ऑनलाइन चाकू, ऑफलाइन वारदात….खून, खौफ और खामोशी के साथ नाबालिग बन रहे हमलावर….. शंभू टॉकीज रोड पर चाकू का खेल, जांघ में धंसा ब्लेड बढ़ती वारदातों के बीच पुलिस घेरे में
ऑनलाइन चाकू, ऑफलाइन वारदात….खून, खौफ और खामोशी के साथ नाबालिग बन रहे हमलावर…..
शंभू टॉकीज रोड पर चाकू का खेल, जांघ में धंसा ब्लेड बढ़ती वारदातों के बीच पुलिस घेरे में
कटनी। शहर में अपराध का एक खतरनाक ट्रेंड तेजी से जड़ें जमा रहा है। चाकूबाजी अब अपवाद नहीं, बल्कि आम घटना बनती जा रही है। हर दूसरे-तीसरे हफ्ते सामने आ रही ऐसी वारदातें न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं, बल्कि यह भी बता रही हैं कि शहर का भविष्य किस दिशा में जा रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार आजाद चौक निवासी मोहित खटीक पिता राहुल खटीक पूल खेलकर घर लौट रहा था। तभी शनिमंदिर के आगे कुछ अज्ञात युवकों ने उसका रास्ता रोक लिया और विवाद करने लगे। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि आरोपियों ने चाकू निकालकर मोहित पर ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि चाकू का वार इतना गहरा था कि ब्लेड मोहित की जांघ में ही फंस गया। घटना के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। सूचना मिलते ही परिजन घायल युवक को तत्काल शासकीय जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने कड़ी मशक्कत के बाद चाकू बाहर निकाला। फिलहाल युवक का उपचार जारी है। घटना की सूचना पर कोतवाली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा, लेकिन लगातार बढ़ रही घटनाएं इन दावों की हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं,लेकिन सवाल वहीं खड़ा है आखिर शहर में ये हिंसा किस ओर इशारा कर रही है?
कोतवाली पुलिस जांच में, लेकिन सवालों के घेरे में भी
कोतवाली थाना पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और तलाश शुरू कर दी है। लेकिन क्या सिर्फ मामला दर्ज कर लेना ही काफी है? हर घटना के बाद यही स्क्रिप्ट दोहराई जाती है। FIR दर्ज,आरोपियों की तलाश,गिरफ्तारी का दावा फिर भी, चाकूबाजी की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं। ऐसे में पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना लाजिमी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन घटनाओं में नाबालिगों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ना कानून का डर, ना भविष्य की चिंता युवक खुलेआम चाकू लेकर घूम रहे हैं और मामूली विवाद पर जानलेवा हमला कर रहे हैं। आखिर इन नाबालिगों को चाकू मिल कैसे रहे हैं? कौन दे रहा है उन्हें यह हथियार जैसी मानसिकता?
क्लिक करो और हथियार पाओ
आज के डिजिटल दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने भी इस समस्या को और गंभीर बना दिया है। बिना किसी सख्त वेरिफिकेशन के धारदार हथियार जैसे चाकू आसानी से उपलब्ध,उम्र की कोई ठोस जांच नहीं,डिलीवरी सीधे घर तक यानी, अब अपराध के औजार जुटाना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है। इस पर ना तो ठोस नियम दिखते हैं, ना ही कोई प्रभावी निगरानी। हथियारों तक आसान पहुंच ने अपराध को और बढ़ावा दिया है।
यह कहना गलत नहीं होगा कि चाकूबाजी अब पुलिस के लिए एक नासूर बन चुकी है। कार्रवाई के बावजूद घटनाएं बढ़ना यह साफ दर्शाता है कि कहीं न कहीं रणनीति में कमी या क्रियान्वयन में ढील है।