखिक रूप से भी अवगत कराया गया है। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई और भवन की हालत जस की तस बनी हुई है।

 

क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?

 

महिला एवं बाल विकास विभाग से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों का संचालन इसी कार्यालय से होता है। इसके बावजूद कार्यालय भवन की ऐसी बदहाल स्थिति विभागीय व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े करती है। सवाल यह है कि जब जिम्मेदार अधिकारियों को भवन की जर्जर स्थिति की जानकारी पहले से है, तो अब तक मरम्मत अथवा नए भवन की व्यवस्था क्यों नहीं की गई?

 

अब आवश्यकता है कि जिला प्रशासन और महिला एवं बाल विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल भवन का निरीक्षण कराएं। सुरक्षा की दृष्टि से आवश्यक कदम उठाते हुए मरम्मत अथवा नए भवन निर्माण की स्वीकृति प्रदान करें, ताकि किसी संभावित दुर्घटना से पहले कर्मचारियों और आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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