ग्राम पंचायत कंचनपुर में अव्यवस्था चरम पर, जिम्मेदारों की चुप्पी से बढ़ रहा जनआक्रोश
शासन के निर्धारित समय का नहीं पालन, अधिकारी भी अनदेखी में लीन
सुधीर यादव (9407070722)
शहडोल। जिला मुख्यालय से सटे ग्राम पंचायत कंचनपुर में अव्यवस्था और लापरवाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन विवादों में रहने वाली यह पंचायत अपनी मनमानी और गैर-जिम्मेदाराना कार्यशैली के कारण ग्रामीणों के आक्रोश का केंद्र बनी हुई है। शासन द्वारा निर्धारित कार्य समय सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक पंचायत कार्यालय खोले जाने के स्पष्ट निर्देश हैं, लेकिन कंचनपुर पंचायत इन नियमों की निरंतर अवहेलना कर रही है। कार्यालय का समय से न खुलना और अधिकांश दिनों में बंद रहना यहां आम बात हो गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का दफ्तर ताले में लटका रहता है और इसका सीधा खामियाजा पूरे गांव को भुगतना पड़ता है। पंचायत से जुड़े प्रमाण पत्र, आय, निवास, पेंशन, निर्माण कार्य, मनरेगा और अन्य जरूरी कार्यों के लिए लोग घंटों पंचायत के चक्कर काटते हैं, परंतु उन्हें केवल “बाद में आना” या “अभी समय नहीं है” जैसे जवाब मिलते हैं। कई बार तो सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक निजी कार्यों का हवाला देकर लोगों को लौटा देते हैं।
ग्रामीण बताते हैं कि पंचायत के जिम्मेदारों की लापरवाही से वे मजबूरी में शहडोल मुख्यालय की शरण लेने को विवश हो जाते हैं। सरपंच के दरवाजे से लेकर सचिव और रोजगार सहायक के घरों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं। कई बार तो किसी एक कर्मचारी को पकड़ने में ही दो से तीन दिन निकल जाते हैं। इससे न सिर्फ समय और ऊर्जा की बर्बादी होती है, बल्कि गरीबी और मजदूरी पर निर्भर परिवारों को आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है।
आश्चर्य की बात यह है कि पंचायत की यह स्थिति किसी से छिपी नहीं है। शहडोल के वरिष्ठ अधिकारी भी इस पंचायत की मनमानी से भली-भांति परिचित हैं, लेकिन बावजूद इसके न तो कोई जांच की जाती है और न ही जिम्मेदारों पर कार्रवाई की जाती है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से शिकायतें की जा रही हैं, पर अधिकारी सिर्फ औपचारिकता निभाते हुए चुप्पी साधे रहते हैं। इससे पंचायत कर्मचारियों के हौसले बुलंद हैं और वे बिना किसी भय के नियम-कायदों को दरकिनार करते आ रहे हैं।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले में उच्च स्तरीय जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे सामूहिक रूप से कलेक्ट्रेट पहुंचकर धरना-प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि शासन द्वारा कार्यालय समय निर्धारण जनता की सुविधा के लिए किया गया है, लेकिन कंचनपुर पंचायत में यह व्यवस्था केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है।
जनता की मांग है कि पंचायत कार्यालय का नियमित निरीक्षण किया जाए, हाजिरी और उपस्थिति रजिस्टर की जांच हो तथा सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक की जवाबदेही तय की जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी ग्रामीण कार्य के लिए भटकने को मजबूर न हो। कंचनपुर की बदहाल पंचायत व्यवस्था न केवल प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है, बल्कि यह व्यवस्था हीनता का प्रतीक बन चुकी है।
यदि समय रहते प्रशासन ने सख्त कदम नहीं उठाए, तो यह समस्या केवल कंचनपुर तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि पूरे क्षेत्र में अविश्वास और विरोध की चिंगारी को जन्म दे सकती है। ग्रामीण अब निर्णायक कार्रवाई की प्रतीक्षा कर रहे हैं।