किताब-यूनिफॉर्म में नहीं चलेगी जबरदस्ती निजी स्कूलों की एकाधिकार नीति पर प्रहार, खुले बाजार से खरीदने की छूट….बड़ी राहत, पारदर्शिता की दिशा में प्रशासन का सख्त कदम
किताब-यूनिफॉर्म में नहीं चलेगी जबरदस्ती
निजी स्कूलों की एकाधिकार नीति पर प्रहार, खुले बाजार से खरीदने की छूट….बड़ी राहत, पारदर्शिता की दिशा में प्रशासन का सख्त कदम
कटनी।। नए शैक्षणिक सत्र से पहले जिला प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम न केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई है, बल्कि सामाजिक न्याय और उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। कलेक्टर आशीष तिवारी ने स्पष्ट निर्देश जारी कर निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर बनाए जाने वाले आर्थिक दबाव को समाप्त करने का संदेश दिया है।
अब जिले के किसी भी निजी विद्यालय को यह अधिकार नहीं होगा कि वह विद्यार्थियों या उनके अभिभावकों को किसी एक निश्चित दुकान से किताबें, यूनिफॉर्म या अन्य शैक्षणिक सामग्री खरीदने के लिए बाध्य करे। यह निर्णय सीधे तौर पर उन मध्यमवर्गीय और निम्न आय वर्ग के परिवारों को राहत देने वाला है, जो हर साल स्कूलों की निर्धारित दुकानों से महंगे दामों पर सामग्री खरीदने को मजबूर होते थे।
आर्थिक शोषण पर अंकुश, अभिभावकों को विकल्प की स्वतंत्रता
प्रशासन के इस फैसले से शिक्षा के क्षेत्र में व्याप्त एक लंबे समय से चली आ रही अनौपचारिक “मोनोपॉली” पर चोट पहुंची है। अभिभावकों को अब खुले बाजार से अपनी सुविधा और बजट के अनुसार सामग्री खरीदने की स्वतंत्रता मिलेगी, जिससे अनावश्यक आर्थिक बोझ कम होगा।
शिक्षा में समानता और पारदर्शिता की ओर कदम
कलेक्टर द्वारा जारी निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी स्कूलों को अपनी पुस्तक सूची और शुल्क संरचना सार्वजनिक करनी होगी। साथ ही कम से कम 5 दुकानों के विकल्प देना अनिवार्य किया गया है। यह व्यवस्था शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा को भी प्रोत्साहित करेगी, जिससे कीमतों में संतुलन बना रहेगा।
एनसीईआरटी पुस्तकों पर जोर: शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित
कक्षा 1 से 12 तक एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तकों का अनिवार्य उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश, शिक्षा की एकरूपता और गुणवत्ता बनाए रखने की दिशा में अहम कदम है। इससे निजी प्रकाशकों की महंगी किताबों पर निर्भरता भी कम होगी।
सख्ती के संकेत नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई तय
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि किसी भी स्कूल या विक्रेता द्वारा प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से दबाव बनाने की शिकायत मिलती है, तो उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। यह चेतावनी शिक्षा क्षेत्र में जवाबदेही तय करने की दिशा में एक मजबूत संकेत है। यह एक व्यापक सामाजिक सुधार का संकेत है जहां शिक्षा को व्यवसायिक लाभ के बजाय सेवा और समान अवसर के रूप में देखा जाए तो निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था अधिक न्यायपूर्ण और सुलभ बन सकेगी।