प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीमनाबाद जल सुरंग जल्द होगी पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

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प्रदेश की सबसे बड़ी स्लीमनाबाद जल सुरंग जल्द होगी पूर्ण: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
कटनी।। प्रदेश में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार को लेकर सरकार ने निर्माणाधीन परियोजनाओं को शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि लंबित कार्यों में आ रही प्रशासकीय एवं वित्तीय बाधाओं को दूर कर परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए, ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके। समत्व भवन में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण की 270वीं बैठक आयोजित हुई। इसके साथ ही नर्मदा नियंत्रण मंडल की 87वीं तथा नर्मदा बेसिन प्रोजेक्ट लिमिटेड के संचालक मंडल की 34वीं बैठक भी संपन्न हुई। बैठक में विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश की सबसे लंबी स्लीमनाबाद जल सुरंग टनल का लगभग 85 प्रतिशत कार्य पूर्ण हो चुका है। 11.952 किलोमीटर लंबी यह सुरंग आधुनिक तकनीक से निर्मित की जा रही है और इसके पूर्ण होते ही इसका शीघ्र उद्घाटन किया जाएगा। उन्होंने बरगी व्यपवर्तन परियोजना के कार्यों में तेजी लाने के प्रयासों की सराहना की।
दो वर्षों में बाधाएं दूर, सिंचाई क्षेत्र में रिकॉर्ड वृद्धि
बरगी व्यपवर्तन परियोजना, जिसे वर्ष 2008 में स्वीकृति मिली थी, प्रारंभिक वर्षों में अनेक बाधाओं से प्रभावित रही। किन्तु बीते दो वर्षों में प्रशासनिक एवं वित्तीय अड़चनों को दूर कर कार्यों में तेजी लाई गई है। मुख्यमंत्री एवं नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा सतत समीक्षा के चलते अब परियोजना तेजी से पूर्णता की ओर बढ़ रही है।
इस परियोजना के पूर्ण होने पर लगभग 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में हरित क्रांति का मार्ग प्रशस्त होगा। सुरंग का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग, रेलवे लाइन, भूमिगत संरचनाओं और आबादी क्षेत्रों के नीचे से सुरक्षित रूप से किया गया है। प्रभावित परिवारों को मुआवजा एवं पुनर्वास भी संवेदनशीलता के साथ प्रदान किया गया।
6 जिलों के 1450 गांवों को मिलेगा लाभ
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के अंतर्गत जबलपुर स्थित बरगी बांध से निकलने वाली 197 किलोमीटर लंबी मुख्य नहर प्रदेश की सबसे बड़ी 227 क्यूमेक क्षमता वाली नहर होगी। इससे जबलपुर, कटनी, सतना, मैहर, पन्ना और रीवा जिलों के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा प्राप्त होगी।
विंध्य पर्वत श्रृंखला की रिज लाइन को पार करना इस परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती रही, साथ ही उच्च भूजल स्तर जैसी समस्याएं भी सामने आईं। स्लीमनाबाद टनल के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान किया गया है। यह सुरंग बिना पंप के प्राकृतिक प्रवाह से नर्मदा जल को विशाल क्षेत्र तक पहुंचाएगी, जिससे ऊर्जा की भी बचत होगी।
बैठक में लिए गए महत्वपूर्ण निर्णय
बैठक में किसानों को अतिरिक्त सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से कई अहम निर्णय लिए गए—
सेल्दामाल माइक्रो लिफ्ट सिंचाई परियोजना को 42.95 करोड़ रुपए की स्वीकृति, खंडवा जिले के 4 गांवों में 1410 हेक्टेयर क्षेत्र लाभान्वित होगा।
दूधी सिंचाई परियोजना के कमांड क्षेत्र को 55,410 से बढ़ाकर 60,828 हेक्टेयर किया गया, संशोधित लागत 1925.06 करोड़ रुपए स्वीकृत।
खालवा उद्वहन माइक्रो लिफ्ट परियोजना में 37,490 हेक्टेयर तक विस्तार, 724.10 करोड़ रुपए की स्वीकृति।
बरगी व्यपवर्तन परियोजना को 7881.75 करोड़ रुपए की पुनरीक्षित स्वीकृति (2.45 लाख हेक्टेयर क्षेत्र)।
आईएसपी-कालिसिंध द्वितीय चरण के लिए 5985.46 करोड़ रुपए (1.10 लाख हेक्टेयर)।
आईएसपी-पावती चरण III एवं IV के लिए 5164.68 करोड़ रुपए (1,00,278 हेक्टेयर)।
बदनावर माइक्रो लिफ्ट एवं डोबी सिंचाई परियोजनाएं (सीहोर) को क्रमशः 1952.71 करोड़ एवं 275.57 करोड़ रुपए की स्वीकृति।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निर्णयों से प्रदेश में जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, सिंचाई क्षेत्र का विस्तार होगा और किसानों की आय में वृद्धि सुनिश्चित होगी। बैठक में जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट, राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, मुख्य सचिव अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव मुख्यमंत्री कार्यालय नीरज मंडलोई तथा अपर मुख्य सचिव जल संसाधन एवं नर्मदा घाटी डॉ. राजेश राजौरा सहित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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