कलेक्टर साहब का यह एहसान उनका परिवार जिंदगी भर नहीं उतार पाएंगा -प्रेम नौकरी में दवा कंपनी बताकर लड़के- लड़कियों के ग्रुप बनाने का दिया काम लक्ष्मी के पिता प्रेम कहते हैं, कि कलेक्टर की मदद की वजह से ही मेरी बेटी घर वापस आ सकी

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कलेक्टर साहब का यह एहसान उनका परिवार जिंदगी भर नहीं उतार पाएंगा -प्रेम
नौकरी में दवा कंपनी बताकर लड़के- लड़कियों के ग्रुप बनाने का दिया काम
लक्ष्मी के पिता प्रेम कहते हैं, कि कलेक्टर की मदद की वजह से ही मेरी बेटी घर वापस आ सकी

 

कटनी॥ उत्तर प्रदेश के महोबा जिले में निजी कंपनी के चंगुल में मुश्किल परिस्थितियों में फंसी कटनी के बड़वारा के ग्राम झांपी की बेटी लक्ष्मी गौड़ को घर वापस लाने में कलेक्टर अवि प्रसाद एक बार फिर सहायक हुए। लक्ष्मी के पिता प्रेम सिंह कहते हैं, कि कलेक्टर की मदद की वजह से ही आज मेरी बेटी घर वापस आ सकी और बेटी के आने से घर में खुशियां आ गई। इस संबंद्ध मे झांपी निवासी प्रेम सिंह ने बताया कि उनकी बेटी महोबा जिले के निजी कंपनी में काम करने गई थी। लेकिन उसे नौकरी में दवा कंपनी बताकर लड़के-लड़कियों के ग्रुप बनाने का काम दिया गया। खाने को खाना और रहने को हॉस्टल तो दिया था, लेकिन आजादी नहीं थी। घर वालों से बात करने पर भी नजर रखी जाती थी। किसी तरह से लक्ष्मी ने पिता प्रेम सिंह को वस्तुस्थिति बताई तो प्रेम सिंह ने कंपनी के सुपरवाइजर सत्येंद्र सिंह के मोबाइल पर बात कर बेटी को घर भेजने का आग्रह किया। लेकिन लक्ष्मी को घर वापस भेजने में आनाकानी की जा रही थी। ऐसे में प्रेम सिंह ने सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम के माध्यम से कलेक्टर अवि प्रसाद तक मामले की जानकारी पहुंचाई। इसके तत्काल बाद कलेक्टर श्री प्रसाद ने महोबा जिला प्रशासन से संवाद किया और लक्ष्मी की रविवार को घर वापसी संभव हो सकी है। लक्ष्मी के पिता ने कहा कि कलेक्टर साहब का यह एहसान उनका परिवार जिंदगी भर नहीं उतार पाएंगे। कलेक्टर साहब के बारे में जैसा लोगों से सुना था, कि वे दीन-दुखियों की मदद करते हैं। उन्हें मैंने सच में वैसा ही पाया मेरे परिवार में खुशियां वापस लाने में कलेक्टर साहब की जितनी भी तारीफ करें कम है। वहीं सांसद प्रतिनिधि पद्मेश गौतम ने कहा कि, वास्तव में लक्ष्मी को घर वापस लाने में कलेक्टर श्री प्रसाद ने त्वरित रुप से जो संवेदनशीलता दिखाई और मानवीय पहल की। उसी की वजह से बिटिया लक्ष्मी की घर वापसी हो पाई।

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