अनुभवी शिक्षकों पर ‘योग्यता’ की तलवार: मानपुर में उभरा गुस्सा

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(जय प्रकाश शर्मा)
मानपुर। टीईटी को लेकर जारी नए आदेशों ने वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों के बीच गहरा असंतोष पैदा कर दिया है। मानपुर जनपद में शिक्षकों ने इस फैसले के खिलाफ खुलकर आवाज उठाई और सरकार से तत्काल राहत की मांग की।
अध्यापक शिक्षक संयुक्त मोर्चा, जिला उमरिया के बैनर तले, अध्यक्ष पवन चतुर्वेदी के निर्देशन और ब्लॉक अध्यक्ष अशोक गौतम के नेतृत्व में सैकड़ों शिक्षकों ने 11 अप्रैल को एसडीएम मानपुर को मुख्यमंत्री और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा।
शिक्षकों का कहना है कि उन्होंने 28 से 30 वर्षों तक पूरी निष्ठा से शिक्षा दी, गांवों में शिक्षा का दीप जलाया, लेकिन अब उन्हीं से दोबारा योग्यता साबित करने की मांग की जा रही है। इससे उनके आत्मसम्मान और भविष्य दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
शिक्षकों का बड़ा सवाल
जब हमने पूरी उम्र बच्चों को योग्य बनाया, तो आज हमें ही अयोग्य क्यों ठहराया जा रहा है? मोर्चा ने 2 मार्च और 26 मार्च को जारी आदेशों पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन्हें तत्काल निरस्त करने की मांग की है। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल कर शिक्षकों को राहत देने की बात कही गई है।
इसके अलावा, शिक्षकों ने नई संवर्ग व्यवस्था में पहली नियुक्ति से सेवा गणना करने की मांग भी उठाई है, ताकि पेंशन, ग्रेच्युटी और पदोन्नति जैसे अधिकार सुरक्षित रह सकें।
सम्मान और सुरक्षा की लड़ाई
गांवों के स्कूलों में आज भी यही शिक्षक बच्चों को भविष्य की राह दिखा रहे हैं, लेकिन खुद उनके भविष्य पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। यह मुद्दा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकारों की लड़ाई बन गया है।

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