जंगल से जन-आजीविका तक: GPM के किशनलाल पुरी की प्रेरक उड़ान तेंदू फल से बनेगा रोजगार का स्वाद
हाल ए हलचल के लिए खोंगसरा से प्रदीप शर्मा की खास रिपोर्ट
*गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के किशनलाल पुरी का स्टार्टअप बना युवाओं के लिए प्रेरणा*
जीपीएम/ गौरेला – छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और जोहार पहुना फाउंडेशन के निदेशक किशनलाल पुरी आज उस सोच के प्रतीक बन चुके हैं, जो स्थानीय संसाधनों को वैश्विक अवसर में बदलने का साहस रखती है। उन्होंने छत्तीसगढ़ के साथ साथ
मध्यप्रदेश के बालाघाट जिले में आदिवासी समुदाय के साथ मिलकर कार्य करते हुए उन्होंने न सिर्फ एक स्टार्टअप खड़ा किया, बल्कि रोजगार, पर्यावरण और नवाचार—तीनों का संगम तैयार किया।
*“तेंदू फल पेय” – एक आइडिया, जो बन गया आंदोलन*
जंगलों में सहज उपलब्ध तेंदू फल, जिसे अक्सर कम उपयोगी माना जाता था, उसी को आधार बनाकर किशनलाल पुरी ने विकसित किया—
“तेंदू फल पेय (Tendu Fruit Beverage)”
उनका स्टार्टअप M/s Van Swaad LLP अब केवल एक बिजनेस नहीं, बल्कि
वनोपज आधारित अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला मॉडल बनता जा रहा है।
*राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान*
स्टार्टअप का चयन राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत
“प्रेरणा श्रेणी (Idea to Prototype)” में हुआ
₹5 लाख की ग्रांट-इन-एड स्वीकृत
200+ आवेदकों में से चयनित टॉप प्रतिभागियों में स्थान
नई दिल्ली में उच्च स्तरीय समिति के सामने सफल प्रस्तुतीकरण
यह उपलब्धि दर्शाती है कि ग्रामीण और वन क्षेत्र से भी विश्वस्तरीय नवाचार निकल सकते हैं।
इनक्यूबेशन से उद्यमिता तक
किशनलाल पुरी को जवाहर R-एग्री बिजनेस इनक्यूबेशन सेंटर में 30 दिनों का प्रशिक्षण मिला, जहां—
आइडिया को बिजनेस मॉडल में बदला गया
उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग और मार्केटिंग पर काम हुआ
विशेषज्ञों ने इसे बाजार के अनुरूप तैयार किया
यह पूरा सफर इस बात का उदाहरण है कि सही मार्गदर्शन मिल जाए, तो गांव का युवा भी स्टार्टअप लीडर बन सकता है।
*आदिवासी अंचल के लिए गेम चेंजर*
बालाघाट—जो मध्यप्रदेश का सर्वाधिक वन क्षेत्र वाला जिला है—वहां यह पहल कई स्तरों पर बदलाव लाएगी:
✔️ आर्थिक प्रभाव
तेंदू फल से स्थानीय खरीद और प्रोसेसिंग
आदिवासी परिवारों की आय में वृद्धि
युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार
✔️ सामाजिक प्रभाव
पलायन में कमी
स्थानीय कौशल और संसाधनों का सम्मान
सामुदायिक भागीदारी में वृद्धि
✔️ पर्यावरणीय प्रभाव
वनोपज के प्रति जागरूकता
जंगल संरक्षण को बढ़ावा
सतत (sustainable) आजीविका मॉडल
* *“लोकल से ग्लोबल” का सशक्त उदाहरण*
किशनलाल पुरी की यह पहल सिर्फ एक स्टार्टअप नहीं, बल्कि
👉 “Vocal for Local” और “Atmanirbhar Bharat” की जीवंत मिसाल है
उन्होंने यह सिद्ध कर दिया कि—
“जंगल की उपज सिर्फ जीविका नहीं, बल्कि समृद्धि का स्रोत बन सकती है।”
*सम्मान की ओर बढ़ते कदम*
उनके इस नवाचार और सामाजिक योगदान को देखते हुए अब वे
भारत सरकार द्वारा सम्मानित होने की दिशा में अग्रसर हैं
यह उपलब्धि न केवल उनके लिए, बल्कि
छत्तीसगढ़ (GPM) और मध्यप्रदेश (बालाघाट) दोनों राज्यों के लिए गर्व का विषय है।
प्रेरणा का संदेश
किशनलाल पुरी की कहानी हर उस युवा के लिए संदेश है जो संसाधनों की कमी को बाधा मानता है—
“जहां संसाधन सीमित हों, वहीं नवाचार जन्म लेता है।”
“स्थानीय सोच ही वैश्विक पहचान बनाती है।”